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अनिर्णय में फंसे परीक्षा शुल्क के 4.39 करोड़ रुपये
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सुल्तानपुर। यूपी बोर्ड परीक्षा में नामांकित हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों से परीक्षा फीस के नाम पर जमा कराए गए चार करोड़ 39 लाख 80 हजार 627 रुपये अब अनिर्णय में फंस गया है। कोरोना की वजह से बोर्ड परीक्षा रद्द हो चुकी है, लेकिन परीक्षार्थियों से जमा कराई गई धनराशि के विषय में कोई दिशा-निर्देश अभी तक नहीं मिल सका है।
जिले में 331 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इसमें 25 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, 56 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय एवं 250 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इन माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2021 की बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल में 43,424 विद्यार्थी पंजीकृत थे।
इसमें संस्थागत 43,187 व व्यक्तिगत 237 बच्चे शामिल हैं। हाईस्कूल के संस्थागत परीक्षार्थियों से परीक्षा शुल्क प्रति छात्र 501 रुपये जमा कराए गए थे। वहीं व्यक्तिगत परीक्षार्थियों से 706 रुपये प्रति छात्र जमा कराए गए थे। इंटरमीडिएट में 36,598 विद्यार्थी पंजीकृत थे। इसमें 35,714 संस्थागत व 884 व्यक्तिगत परीक्षार्थी शामिल थे।
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इंटरमीडिएट के संस्थागत परीक्षार्थियों से 601 रुपये प्रति छात्र और व्यक्तिगत परीक्षार्थियों से 806 रुपये परीक्षा शुल्क यूपी बोर्ड की ओर से लिया गया था। हाईस्कूल के 43,424 परीक्षार्थियों का दो करोड़ 18 लाख चार हजार नौ रुपए जमा हुआ था। इंटरमीडियट के 36,598 परीक्षार्थियों से दो करोड़ 21 लाख 76 हजार 618 रुपये जमा कराए गए थे।
कुल चार करोड़ 39 लाख 80 हजार 627 रुपये दोनों कक्षाओं के छात्रों से परीक्षा शुल्क लिया गया था। कोरोना की वजह से फरवरी में होने वाली बोर्ड परीक्षा की तिथि पहले ही टाल दी गई थी। बाद में पंचायत चुनाव और कोरोना संक्रमण बढ़ने से परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाएं निरस्त होने के बाद यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। अर्धवार्षिक परीक्षा और प्री-बोर्ड परीक्षाओं में मिले अंकों के आधार पर छात्र-छात्राओं को उत्तीर्ण किया जाना है। इस तरह बोर्ड परीक्षाएं तो नहीं होंगी लेकिन इस मद में जमा कराए गए चार करोड़ 39 लाख 80 हजार 627 रुपये को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है।
जीआईसी में डंप 5,46,918 उत्तर पुस्तिकाएं
हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की 5,46,918 उत्तर पुस्तिकाएं जिला मुख्यालय स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में जमा की गई हैं। उत्तर पुस्तिकाओं के वापस किए जाने अथवा अगले वर्ष की परीक्षा में उसके इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी कोई निर्णय अभी तक नहीं हुआ है।
हाईस्कूल की 2,29,265 ए कॉपी और 91,706 बी कॉपी तथा इंटरमीडिएट की 1,73,805 ए कॉपी तथा 52,142 बी कॉपी सुरक्षित रखी गई है। यही नहीं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में भी परीक्षा की तैयारियां पूर्ण की जा चुकी थीं। कक्ष निरीक्षकों के अधिकांश पहचान पत्र प्रतिहस्ताक्षरित कर विद्यालयों को भेजे जा चुके थे। ऐन मौके पर परीक्षाएं रद्द हो जाने से सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं।
बच्चों को वापस हो शुल्क
वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षक महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष कुंवर साहब सिंह ने कहा कि बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी गई है। परीक्षा शुल्क के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जब परीक्षा नहीं होगी तो विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क वापस किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो कोरोना संक्रमण की वजह से तमाम परेशानियां झेल रहे वित्तविहीन शिक्षकों को इस धनराशि से सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
शासन के निर्देश का होगा अनुपालन
जिला विद्यालय निरीक्षक वीपी सिंह का कहना है कि यूपी बोर्ड परीक्षा परिस्थितियों की वजह से रद्द कर दी गई है। परीक्षा शुल्क के संबंध में शासन स्तर से भी कोई चर्चा नहीं की गई है और न ही इसके बारे में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त हुआ है। बोर्ड एवं शासन के मिलने वाले दिशा-निर्देश का अनुुपालन होगा।
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जिले में 331 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इसमें 25 राजकीय माध्यमिक विद्यालय, 56 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय एवं 250 वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इन माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2021 की बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल में 43,424 विद्यार्थी पंजीकृत थे।
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इसमें संस्थागत 43,187 व व्यक्तिगत 237 बच्चे शामिल हैं। हाईस्कूल के संस्थागत परीक्षार्थियों से परीक्षा शुल्क प्रति छात्र 501 रुपये जमा कराए गए थे। वहीं व्यक्तिगत परीक्षार्थियों से 706 रुपये प्रति छात्र जमा कराए गए थे। इंटरमीडिएट में 36,598 विद्यार्थी पंजीकृत थे। इसमें 35,714 संस्थागत व 884 व्यक्तिगत परीक्षार्थी शामिल थे।
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इंटरमीडिएट के संस्थागत परीक्षार्थियों से 601 रुपये प्रति छात्र और व्यक्तिगत परीक्षार्थियों से 806 रुपये परीक्षा शुल्क यूपी बोर्ड की ओर से लिया गया था। हाईस्कूल के 43,424 परीक्षार्थियों का दो करोड़ 18 लाख चार हजार नौ रुपए जमा हुआ था। इंटरमीडियट के 36,598 परीक्षार्थियों से दो करोड़ 21 लाख 76 हजार 618 रुपये जमा कराए गए थे।
कुल चार करोड़ 39 लाख 80 हजार 627 रुपये दोनों कक्षाओं के छात्रों से परीक्षा शुल्क लिया गया था। कोरोना की वजह से फरवरी में होने वाली बोर्ड परीक्षा की तिथि पहले ही टाल दी गई थी। बाद में पंचायत चुनाव और कोरोना संक्रमण बढ़ने से परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाएं निरस्त होने के बाद यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। अर्धवार्षिक परीक्षा और प्री-बोर्ड परीक्षाओं में मिले अंकों के आधार पर छात्र-छात्राओं को उत्तीर्ण किया जाना है। इस तरह बोर्ड परीक्षाएं तो नहीं होंगी लेकिन इस मद में जमा कराए गए चार करोड़ 39 लाख 80 हजार 627 रुपये को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है।
जीआईसी में डंप 5,46,918 उत्तर पुस्तिकाएं
हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की 5,46,918 उत्तर पुस्तिकाएं जिला मुख्यालय स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में जमा की गई हैं। उत्तर पुस्तिकाओं के वापस किए जाने अथवा अगले वर्ष की परीक्षा में उसके इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी कोई निर्णय अभी तक नहीं हुआ है।
हाईस्कूल की 2,29,265 ए कॉपी और 91,706 बी कॉपी तथा इंटरमीडिएट की 1,73,805 ए कॉपी तथा 52,142 बी कॉपी सुरक्षित रखी गई है। यही नहीं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में भी परीक्षा की तैयारियां पूर्ण की जा चुकी थीं। कक्ष निरीक्षकों के अधिकांश पहचान पत्र प्रतिहस्ताक्षरित कर विद्यालयों को भेजे जा चुके थे। ऐन मौके पर परीक्षाएं रद्द हो जाने से सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं।
बच्चों को वापस हो शुल्क
वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षक महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष कुंवर साहब सिंह ने कहा कि बोर्ड परीक्षा रद्द कर दी गई है। परीक्षा शुल्क के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जब परीक्षा नहीं होगी तो विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क वापस किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो कोरोना संक्रमण की वजह से तमाम परेशानियां झेल रहे वित्तविहीन शिक्षकों को इस धनराशि से सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
शासन के निर्देश का होगा अनुपालन
जिला विद्यालय निरीक्षक वीपी सिंह का कहना है कि यूपी बोर्ड परीक्षा परिस्थितियों की वजह से रद्द कर दी गई है। परीक्षा शुल्क के संबंध में शासन स्तर से भी कोई चर्चा नहीं की गई है और न ही इसके बारे में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त हुआ है। बोर्ड एवं शासन के मिलने वाले दिशा-निर्देश का अनुुपालन होगा।