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मानवाधिकार आयोग ने खंगाला सीएमओ दफ्तर
Sultanpur
Updated Sun, 05 Oct 2014 05:30 AM IST
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सुल्तानपुर। आठ वर्ष पूर्व निशुल्क शिविर में 10 लोगों की आंख की रोशनी चली जाने के मामले में राज्य सरकार के मुआवजा नहीं देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त कदम उठाया है। हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार को मानवाधिकार आयोग की टीम जिले में पहुंची। टीम ने सीएमओ दफ्तर में चार घंटे तक प्रकरण से संबंधित अभिलेखों को खंगाला।
18 नवंबर 2005 से दिसंबर 2005 तक कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण शिविर का आयोजन जिला अंधता निवारण समिति की ओर से किया गया था। डॉक्टरों एवं अन्य कर्मियों की लापरवाही से 10 लोगों के आंखों की रोशनी चली गई थी। आरटीआई एक्टीविस्ट डॉ. राकेश सिंह ने पांच जुलाई 2007 को मुख्यमंत्री से जांच की मांग की थी। जांच समिति में तत्कालीन सीएमओ डॉ. जीपी कुशवाहा, जिला अंधता निवारण अधिकारी सुल्तानपुर डॉ. केआर लाल, नेत्र चिकित्सक डॉ. जमील अहमद शामिल थे।
जांच समिति की रिपोर्ट में चिकित्सकों ने नेत्र शिविर आयोजक स्वयं सेवी संस्था समर्पित कानपुर, कादीपुर सीएचसी के तत्कालीन नेत्र सहायक बद्री नारायण तिवारी, जिला अस्पताल के तत्कालीन नेत्र सर्जन डॉ. पीयूष पांडेय, कादीपुर सीएचसी के नोडल अधिकारी डॉ. डीके सिंह को दोषी माना था।
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18 नवंबर 2005 से दिसंबर 2005 तक कादीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण शिविर का आयोजन जिला अंधता निवारण समिति की ओर से किया गया था। डॉक्टरों एवं अन्य कर्मियों की लापरवाही से 10 लोगों के आंखों की रोशनी चली गई थी। आरटीआई एक्टीविस्ट डॉ. राकेश सिंह ने पांच जुलाई 2007 को मुख्यमंत्री से जांच की मांग की थी। जांच समिति में तत्कालीन सीएमओ डॉ. जीपी कुशवाहा, जिला अंधता निवारण अधिकारी सुल्तानपुर डॉ. केआर लाल, नेत्र चिकित्सक डॉ. जमील अहमद शामिल थे।
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जांच समिति की रिपोर्ट में चिकित्सकों ने नेत्र शिविर आयोजक स्वयं सेवी संस्था समर्पित कानपुर, कादीपुर सीएचसी के तत्कालीन नेत्र सहायक बद्री नारायण तिवारी, जिला अस्पताल के तत्कालीन नेत्र सर्जन डॉ. पीयूष पांडेय, कादीपुर सीएचसी के नोडल अधिकारी डॉ. डीके सिंह को दोषी माना था।
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