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वापस होंगे ग्राम शिक्षा निधि में डंप लगभग सात करोड़ रुपयेष्टद्धड्डठ्ठद्दद्गञ्जद्बह्लद्यद्ग
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सुल्तानपुर। वर्ष 2013 से एसएमसी (विद्यालय प्रबंध समिति) के गठन के बाद ग्राम शिक्षा निधि के खातों को बंद कर दिया गया था। इन खातों में जमा लगभग सात करोड़ रुपये की धनराशि डंप हैं। शासन इन पैसों को वापस मंगाकर दूसरे मदों में प्रयोग करेगा।
जिले में 1735 प्राथमिक एवं 612 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। विद्यालयों में होने वाले खर्च का भुगतान वर्ष 2013 तक ग्राम शिक्षा निधि नाम से खुले खाते से होता था।
इस खाते का संचालन प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर से होता था। खाते में रंगाई-पुताई, विद्यालय भवन मरम्मत, नवीन निर्माण, छात्रवृत्ति एवं यूनिफार्म का पैसा आता था।
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वर्ष 2013 में इन खातों को अचानक बंद कर दिया गया और इसके स्थान पर एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) का गठन कर नए खाते खुलवाए गए। इसमें विद्यालय प्रबंध समिति का अध्यक्ष, अभिभावकों में से किसी एक को चुना जाता है।
साथ ही अभिभावकों में से 11 सदस्य भी चुने जाते हैं। कमेटी में प्रधानाध्यापक पदेन सचिव होता है। एसएमसी खाते का संचालन विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष एवं प्रधाना,्यापक के खाते से होता है।
एसएमसी खाते से अब अनुरक्षण, कंपोजिट ग्रांट, विद्यालय विकास, खेलकूद, पुस्तकालय, यूनिफार्म, परीक्षा एवं टीएलएम के पैसे का उपयोग होता है। वर्ष 2013 में अचानक बंद किए गए ग्राम शिक्षा निधि के सभी खातों पर लेनदेन पर रोक लगा दी गई थी।
प्रत्येक विद्यालय में 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक की धनराशि ग्राम शिक्षा निधि खातों में जमा है। शासन ने ग्राम शिक्षा निधि के खातों में डंप रुपयों का विवरण तलब किया है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से जो सूचना मंगाई है, उसके मुताबिक छह करोड़ 83 लाख 66 हजार 852 रुपये ग्राम शिक्षा निधि के खातों में डंप है।
ग्राम शिक्षा निधि के खातों में डंप पैसों को पहले भी वापस किया जा चुका है। 30 मार्च 2019 को ग्राम शिक्षा निधि खातों में डंप 13 करोड़ 68 लाख 58 हजार 640 रुपये राज्य परियोजना कार्यालय को वापस भेजे जा चुके हैं।
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जिले में 1735 प्राथमिक एवं 612 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। विद्यालयों में होने वाले खर्च का भुगतान वर्ष 2013 तक ग्राम शिक्षा निधि नाम से खुले खाते से होता था।
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इस खाते का संचालन प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर से होता था। खाते में रंगाई-पुताई, विद्यालय भवन मरम्मत, नवीन निर्माण, छात्रवृत्ति एवं यूनिफार्म का पैसा आता था।
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वर्ष 2013 में इन खातों को अचानक बंद कर दिया गया और इसके स्थान पर एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) का गठन कर नए खाते खुलवाए गए। इसमें विद्यालय प्रबंध समिति का अध्यक्ष, अभिभावकों में से किसी एक को चुना जाता है।
साथ ही अभिभावकों में से 11 सदस्य भी चुने जाते हैं। कमेटी में प्रधानाध्यापक पदेन सचिव होता है। एसएमसी खाते का संचालन विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष एवं प्रधाना,्यापक के खाते से होता है।
एसएमसी खाते से अब अनुरक्षण, कंपोजिट ग्रांट, विद्यालय विकास, खेलकूद, पुस्तकालय, यूनिफार्म, परीक्षा एवं टीएलएम के पैसे का उपयोग होता है। वर्ष 2013 में अचानक बंद किए गए ग्राम शिक्षा निधि के सभी खातों पर लेनदेन पर रोक लगा दी गई थी।
प्रत्येक विद्यालय में 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख तक की धनराशि ग्राम शिक्षा निधि खातों में जमा है। शासन ने ग्राम शिक्षा निधि के खातों में डंप रुपयों का विवरण तलब किया है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से जो सूचना मंगाई है, उसके मुताबिक छह करोड़ 83 लाख 66 हजार 852 रुपये ग्राम शिक्षा निधि के खातों में डंप है।
ग्राम शिक्षा निधि के खातों में डंप पैसों को पहले भी वापस किया जा चुका है। 30 मार्च 2019 को ग्राम शिक्षा निधि खातों में डंप 13 करोड़ 68 लाख 58 हजार 640 रुपये राज्य परियोजना कार्यालय को वापस भेजे जा चुके हैं।