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कर्मचारियों की गलती का खामियाजा भुगत रहे 16 हजार किसान
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गलती कर्मचारियों की, खामियाजा भुगत रहे 16 हजार किसान
गौरीगंज। अमेठी जिले के 16 हजार किसान कर्मचारियों की गलती का खामियाजा भुगत रहे हैं। पात्र होने के बावजूद इन किसानों को केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिल पाया। किसानों के आवेदन व अभिलेखों में नाम भिन्नता को योजना का लाभ नहीं मिल पाने का कारण बताया जा रहा है।
केंद्र सरकार के पहले कार्यकाल के अंतिम वर्ष में किसानों को खुशहाल बनाने के लिए प्रधानमंत्री किसान समान निधि योजना की शुरुआत हुई थी। इस योजना के तहत दो हेक्टेयर तक जोत वाले किसानों को तीन बराबर किस्तों में प्रति वर्ष छह हजार रुपये दिए जाने थे।
इस योजना को अमली जामा पहनाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग को दी गई। केंद्र की ओर से इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद जिले में 2,44,598 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया या फिर उनके नाम विभिन्न किसान योजनाओं के लाभार्थियों की सूची से लिए गए।
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इन किसानों में से 1,37,464 के खाते में योजना की पहली और कुछ के खाते में चुनाव से पहले दूसरी किस्त पहुंच भी गई। इसी दौरान जिले की सभी चार तहसीलों के 16,196 किसानों को नाम में भिन्नता की वजह से योजना का लाभ नहीं मिल पाया। नाम में भिन्नता ऑनलाइन फीडिंग के दौरान कर्मचारियों व साइबर कैफे संचालकों की लापरवाही की वजह से हुई।
शासन की ओर से किसानों के नाम में भिन्नता के जो आधार बताए गए हैं उसमें भूमि किसी के नाम व बैंक अकाउंट दूसरे के नाम का होना। पोर्टल पर फीड जानकारी से खाता नंबर भिन्न होना, नाम में सरनेम नहीं होना या स्पेलिंग गलत होना तथा कई किसानों के आवेदन में जिला ही गलत फीड है।
डीएम डॉ. राम मनोहर मिश्र ने कहा कि जिन किसानों को नाम में भिन्नता की वजह से योजना का लाभ नहीं मिला उन्हें इसका लाभ दिलाने के प्रति शासन गंभीर है।
शासन के आदेश पर सभी तहसीलों में राजस्व विभाग के कर्मियों को लगाकर दोबारा सत्यापन के माध्यम से कमियों को दूर कराया जा रहा है। कमियां दूर होने के बाद किसानों को नए सिरे से सूचीबद्ध किया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने कहा कि किसानों के नाम में भिन्नता की कई वजह हैं। हालांकि उन्होंने इसमें कर्मचारियों की लापरवाही की बात से भी इंकार नहीं किया। पांडेय ने कहा कि तहसीलों से सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद किसानों को योजना का लाभ दिया जाएगा।
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गौरीगंज। अमेठी जिले के 16 हजार किसान कर्मचारियों की गलती का खामियाजा भुगत रहे हैं। पात्र होने के बावजूद इन किसानों को केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिल पाया। किसानों के आवेदन व अभिलेखों में नाम भिन्नता को योजना का लाभ नहीं मिल पाने का कारण बताया जा रहा है।
केंद्र सरकार के पहले कार्यकाल के अंतिम वर्ष में किसानों को खुशहाल बनाने के लिए प्रधानमंत्री किसान समान निधि योजना की शुरुआत हुई थी। इस योजना के तहत दो हेक्टेयर तक जोत वाले किसानों को तीन बराबर किस्तों में प्रति वर्ष छह हजार रुपये दिए जाने थे।
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इस योजना को अमली जामा पहनाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग को दी गई। केंद्र की ओर से इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद जिले में 2,44,598 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया या फिर उनके नाम विभिन्न किसान योजनाओं के लाभार्थियों की सूची से लिए गए।
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इन किसानों में से 1,37,464 के खाते में योजना की पहली और कुछ के खाते में चुनाव से पहले दूसरी किस्त पहुंच भी गई। इसी दौरान जिले की सभी चार तहसीलों के 16,196 किसानों को नाम में भिन्नता की वजह से योजना का लाभ नहीं मिल पाया। नाम में भिन्नता ऑनलाइन फीडिंग के दौरान कर्मचारियों व साइबर कैफे संचालकों की लापरवाही की वजह से हुई।
शासन की ओर से किसानों के नाम में भिन्नता के जो आधार बताए गए हैं उसमें भूमि किसी के नाम व बैंक अकाउंट दूसरे के नाम का होना। पोर्टल पर फीड जानकारी से खाता नंबर भिन्न होना, नाम में सरनेम नहीं होना या स्पेलिंग गलत होना तथा कई किसानों के आवेदन में जिला ही गलत फीड है।
डीएम डॉ. राम मनोहर मिश्र ने कहा कि जिन किसानों को नाम में भिन्नता की वजह से योजना का लाभ नहीं मिला उन्हें इसका लाभ दिलाने के प्रति शासन गंभीर है।
शासन के आदेश पर सभी तहसीलों में राजस्व विभाग के कर्मियों को लगाकर दोबारा सत्यापन के माध्यम से कमियों को दूर कराया जा रहा है। कमियां दूर होने के बाद किसानों को नए सिरे से सूचीबद्ध किया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने कहा कि किसानों के नाम में भिन्नता की कई वजह हैं। हालांकि उन्होंने इसमें कर्मचारियों की लापरवाही की बात से भी इंकार नहीं किया। पांडेय ने कहा कि तहसीलों से सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद किसानों को योजना का लाभ दिया जाएगा।