{"_id":"64b044ffeaadca6b010765b4","slug":"expensive-medicines-have-to-be-bought-from-the-market-sultanpur-news-c-103-1-slko1047-429-2023-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sultanpur News: बाजार से खरीदना पड़ रहीं महंगी दवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sultanpur News: बाजार से खरीदना पड़ रहीं महंगी दवाएं
Fri, 14 Jul 2023 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 14 Jul 2023 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुल्तानपुर। यह चंद मामले तो मेडिकल कॉलेज के पुरुष अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की परेशानी की बानगी मात्र हैं। हकीकत में यहां अधिकांश मरीज हाथ में पर्चा लिए मेडिकल स्टोर का चक्कर लगाते हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही के कारण यहां तैनात चिकित्सक पूरी तरह मनमानी पर उतारू है।
इसके चलते ही कमीशन पाने के लिए मरीजों को ब्रांडेड कंपनियों की महंगी दवाएं ही ओपीडी में लिख कर दी जाती है। प्राचार्य से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से मरीजों को चिकित्सकों की मनमानी झेलना पड़ रही है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. एसके गोयल कुछ भी कहने से बचने के लिए चुप्पी साधे रहते हैं।
दोगुना से ज्यादा कीमत वसूल रहे मेडिकल स्टोर
मेडिकल स्टोरों पर मरीज जो दवाएं खरीदने पहुंच रहे हैं। उसमें डॉक्टरों का कमीशन भी जुड़ा होता है। इसलिए इन दवाओं में मेडिकल स्टोर एक भी पैसे की रियायत नहीं देते। वर्ना सामान्य तौर पर प्रिंट रेट में 10 से 20 प्रतिशत तक की छूट दे दी जाती है।
विज्ञापन
कमीशनबाजी को लेकर ही हुआ था हंगामा
दो दिन पहले ही एक ओपीडी में जूनियर डॉक्टर ने जन औषधि केंद्र से लाई गई दवा को खारिज कर दिया था। जिसकी वजह से तीमारदार और डॉक्टर में तकरार हो गई और आखिरकार तीमारदार पिट गया। यही नहीं जेआर ने इस मामले में उलटा जन औषधि केंद्र पर ही बाहर से दवा लिखवाने का दबाव बनाने का आरोप लगा दिया। इस मामले की जांच भी दो सदस्यीय कमेटी से कराए जाने की बात कही जा रही है।
बाहर से दवा लिखने पर सख्ती से रोक है। इसके बावजूद इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जाएगी। पुख्ता तथ्य व सबूत मिलने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी तय होगी।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य
जन औषधि केंद्र पर नहीं मिली दवा
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी से पेट दर्द की तकलीफ दिखा कर बाहर निकले सूर्यप्रताप के हाथ में दवा की पर्ची थी। वह दवा लेने जन औषधि केंद्र तक पहुंचे तो काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने बताया कि यह दवा तो बाहर मेडिकल स्टोर से मिलेगी। मजबूरी में उन्हें सात सौ रुपये की दवा बाजार जाकर खरीदना पड़ी।
534 रुपये में खरीदी सर्पदंश की दवा
दूबेपुर क्षेत्र की बिकना निवासी 45 वर्षीय प्रमिला को बीते दिनों सांप ने डस लिया था। दो दिनों से उन्हें सिरदर्द और उलझन हो रही थी। बृहस्पतिवार को ओपीडी में दिखाया तो डॉक्टर ने बाहर की दवा लिख दी। प्रमिला को मेडिकल स्टोर से 534 रुपये की दवा खरीदनी पड़ी।
ओपीडी में लिखी बाहर की दवा
पांचोपीरन निवासी 50 वर्षीय किस्मतुल निशा को आंत में संक्रमण की शिकायत थी। ओपीडी में दिखाकर दवाई लिखवाई। जन औषधि केंद्र पर पता किया तो उन्होंने बताया कि यह दवा बाहर मेडिकल स्टोर पर मिलेगी। वहीं साजिया बानो भी ओपीडी में खुद को दिखाने आई थीं। ओपीडी के डॉक्टर ने देखने के बाद उन्हें भी बाहर की दवा लिख दी।
विज्ञापन
इसके चलते ही कमीशन पाने के लिए मरीजों को ब्रांडेड कंपनियों की महंगी दवाएं ही ओपीडी में लिख कर दी जाती है। प्राचार्य से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से मरीजों को चिकित्सकों की मनमानी झेलना पड़ रही है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. एसके गोयल कुछ भी कहने से बचने के लिए चुप्पी साधे रहते हैं।
विज्ञापन
दोगुना से ज्यादा कीमत वसूल रहे मेडिकल स्टोर
मेडिकल स्टोरों पर मरीज जो दवाएं खरीदने पहुंच रहे हैं। उसमें डॉक्टरों का कमीशन भी जुड़ा होता है। इसलिए इन दवाओं में मेडिकल स्टोर एक भी पैसे की रियायत नहीं देते। वर्ना सामान्य तौर पर प्रिंट रेट में 10 से 20 प्रतिशत तक की छूट दे दी जाती है।
विज्ञापन
कमीशनबाजी को लेकर ही हुआ था हंगामा
दो दिन पहले ही एक ओपीडी में जूनियर डॉक्टर ने जन औषधि केंद्र से लाई गई दवा को खारिज कर दिया था। जिसकी वजह से तीमारदार और डॉक्टर में तकरार हो गई और आखिरकार तीमारदार पिट गया। यही नहीं जेआर ने इस मामले में उलटा जन औषधि केंद्र पर ही बाहर से दवा लिखवाने का दबाव बनाने का आरोप लगा दिया। इस मामले की जांच भी दो सदस्यीय कमेटी से कराए जाने की बात कही जा रही है।
बाहर से दवा लिखने पर सख्ती से रोक है। इसके बावजूद इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जाएगी। पुख्ता तथ्य व सबूत मिलने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी तय होगी।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य
जन औषधि केंद्र पर नहीं मिली दवा
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी से पेट दर्द की तकलीफ दिखा कर बाहर निकले सूर्यप्रताप के हाथ में दवा की पर्ची थी। वह दवा लेने जन औषधि केंद्र तक पहुंचे तो काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने बताया कि यह दवा तो बाहर मेडिकल स्टोर से मिलेगी। मजबूरी में उन्हें सात सौ रुपये की दवा बाजार जाकर खरीदना पड़ी।
534 रुपये में खरीदी सर्पदंश की दवा
दूबेपुर क्षेत्र की बिकना निवासी 45 वर्षीय प्रमिला को बीते दिनों सांप ने डस लिया था। दो दिनों से उन्हें सिरदर्द और उलझन हो रही थी। बृहस्पतिवार को ओपीडी में दिखाया तो डॉक्टर ने बाहर की दवा लिख दी। प्रमिला को मेडिकल स्टोर से 534 रुपये की दवा खरीदनी पड़ी।
ओपीडी में लिखी बाहर की दवा
पांचोपीरन निवासी 50 वर्षीय किस्मतुल निशा को आंत में संक्रमण की शिकायत थी। ओपीडी में दिखाकर दवाई लिखवाई। जन औषधि केंद्र पर पता किया तो उन्होंने बताया कि यह दवा बाहर मेडिकल स्टोर पर मिलेगी। वहीं साजिया बानो भी ओपीडी में खुद को दिखाने आई थीं। ओपीडी के डॉक्टर ने देखने के बाद उन्हें भी बाहर की दवा लिख दी।