निर्जला व्रतधारी महिलाओं ने दिया उगते सूर्य को अर्घ्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संतान की लंबी आयु व परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ डाला छठ पर्व पर 36 घंटे की निर्जला व्रतधारी महिलाओं ने शहर के सीताकुंड घाट स्थित आदि गंगा गोमती में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। चार दिवसीय डाला छठ के अंतिम दिन शुक्रवार को गोमती नदी के सीताकुंड घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर से ही आदि गंगा गोमती में खड़ी व्रती महिलाओं पर नदी का ठंडा पानी उनकी आस्था के आगे बौना साबित हुआ।
भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद चार दिनों तक चलने वाली इस तपस्या का अंतिम चरण खुशनुमा माहौल में समाप्त हुआ। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के चेहरों पर मनोकामना पूरी होने की उम्मीद की झलक दिखाई दे रही थी। घर पहुंचकर महिलाओं ने अपने व्रत का पारण किया।
निर्जला व्रतधारी महिलाएं पूरी रात पास पड़ोस की महिलाओं के साथ रतजगा किया। नींद को भगाने के लिएa महिलाओं का समूह पूरी रात छठ माता के गीतों से गुंजायमान रहा। घर के पुरुष सदस्य सुबह जल्दी उठने के लिए कहीं मोबाइल व घड़ी में अलार्म सेट कर रखे थे। शुक्रवार को भोर से ही स्नान ध्यान के बाद लोगों का हुजूम एक बार फिर आदि गंगा गोमती नदी के किनारे सीताकुंड घाट पर जुटा। 36 घंटे का व्रत रखने वाली महिलाओं के साथ चलने वाले वयस्क व बच्चों के सिर पर पूजा के सामान थे। भोर में घरों से निकली समूह में जा रही महिलाएं छठ मइया के गीत गा रही थीं।
हाथ में कलश और उस पर जलते दीपक के साथ घरों से आदि गंगा गोमती में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए निकली व्रती महिलाओं को देखने के बाद ऐसा लग रहा था मानों रात के अंधेरे में साक्षात देवियां सड़क पर निकल पड़ी हों। इस दौरान सीताकुंड घाट पर जलते दीपक की अद्भुत छटा बिखेर रही थी। सूर्योदय का समय नजदीक आने के साथ ही घाट पर भीड़ बढ़ती गई। आदि गंगा गोमती नदी में पूरब की ओर मुंह करके खड़ी निर्जला व्रतधारी महिलाओं ने सूर्य की किरण दिखने तक तपस्या किया। इस बीच घाट पर महिलाओं के छठ मइया से जुड़े गीतों से वातावरण गूंजता रहा। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने दान पुण्य किया और घर पहुंचकर चौखट की पूजा की। इसके बाद बेदी पर चढ़ाए गए चने को निगलकर व्रत का पारण किया।