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चुनावी हवा का रुख बदलने में सक्षम जिले के युवा
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सुल्तानपुर। जिले के युवा वोटर विधानसभा चुनाव का रुख किसी भी तरफ मोड़ने में सक्षम नजर आ रहा है। जिले में करीब 50 फीसदी युवा मतदाताओं की संख्या को देखते हुए सभी दलों के प्रत्याशी युवाओं पर डोरे डालने में लग गए हैं। बेरोजगार की समस्या से जूझ रहे बड़ी संख्या में युवा वोटर चुनावी मैदान में प्रत्याशियों के प्रचार में उतर भी पड़े हैं।
जिले में पांचवें चरण में कराए जाने वाले विधानसभा चुनाव के मतदान को लेकर प्रत्याशी मैदान में उतर पड़े हैं। प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। इस चुनाव में रोड शो, बाइक, साइकिल रैली व जुलूस पर प्रतिबंध लगने व रैली के आयोजन में भी मैदान के हिसाब से संख्या सीमित किए जाने से राजनीतिक दल चिंतित हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर चल रही पाबंदियों के बावजूद क्षेत्र में अपना चुनावी माहौल बनाने के लिए प्रत्याशियों की ओर से बेरोजगारी से जूझ रहे युवा वोटरों पर डोरे डाले जा रहे हैं। प्रत्याशाियों के झांसे में आकर बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा वोटर उनके साथ जुड़ भी गए हैं।
युवा वोटर प्रत्याशियों के साथ चुनाव प्रचार में कूद पड़े हैं। हालांकि कितनी तादाद में युवा किस प्रत्याशी के साथ हैं इनका आकलन करना मुश्किल है लेकिन माना जा रहा है कि बहुसंख्यक युवा जिस प्रत्याशी की ओर रुख करेगा चुनाव की बाजी उसी के हाथ लग सकती है। निर्वाचन विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पांच विधानसभा क्षेत्र वाले जिले में मौजूदा समय में कुल मतदाताओं की संख्या 18,28,983 है। इसमें 18 से 39 वर्ष की उम्र के मतदाताओं की कुल संख्या 8,99,030 है। समाजसेवी नीरव पांडेय बताते हैं कि युवा उत्साही होता है। वह प्रत्याशी के साथ जुड़ता है तो क्षेत्र में माहौल बनाता है। माहौल का लाभ प्रत्याशी को चुनाव में मिलता है।
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राणा प्रताप पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सुनील त्रिपाठी कहते हैं कि युवा वोटर निर्णायक होते हैं। युवा वर्ग का अनुसरण अन्य लोग भी करते हैं। चुनाव में यह वर्ग जिधर घूमेगा मजबूती उसे ही मिलेगी। गनपत सहाय पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य अरुण मिश्र ने कहा कि युवा वर्ग हमेशा विकास व भविष्य की सोच को लेकर चलता है। हर चुनाव में युवा वर्ग की खास भूमिका होती है। युवा जिधर घूमता है बयार उसी तरफ बहने लगती है।
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जिले में पांचवें चरण में कराए जाने वाले विधानसभा चुनाव के मतदान को लेकर प्रत्याशी मैदान में उतर पड़े हैं। प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया है। इस चुनाव में रोड शो, बाइक, साइकिल रैली व जुलूस पर प्रतिबंध लगने व रैली के आयोजन में भी मैदान के हिसाब से संख्या सीमित किए जाने से राजनीतिक दल चिंतित हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर चल रही पाबंदियों के बावजूद क्षेत्र में अपना चुनावी माहौल बनाने के लिए प्रत्याशियों की ओर से बेरोजगारी से जूझ रहे युवा वोटरों पर डोरे डाले जा रहे हैं। प्रत्याशाियों के झांसे में आकर बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा वोटर उनके साथ जुड़ भी गए हैं।
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युवा वोटर प्रत्याशियों के साथ चुनाव प्रचार में कूद पड़े हैं। हालांकि कितनी तादाद में युवा किस प्रत्याशी के साथ हैं इनका आकलन करना मुश्किल है लेकिन माना जा रहा है कि बहुसंख्यक युवा जिस प्रत्याशी की ओर रुख करेगा चुनाव की बाजी उसी के हाथ लग सकती है। निर्वाचन विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पांच विधानसभा क्षेत्र वाले जिले में मौजूदा समय में कुल मतदाताओं की संख्या 18,28,983 है। इसमें 18 से 39 वर्ष की उम्र के मतदाताओं की कुल संख्या 8,99,030 है। समाजसेवी नीरव पांडेय बताते हैं कि युवा उत्साही होता है। वह प्रत्याशी के साथ जुड़ता है तो क्षेत्र में माहौल बनाता है। माहौल का लाभ प्रत्याशी को चुनाव में मिलता है।
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राणा प्रताप पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सुनील त्रिपाठी कहते हैं कि युवा वोटर निर्णायक होते हैं। युवा वर्ग का अनुसरण अन्य लोग भी करते हैं। चुनाव में यह वर्ग जिधर घूमेगा मजबूती उसे ही मिलेगी। गनपत सहाय पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य अरुण मिश्र ने कहा कि युवा वर्ग हमेशा विकास व भविष्य की सोच को लेकर चलता है। हर चुनाव में युवा वर्ग की खास भूमिका होती है। युवा जिधर घूमता है बयार उसी तरफ बहने लगती है।