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इंग्लिश मीडियम के प्रश्नपत्रों से हलकान हुए बीएससी कृषि के परीक्षार्थी
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सुल्तानपुर। बीएससी कृषि की परीक्षा में लगातार इंग्लिश मीडियम के प्रश्नपत्र आने से परीक्षार्थी हलकान हो रहे हैं। परीक्षा केंद्र केएनआईपीएसएस के शिक्षकों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
आमतौर पर परीक्षा में हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषा में प्रश्नपत्र मुद्रित होकर आते हैं। इससे विद्यार्थियों को सहूूलियत होती है। इस बार बीएससी कृषि की परीक्षा में प्रश्नपत्र सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही छपे हुए मिल रहे हैं। हिंदी मीडियम से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र हल करने में समस्या आ रही है। कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान में बीएससी कृषि की दोनों पालियों में प्रश्नपत्र अंग्रेजी भाषा में छपे हुए वितरित किए गए। परीक्षार्थी अंग्रेजी माध्यम के प्रश्नपत्रों पर लगातार आपत्ति कर रहे हैं। इसके बाद भी विश्वविद्यालय की गलतियों का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। परीक्षा केंद्र के शिक्षक भी इससे परेशान हो रहे हैं। केएनआईपीएसएस के प्राचार्य प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा कक्षों में जाकर शिक्षकों को प्रश्नपत्र का हिंदी अनुवाद कर बताना पड़ रहा है। ताकि विद्यार्थी परीक्षा से वंचित न हो जाएं।
दूसरे संकाय के शिक्षकों ने बनाया पेपर
बीएससी कृषि का प्रश्नपत्र बनाने के लिए कृषि से संबंधित शिक्षकों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए लेकिन अवध विश्वविद्यालय ने कृषि के बजाय विज्ञान संकाय के शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी दी थी। इस वजह से यह समस्या आ रही है। केएनआईपीएसएस के प्राचार्य प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में कृषि के शिक्षक होने के बावजूद दूसरे संकाय के लोगों को जिम्मेदारी देना समझ से परे है।
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आमतौर पर परीक्षा में हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषा में प्रश्नपत्र मुद्रित होकर आते हैं। इससे विद्यार्थियों को सहूूलियत होती है। इस बार बीएससी कृषि की परीक्षा में प्रश्नपत्र सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही छपे हुए मिल रहे हैं। हिंदी मीडियम से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र हल करने में समस्या आ रही है। कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान में बीएससी कृषि की दोनों पालियों में प्रश्नपत्र अंग्रेजी भाषा में छपे हुए वितरित किए गए। परीक्षार्थी अंग्रेजी माध्यम के प्रश्नपत्रों पर लगातार आपत्ति कर रहे हैं। इसके बाद भी विश्वविद्यालय की गलतियों का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। परीक्षा केंद्र के शिक्षक भी इससे परेशान हो रहे हैं। केएनआईपीएसएस के प्राचार्य प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह ने बताया कि परीक्षा कक्षों में जाकर शिक्षकों को प्रश्नपत्र का हिंदी अनुवाद कर बताना पड़ रहा है। ताकि विद्यार्थी परीक्षा से वंचित न हो जाएं।
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दूसरे संकाय के शिक्षकों ने बनाया पेपर
बीएससी कृषि का प्रश्नपत्र बनाने के लिए कृषि से संबंधित शिक्षकों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए लेकिन अवध विश्वविद्यालय ने कृषि के बजाय विज्ञान संकाय के शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी दी थी। इस वजह से यह समस्या आ रही है। केएनआईपीएसएस के प्राचार्य प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में कृषि के शिक्षक होने के बावजूद दूसरे संकाय के लोगों को जिम्मेदारी देना समझ से परे है।
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