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फूलों की खेती पर लगा कोरोना का ग्रहण
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सुल्तानपुर। जिले में फूलों की खेती करने वाले किसानों के सामने संकट उत्पन्न हो गया है। कोरोना कर्फ्यू के कारण करीब 10 हेक्टेयर भूमि में हो रही फूलों की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।
फूलों की मांग न होने के कारण किसान परेशान हो रहे हैं। धार्मिक स्थल बंद रहने व वैवाहिक आयोजन पर प्रतिबंध लगने की वजह से फूलों की खेती करने वाले किसानों का करीब 50 फीसदी का नुकसान हुआ है।
उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार जिले में लगभग 10 हेक्टेयर में किसानों ने फूलों की खेती की है। जिले के कई किसान लंबे समय से गेंदा समेत फूलों की विभिन्न प्रजातियों की खेती कर रहे हैं।
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पिछले दो साल से कोरोना वायरस से बचाव को लॉकडाउन के कारण फूल उत्पादक किसानों व उनसे जुड़े कारोबारियों ने कारोबार समेट कर दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। कई किसानों ने फूलों के स्थान पर सब्जी व दूसरी खेती करनी शुरू कर दी है। फूलों को बेचने वाले कारोबारियों ने भी दूसरे काम धंधे शुरू कर दिए हैं।
खेतों में बर्बाद हो रहे फूल
बल्दीराय। स्थानीय तहसील क्षेत्र के जरईकलां गांव के किसान वीरेंद्र सिंह एक एकड़ में गुलाब की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल से पहले उनका फूल अयोध्या, बस्ती, अमेठी आदि जिलों में थोक दर से भेजा जाता था।
पहले यह फूल 40 से 50 रुपये किलो तक बिक जाता था। इससे पूरे परिवार का खर्च आसानी से चल जाता था। आज धार्मिक स्थल व दुकानें बंद हैं। वैवाहिक कार्यक्रम भी चोरी-चुपके हो रहे हैं। फूलों की खपत नहीं होने से खेतों में बर्बाद हो रहा है।
फूल उत्पादक किसानों के सामने छाया संकट
फूल उत्पादक किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। फूलों की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू की वजह से फूल की मांग कम हो गई है। बाजार व धार्मिक स्थल भी बंद पड़े हैं। वैवाहिक कार्यक्रम के लिए सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दी है।
इस वजह से शादी में भी फूल की डिमांड कम हो गई है। किसान घेर्राऊ यादव कहते हैं कि फल व सब्जी बाजार में ले जाने की छूट है लेकिन फूलों को बेचने की मनाही है। सरकार की ओर से भी फूूूलों की खेती करने वाले किसानों को कोई राहत नहीं दी जा रही है।
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फूलों की मांग न होने के कारण किसान परेशान हो रहे हैं। धार्मिक स्थल बंद रहने व वैवाहिक आयोजन पर प्रतिबंध लगने की वजह से फूलों की खेती करने वाले किसानों का करीब 50 फीसदी का नुकसान हुआ है।
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उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार जिले में लगभग 10 हेक्टेयर में किसानों ने फूलों की खेती की है। जिले के कई किसान लंबे समय से गेंदा समेत फूलों की विभिन्न प्रजातियों की खेती कर रहे हैं।
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पिछले दो साल से कोरोना वायरस से बचाव को लॉकडाउन के कारण फूल उत्पादक किसानों व उनसे जुड़े कारोबारियों ने कारोबार समेट कर दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। कई किसानों ने फूलों के स्थान पर सब्जी व दूसरी खेती करनी शुरू कर दी है। फूलों को बेचने वाले कारोबारियों ने भी दूसरे काम धंधे शुरू कर दिए हैं।
खेतों में बर्बाद हो रहे फूल
बल्दीराय। स्थानीय तहसील क्षेत्र के जरईकलां गांव के किसान वीरेंद्र सिंह एक एकड़ में गुलाब की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल से पहले उनका फूल अयोध्या, बस्ती, अमेठी आदि जिलों में थोक दर से भेजा जाता था।
पहले यह फूल 40 से 50 रुपये किलो तक बिक जाता था। इससे पूरे परिवार का खर्च आसानी से चल जाता था। आज धार्मिक स्थल व दुकानें बंद हैं। वैवाहिक कार्यक्रम भी चोरी-चुपके हो रहे हैं। फूलों की खपत नहीं होने से खेतों में बर्बाद हो रहा है।
फूल उत्पादक किसानों के सामने छाया संकट
फूल उत्पादक किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। फूलों की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू की वजह से फूल की मांग कम हो गई है। बाजार व धार्मिक स्थल भी बंद पड़े हैं। वैवाहिक कार्यक्रम के लिए सरकार ने गाइडलाइन जारी कर दी है।
इस वजह से शादी में भी फूल की डिमांड कम हो गई है। किसान घेर्राऊ यादव कहते हैं कि फल व सब्जी बाजार में ले जाने की छूट है लेकिन फूलों को बेचने की मनाही है। सरकार की ओर से भी फूूूलों की खेती करने वाले किसानों को कोई राहत नहीं दी जा रही है।