{"_id":"630277f42b9f5056e1430037","slug":"dam-crack-sultanpur-news-lko644651558","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच वर्ष पहले गोमती नदी के किनारे बने बांध में आई दरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पांच वर्ष पहले गोमती नदी के किनारे बने बांध में आई दरार
विज्ञापन
गोमती नदी के बांध में आई दरार को दिखाता ग्रामीण।
- फोटो : SULTANPUR
सुल्तानपुर। बल्दीराय क्षेत्र के पिपरी गांव के पास गोमती नदी के किनारे करीब सवा पांच करोड़ रुपये से बने बांध में एक जगह दरार आ गई है। दरार की वजह से तीन स्थानों पर बांध में नीचे होल हो गया है। तीन साल पहले ही करीब 20 मीटर बंधा नदी के पानी के बहाव में बह गया था। बंधे में आई दरार से तेज बारिश में नदी का जल स्तर बढ़ने पर आसपास के गांवों को फिर खतरा बना हुआ है।
गोमती नदी में वर्ष 2008 में आई बाढ़ से कटान मेें हलियापुर से वाया कांकरकोला पिपरी संपर्क मार्ग करीब 400 मीटर नदी में समा गया था। इससे आसपास के कई गांवों की करीब 25 हजार आबादी के समक्ष आवाजाही का संकट पैदा हो गया था। इसमें पिपरी, पूरे जबर, जमालपुर, नेवादा, गौरापरानी, कांकरकोला, हलियापुर व पीपरपुर समेत अन्य गांवों के लोगों के सामने बाढ़ से नुकसान का खतरा बना था। बाढ़ आने से कटान की दशा में आसपास के कई गांवों के अस्तित्व पर भी संकट बना था। हालांकि तब से बड़ी बाढ़ नहीं आने की वजह से खतरा टलता चला आ रहा था। भविष्य में खतरे को देखते हुए स्थानीय लोग प्रशासन व शासन से गोमती नदी के किनारे बंधा बनाने की मांग करते आ रहे थे।
मांग पूरी न होने पर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में स्थानीय लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया था।
इसकी जानकारी मिलने पर अमेठी की भाजपा सांसद व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के प्रयास से नदी के किनारे करीब 1725 मीटर में सवा पांच करोड़ रुपये की लागत से बंधा स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2017 में बंधे के निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। घटिया निर्माण की वजह से वर्ष 2019 में एक जगह बंधा गोमती नदी में उफान आने पर करीब 20 मीटर बह गया था। यह सूचना केंद्रीय मंत्री व अधिकारियों तक पहुंचने पर कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग ने बंधे की मरम्मत कराई। कमजोर निर्माण से पिपरी के पास बने बंधे में एक जगह दरार आ गई है। दरार की वजह से तीन-चार जगहों पर बंधे में नीचे होल हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोमती नदी में वर्ष 2008 में आई बाढ़ से कटान मेें हलियापुर से वाया कांकरकोला पिपरी संपर्क मार्ग करीब 400 मीटर नदी में समा गया था। इससे आसपास के कई गांवों की करीब 25 हजार आबादी के समक्ष आवाजाही का संकट पैदा हो गया था। इसमें पिपरी, पूरे जबर, जमालपुर, नेवादा, गौरापरानी, कांकरकोला, हलियापुर व पीपरपुर समेत अन्य गांवों के लोगों के सामने बाढ़ से नुकसान का खतरा बना था। बाढ़ आने से कटान की दशा में आसपास के कई गांवों के अस्तित्व पर भी संकट बना था। हालांकि तब से बड़ी बाढ़ नहीं आने की वजह से खतरा टलता चला आ रहा था। भविष्य में खतरे को देखते हुए स्थानीय लोग प्रशासन व शासन से गोमती नदी के किनारे बंधा बनाने की मांग करते आ रहे थे।
विज्ञापन
मांग पूरी न होने पर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में स्थानीय लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया था।
इसकी जानकारी मिलने पर अमेठी की भाजपा सांसद व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के प्रयास से नदी के किनारे करीब 1725 मीटर में सवा पांच करोड़ रुपये की लागत से बंधा स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2017 में बंधे के निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था। घटिया निर्माण की वजह से वर्ष 2019 में एक जगह बंधा गोमती नदी में उफान आने पर करीब 20 मीटर बह गया था। यह सूचना केंद्रीय मंत्री व अधिकारियों तक पहुंचने पर कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग ने बंधे की मरम्मत कराई। कमजोर निर्माण से पिपरी के पास बने बंधे में एक जगह दरार आ गई है। दरार की वजह से तीन-चार जगहों पर बंधे में नीचे होल हो गया है।
विज्ञापन