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18 से शुरू होगा पूर्वांचल का महापर्व डाला छठ
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सुल्तानपुर। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख त्योहार डाला छठ 18 नवंबर को नहाय खाय से शुरू होगा। पर्व चार दिनों तक चलेगा। स्वर्णकार समाज ने शहर के सीताकुंड धाम पर त्योहार को मनाए जाने को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया है।
इस बार डाला छठ का त्योहार 18 से 21 नवंबर तक मनाया जाएगा। 18 को नहाय खाय, 19 को खरना, 20 को संध्या अर्घ्य और 21 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ त्योहार का समापन होगा।
इन चार दिनों में लोगों को कड़े नियमों का पालन करना होता है। छठ पूजा से संबंधित व्यंजन व प्रसाद बनाया जाता है। 18 नवंबर को नहाय खाय के दिन घर में जो भी छठ व्रत करने का संकल्प लेता है, वह स्नान के बाद नए वस्त्र धारण करता है। फिर व्रतधारी शाकाहारी भोजन करते हैं।
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इसके अगले दिन खरना होता है। इस दिन से सभी लोग उपवास करना शुरू कर देते हैं। छठ के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद त्योहार का समापन हो जाता है।
डाला छठ के त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के संबंध में स्वर्णकार समाज के पूर्व अध्यक्ष गोपालजी सोनी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा है कि आदि गंगा गोमती के सीताकुंड घाट पर शहर व इससे सटे आसपास के गांवों की महिलाएं डाला छठ की पूजा करने आती हैं। सीताकुंड घाट पर काफी भीड़ रहती है। ज्ञापन में त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन की मदद मांगी गई है।
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इस बार डाला छठ का त्योहार 18 से 21 नवंबर तक मनाया जाएगा। 18 को नहाय खाय, 19 को खरना, 20 को संध्या अर्घ्य और 21 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ त्योहार का समापन होगा।
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इन चार दिनों में लोगों को कड़े नियमों का पालन करना होता है। छठ पूजा से संबंधित व्यंजन व प्रसाद बनाया जाता है। 18 नवंबर को नहाय खाय के दिन घर में जो भी छठ व्रत करने का संकल्प लेता है, वह स्नान के बाद नए वस्त्र धारण करता है। फिर व्रतधारी शाकाहारी भोजन करते हैं।
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इसके अगले दिन खरना होता है। इस दिन से सभी लोग उपवास करना शुरू कर देते हैं। छठ के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद त्योहार का समापन हो जाता है।
डाला छठ के त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के संबंध में स्वर्णकार समाज के पूर्व अध्यक्ष गोपालजी सोनी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा है कि आदि गंगा गोमती के सीताकुंड घाट पर शहर व इससे सटे आसपास के गांवों की महिलाएं डाला छठ की पूजा करने आती हैं। सीताकुंड घाट पर काफी भीड़ रहती है। ज्ञापन में त्योहार को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन की मदद मांगी गई है।