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चार पर केस
Updated Fri, 02 Feb 2018 11:49 PM IST
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महोबा के डीपीआरओ समेत चार पर गबन का केस
गौरीगंज। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए शासन की ओर से आवंटित 2.90 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करना तत्कालीन डीपीआरओ व तीन कर्मचारियों को भारी पड़ा। शासन के आदेश पर मौजूदा डीपीआरओ ने बृहस्पतिवार देर शाम सभी के खिलाफ स्थानीय थाने में गबन व धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है। केस दर्ज करने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात प्रशांत शुक्ल, कार्यालय से संबद्घ सफाई कर्मी सिद्घार्थ काकुस्थ व कंप्यूटर ऑपरेटर सिरताज के खिलाफ 14 दिसंबर 2017 को तेलीबाग लखनऊ निवासी अविनाश कुमार ने सरकारी धन के गबन की शिकायत अपर प्रमुख सचिव पंचायती राज से की थी।
शिकायत में कहा गया था कि जिले के तत्कालीन डीपीआरओ उमाकांत पांडेय (मौजूदा डीपीआरओ महोबा) की मिलीभगत से तीनों लोगों ने ग्राम पंचायतों के विकास के लिए चतुर्थ राज्य वित्त आयोग में आवंटित धनराशि अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिए। प्रशांत शुक्ल पर गौरीगंज स्थित केनरा बैंक खाते में 1,45,996 रुपये, सिद्घार्थ काकुस्थ पर बीओबी इन्हौना में संचालित अपने खाते में 72,145 रुपये व सिरताज पर गौरीगंज स्थित केनरा बैंक के अपने खाते में 72,359 रूपये अंतरित करने का आरोप लगाया गया था।
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आरोपों की गंभीरता को देखते हुुए अपर प्रमुख सचिव पंचायती राज ने सरकारी धन का गबन करने वाले आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश मौजूदा डीपीआरओ बनवारी सिंह को दिया था। बृहस्पतिवार देर शाम बनवारी सिंह ने तत्कालीन डीपीआरओ के साथ ही सरकारी धन अपने खाते में अंतरित करने वाले तीनों कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया।
एसएचओ दुुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने तत्कालीन डीपीआरओ समेत चार लोगों के खिलाफ सरकारी धन के गबन व धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की पुष्टि की है। एसएचओ ने कहा कि मामले की जांच कर सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निलंबित चल रहे दो कर्मचारी
अविनाश कुमार की शिकायत पर व अपर प्रमुख सचिव पंचायती राज के निर्देश पर डीपीआरओ बनवारी सिंह ने 21 दिसंबर 2017 को वरिष्ठ सहायक प्रशांत शुक्ल व सिद्घार्थ काकुस्थ को निलंबित कर दिया था। सिरताज को जांच के बाद निलंबित करने की बात कही गई थी लेकिन वह अभी भी कार्यालय में मौजूद रहकर काम-काज कर रहा है।
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गौरीगंज। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए शासन की ओर से आवंटित 2.90 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करना तत्कालीन डीपीआरओ व तीन कर्मचारियों को भारी पड़ा। शासन के आदेश पर मौजूदा डीपीआरओ ने बृहस्पतिवार देर शाम सभी के खिलाफ स्थानीय थाने में गबन व धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है। केस दर्ज करने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात प्रशांत शुक्ल, कार्यालय से संबद्घ सफाई कर्मी सिद्घार्थ काकुस्थ व कंप्यूटर ऑपरेटर सिरताज के खिलाफ 14 दिसंबर 2017 को तेलीबाग लखनऊ निवासी अविनाश कुमार ने सरकारी धन के गबन की शिकायत अपर प्रमुख सचिव पंचायती राज से की थी।
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शिकायत में कहा गया था कि जिले के तत्कालीन डीपीआरओ उमाकांत पांडेय (मौजूदा डीपीआरओ महोबा) की मिलीभगत से तीनों लोगों ने ग्राम पंचायतों के विकास के लिए चतुर्थ राज्य वित्त आयोग में आवंटित धनराशि अपने व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिए। प्रशांत शुक्ल पर गौरीगंज स्थित केनरा बैंक खाते में 1,45,996 रुपये, सिद्घार्थ काकुस्थ पर बीओबी इन्हौना में संचालित अपने खाते में 72,145 रुपये व सिरताज पर गौरीगंज स्थित केनरा बैंक के अपने खाते में 72,359 रूपये अंतरित करने का आरोप लगाया गया था।
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आरोपों की गंभीरता को देखते हुुए अपर प्रमुख सचिव पंचायती राज ने सरकारी धन का गबन करने वाले आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश मौजूदा डीपीआरओ बनवारी सिंह को दिया था। बृहस्पतिवार देर शाम बनवारी सिंह ने तत्कालीन डीपीआरओ के साथ ही सरकारी धन अपने खाते में अंतरित करने वाले तीनों कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया।
एसएचओ दुुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने तत्कालीन डीपीआरओ समेत चार लोगों के खिलाफ सरकारी धन के गबन व धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की पुष्टि की है। एसएचओ ने कहा कि मामले की जांच कर सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निलंबित चल रहे दो कर्मचारी
अविनाश कुमार की शिकायत पर व अपर प्रमुख सचिव पंचायती राज के निर्देश पर डीपीआरओ बनवारी सिंह ने 21 दिसंबर 2017 को वरिष्ठ सहायक प्रशांत शुक्ल व सिद्घार्थ काकुस्थ को निलंबित कर दिया था। सिरताज को जांच के बाद निलंबित करने की बात कही गई थी लेकिन वह अभी भी कार्यालय में मौजूद रहकर काम-काज कर रहा है।