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दुर्गापूजा महोत्सव पर भी मंडरा रहे कोरोना संकट के बादल

Tue, 11 Aug 2020 09:12 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 09:12 PM IST
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Corona crisis clouds on Durga Puja festival too
सुल्तानपुर। वर्षों से चली आ रही दुर्गापूजा महोत्सव की ऐतिहासिक परंपरा इस साल कोरोना की वजह से खटाई में पड़ती दिख रही है। आमतौर पर अगस्त महीने में दुर्गापूजा महोत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाहर से आने वाले मूर्तिकार अपने काम में लग जाते हैं लेकिन इस बार ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है।
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ऐतिहासिक दुर्गापूजा महोत्सव नवरात्रि के अंतिम दिन से शुरू होता है, जो पूर्णिमा तक चलता है। सुल्तानपुर का दुर्गापूजा महोत्सव बहुत ही भव्य होता है। आसपास के जिलों से लोग दुर्गापूजा की छटा देखने यहां आते हैं। इस बार कोरोना की वजह से दुर्गापूजा महोत्सव पर ग्रहण लगता दिख रहा है। दुर्गापूजा महोत्सव के लिए मूर्तियों के निर्माण की शुरुआत अभी तक नहीं हो सकी है।
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आमतौर पर इस समय तक शहर में कई जगह प्रतिमाओं का निर्माण कार्य शुरू हो जाता है। पश्चिम बंगाल से तमाम कारीगर पहुंचकर प्रतिमाओं के निर्माण में जुट जाते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए भी यही कारीगर प्रतिमाएं बनाकर देते हैं। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी लोग अपने घरों में ही मना रहे हैं।
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प्रतिमाओं के निर्माण के अलावा साजसज्जा के लिए लाइट, टेंट की व्यवस्था भी शुरू हो जाती है। विसर्जन यात्रा के लिए बैंडबाजों की भी बुकिंग हो जाया करती है। मगर कोरोना की वजह से इस बार अभी तक कोई तैयारी नहीं हुई है। कोरोना संक्रमण इसी तरह जारी रहा तो दुर्गापूजा महोत्सव पर ग्रहण लग सकता है।
जिले में दुर्गापूजा का शुभारंभ 1959 में ठठेरी बाजार में भिखारीलाल सोनी व उनके सहयोगियों ने किया था। यहां से शुरू हुआ दुर्गापूजा का सिलसिला समय के साथ ही बढ़ता गया। दूसरी मूर्ति की स्थापना रुहट्ठा गली में बंगाली प्रसाद सोनी ने 1961 में कराई। 1970 में दो प्रतिमाएं और जुड़ीं। इसके अगले वर्ष कालीचरन ने श्री संतोषी माता और राजेंद्र प्रसाद (रज्जन सेठ) ने मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना कराई।
1973 में श्री अष्टभुजी माता, श्री अंबे माता, श्री गायत्री माता, श्री अन्नपूर्णा माता की स्थापना के साथ ही ये आयोजन दुर्गापूजा महोत्सव में तब्दील हो गया। शहर के दुर्गापूजा महोत्सव से प्रेरित होकर जिले की सभी तहसीलों व कस्बाई क्षेत्रों में भी प्रतिमाओं की स्थापना की जाने लगी है। आज जिले का दुर्गापूजा महोत्सव पूरे देश में दूसरे स्थान पर माना जाता है। कोविड-19 के संक्रमण की वजह से इस बार 60 वर्षों पुरानी दुर्गापूजा महोत्सव की परंपरा टूटती नजर आ रही है।

केंद्रीय पूजा व्यवस्था समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय बजरंगी ने बताया कि कोरोना की वजह से ऐतिहासिक दुर्गापूजा महोत्सव की तैयारियां अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं। संक्रमण की वजह से कारीगर भी अभी तक नहीं आ सके हैं। ऐसे में संक्रमण की स्थिति को देखते हुए जो भी दिशा-निर्देश शासन से प्राप्त होगा, उसी के मुताबिक दुर्गापूजा की व्यवस्था की जाएगी।
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