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महिलाओं की चीत्कार से दहल गया नेकराही गांव
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नेकराही गांव में रोते-बिलखते परिवारीजन।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। गांव के पांच लोगों की सड़क हादसे में मौत होने की सूचना मिलते ही नेकराही में कोहराम मच गया। गांव के पुरुष रोते-बिलखते पोस्टमॉर्टम हाउस की ओर भाग खड़े हुए। वहीं, महिलाएं दहाड़ें मारकर बिलख पड़ीं। महिलाओं की चीत्कार से पूरा नेकराही गांव दहल उठा। मौतों की सूचना पाकर संबंधित लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों का नेकराही गांव में तांता लग गया। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था कि वह पीड़ित परिवारों को क्या दिलासा दे। उन्हें क्या ढांढ़स बंधाए।
एक ही खानदान के छह लोग राजेंद्र की बुजुर्ग बुआ जानकी देवी की मौत की सूचना पर शुक्रवार की सुबह एक ई-रिक्शा से गोसाईंगंज के हयातनगर के लिए निकल पड़े। मातमपुर्सी में जा रहे परिवारीजनों को क्या पता था कि कुछ ही देर में वे खुद मातम की वजह बन जाएंगे। उनके लिए बेकाबू ट्रेलर काल बन गया। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई जबकि दो लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। मरने वालों में कमनगढ़ निवासी ई-रिक्शा चालक भी शामिल है। हादसे का शिकार हुई निर्मला, रघुवीर, राजेंद्र, फूलकली और राम सुरेश के शवों का गांव में शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुरेश के भाई दिनेश ने बताया कि परिवार के अधिकांश लोग बाहर रहते हैं। शनिवार को उनके पहुंचने पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
दंपती की मौत, बच्चे हुए अनाथ
हादसे में मरने वाले छह लोगों में से पांच एक ही गांव व खानदान के हैं। रघुवीर और उनकी पत्नी निर्मला देवी की एक साथ मौत से उनके तीन बच्चे अनाथ हो गये हैं। वहीं, पड़ोसी फूलकली, सुरेश और राजेंद्र की भी मौके पर ही मौत हो गई। राजेंद्र की पत्नी अमरावती भी कोमा में है, जिसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।
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लोडर पर लादकर ले जाए गये पांच शव
सड़क हादसे में छह लोगों की मौत होने के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन जिला अस्पताल में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशील नजर आया लेकिन अस्पताल से पोस्टमॉर्टम हाउस तक शवों को एक अदद एंबुलेंस तक नहीं मुहैया करा सका। डीएम, एसपी, एसडीएम, सीओ, सीएमओ तक अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया कि शवों का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद उन्हें घर तक कैसे पहुंचाया जाए। विवश होकर पीड़ित परिवार को सभी पांच शवों को एक लोडर पर लादकर घर ले जाना पड़ा।
पोस्टमार्टम के लिए देने पड़े पैसे
जिला अस्पताल में मृत घोषित किए गए पांच घायलों के शवों को मॉर्च्युरी में रखवाया गया। इसके साथ अस्पताल में सक्रिय कुछ लोगों ने हादसे के शिकार हुए सुरेश के भाई दिनेश से पोस्टमार्टम कराने के लिए प्रति शव पांच सौ रुपये की मांग की। दिनेश ने रुपये नहीं होने की बात कही तो बताया गया कि पोस्टमॉर्टम होने के बाद दे देना। आर्थिक मजबूरी की स्थिति में मामला कुछ छह सौ रुपये पर तय हुआ। इसके बाद मृतक के भाई ने नेकराही के प्रधान असलम से बात की। ग्राम प्रधान ने अपने पास से दिनेश को छह सौ रुपये दिए। दिनेश ने बताया कि छह सौ रुपये पोस्टमॉर्टम हाउस के अंदर काम करने वाले युवक ने लिया है।
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एक ही खानदान के छह लोग राजेंद्र की बुजुर्ग बुआ जानकी देवी की मौत की सूचना पर शुक्रवार की सुबह एक ई-रिक्शा से गोसाईंगंज के हयातनगर के लिए निकल पड़े। मातमपुर्सी में जा रहे परिवारीजनों को क्या पता था कि कुछ ही देर में वे खुद मातम की वजह बन जाएंगे। उनके लिए बेकाबू ट्रेलर काल बन गया। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई जबकि दो लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। मरने वालों में कमनगढ़ निवासी ई-रिक्शा चालक भी शामिल है। हादसे का शिकार हुई निर्मला, रघुवीर, राजेंद्र, फूलकली और राम सुरेश के शवों का गांव में शनिवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुरेश के भाई दिनेश ने बताया कि परिवार के अधिकांश लोग बाहर रहते हैं। शनिवार को उनके पहुंचने पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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दंपती की मौत, बच्चे हुए अनाथ
हादसे में मरने वाले छह लोगों में से पांच एक ही गांव व खानदान के हैं। रघुवीर और उनकी पत्नी निर्मला देवी की एक साथ मौत से उनके तीन बच्चे अनाथ हो गये हैं। वहीं, पड़ोसी फूलकली, सुरेश और राजेंद्र की भी मौके पर ही मौत हो गई। राजेंद्र की पत्नी अमरावती भी कोमा में है, जिसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।
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लोडर पर लादकर ले जाए गये पांच शव
सड़क हादसे में छह लोगों की मौत होने के बाद सक्रिय हुआ प्रशासन जिला अस्पताल में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशील नजर आया लेकिन अस्पताल से पोस्टमॉर्टम हाउस तक शवों को एक अदद एंबुलेंस तक नहीं मुहैया करा सका। डीएम, एसपी, एसडीएम, सीओ, सीएमओ तक अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया कि शवों का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद उन्हें घर तक कैसे पहुंचाया जाए। विवश होकर पीड़ित परिवार को सभी पांच शवों को एक लोडर पर लादकर घर ले जाना पड़ा।
पोस्टमार्टम के लिए देने पड़े पैसे
जिला अस्पताल में मृत घोषित किए गए पांच घायलों के शवों को मॉर्च्युरी में रखवाया गया। इसके साथ अस्पताल में सक्रिय कुछ लोगों ने हादसे के शिकार हुए सुरेश के भाई दिनेश से पोस्टमार्टम कराने के लिए प्रति शव पांच सौ रुपये की मांग की। दिनेश ने रुपये नहीं होने की बात कही तो बताया गया कि पोस्टमॉर्टम होने के बाद दे देना। आर्थिक मजबूरी की स्थिति में मामला कुछ छह सौ रुपये पर तय हुआ। इसके बाद मृतक के भाई ने नेकराही के प्रधान असलम से बात की। ग्राम प्रधान ने अपने पास से दिनेश को छह सौ रुपये दिए। दिनेश ने बताया कि छह सौ रुपये पोस्टमॉर्टम हाउस के अंदर काम करने वाले युवक ने लिया है।