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सब्जी की खेती से दूर हुई बदहाली

Wed, 09 Sep 2020 09:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2020 09:42 PM IST
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50 kilograms of parwal leaves in an acre daily
सुल्तानपुर। जिले में बड़ी संख्या में किसान सब्जियों व फलों की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। इनमें से कुछ किसान खेतों में बेमौसमी सब्जियां उगाकर बाजार में बेचकर रहे हैं। बल्दीराय विकास खंड क्षेत्र के देवरा गांव के किसान चंद्रनाथ पांडेय के एक एकड़ खेत में प्रतिदिन 50 किलोग्राम परवल निकल रहा है। वे करीब पांच साल से सब्जी की खेती कर रहे हैं।
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बल्दीराय विकास खंड क्षेत्र के देवरा गांव निवासी किसान चंद्रनाथ पांडेय पिछले पांच साल से सब्जी की खेती कर रहे हैं। सबसे पहले उन्होंने केला की खेती से शुरुआत की थी। उद्यान विभाग में आवेदन कर चार बीघा में केला का रोपण कराया। इसमें उन्हें काफी फायदा हुआ।
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इसके बाद वे तरबूज, खरबूज समेत अन्य सब्जियों की खेती करने लगे। नवंबर 2019 में चंद्रनाथ ने एक एकड़ खेत में परवल की खेती की शुरुआत की। इसमें कुल लागत 60 हजार रुपये आई। झालर विधि से की गई परवल की खेती में वे अब तक डेढ़ लाख रुपये की बिक्री कर चुके हैं।
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इस हिसाब से उन्हें अब तक 90 हजार रुपये का मुनाफा हो चुका है। उनके खेत से सप्ताह में चार क्विंटल परवल निकल रहा है। उनका कहना है कि अक्तूबर तक परवल की फसल चलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि खेत से व्यापारी आकर परवल की खरीद करते हैं। चंद्रनाथ से प्रेरित होकर आसपास के कई गांवों के किसान भी उनसे खेती-किसानी से संबंधित सलाह लेने आते हैं।
किसान चंद्रनाथ पांडेय ने बताया कि सबसे पहले उद्यान विभाग से अनुदान पर मिलने वाले केले की खेती से शुरुआत की। विभाग के सहायक उद्यान निरीक्षक मो. फाजिल समय-समय पर आकर केले की खेती के बारे में दिशा-निर्देश देते थे। केले की खेती में मुनाफा मिलने पर फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तो खेत में हमेशा कुछ न कुछ नया करते रहते हैं।

देवरा गांव निवासी किसान चंद्रनाथ पांडेय ने सब्जी की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत कर ली है। इस समय उनके पास चार पहिया वाहन, खेतों की जोताई के लिए ट्रैक्टर, सिंचाई के लिए नलकूप है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी कोई व्यवधान नहीं आया।
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