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रोक 18-35-26
Updated Sun, 28 Jan 2018 11:04 PM IST
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स्वच्छता के प्रचार-प्रसार पर खर्च कर दिए 90 लाख रुपये
सुल्तानपुर। स्वच्छता कार्यक्रम पर पंचायतीराज विभाग ने 90 लाख रुपये खर्च कर डाले। इस धनराशि का विभाग ने प्रचार-प्रसार पर खर्च दिखाया है। घोटाले की आशंका में मुख्य विकास अधिकारी ने भुगतान पर रोक लगा दी है। उन्होंने विभाग से खर्च की गई धनराशि का पूरा ब्यौरा मांगा है।
केंद्र सरकार के स्वच्छता कार्यक्रम पर जिले में पंचायतीराज विभाग द्वारा खर्च किए गए करीब 90 लाख रुपये का मामला गरमा गया है। स्वच्छता के प्रचार-प्रचार पर पंचायतीराज विभाग ने विभिन्न मदों में 90 लाख रुपये खर्च दिखाया है। भुगतान के लिए पत्रावली मुख्य विकास अधिकारी के पास प्रस्तुत होने पर प्रकरण का खुलासा हुआ। प्रचार-प्रचार पर इतनी बड़ी रकम का खर्च देख प्रकरण संदिग्ध प्रतीत होने पर मुख्य विकास अधिकारी ने पत्रावली लौटाने के साथ ही भुगतान पर रोक लगा दी है। सूत्रों की मानें तो पंचायतीराज विभाग ने स्वच्छता के प्रचार मद में मिली धनराशि में कई लाख रुपये प्रशिक्षण, वॉल राइटिंग समेत विभिन्न मदों में खर्च दिखाया है। पत्रावली पर भुगतान संबंधी कोई ठोस ब्यौरा उपलब्ध नहीं होने पर सीडीओ ने भुगतान रोक दिया है। साथ ही उन्होंने पंचायतीराज विभाग से स्वच्छता के प्रचार-प्रसार मद में खर्च की गई 90 लाख की धनराशि का पूरा ब्यौरा मांगा है। भुगतान पर रोक से पंचायतीराज विभाग में खलबली मची है। वहीं, मामले में बड़ा घोटाला किए जाने की महकमे में चर्चा शुरू हो गई है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो पंचायतीराज विभाग ने स्वच्छता के प्रचार-प्रसार मद में मिली धनराशि का कई कार्यक्रमों में खर्च दिखाया है। इसमें पोस्टर, बैनर, पंपलेट, प्रशिक्षण, ग्राम प्रधानों एवं कर्मचारियों के सम्मेलन, स्टेशनरी समेत कई प्रचार सामग्रियां शामिल हैं। प्रचार-प्रसार मद से ही गांवों में जाने वाले स्वच्छता से जुड़े कर्मियों के लिए सीटी, टोपी, जैकेट, टॉर्च पर भी खर्च किया गया है। कार्यक्रमों के लिए चूना, पाउडर भी इसी में शामिल है। ब्लॉकों पर स्वच्छता कार्यक्रम के लिए बनाए गए वार रूम का खर्च भी इसी में शामिल बताया जा रहा है।
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मुख्य विकास अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि, पंचायतीराज विभाग की ओर से स्वच्छता के प्रचार-प्रसार मद में खर्च की गई धनराशि संदिग्ध है। इसका पूरा विवरण भुगतान के लिए पत्रावली में नहीं प्रस्तुत किया गया था। भुगतान रोकने के साथ ही पूरा ब्यौरा मांगा गया है।
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सुल्तानपुर। स्वच्छता कार्यक्रम पर पंचायतीराज विभाग ने 90 लाख रुपये खर्च कर डाले। इस धनराशि का विभाग ने प्रचार-प्रसार पर खर्च दिखाया है। घोटाले की आशंका में मुख्य विकास अधिकारी ने भुगतान पर रोक लगा दी है। उन्होंने विभाग से खर्च की गई धनराशि का पूरा ब्यौरा मांगा है।
केंद्र सरकार के स्वच्छता कार्यक्रम पर जिले में पंचायतीराज विभाग द्वारा खर्च किए गए करीब 90 लाख रुपये का मामला गरमा गया है। स्वच्छता के प्रचार-प्रचार पर पंचायतीराज विभाग ने विभिन्न मदों में 90 लाख रुपये खर्च दिखाया है। भुगतान के लिए पत्रावली मुख्य विकास अधिकारी के पास प्रस्तुत होने पर प्रकरण का खुलासा हुआ। प्रचार-प्रचार पर इतनी बड़ी रकम का खर्च देख प्रकरण संदिग्ध प्रतीत होने पर मुख्य विकास अधिकारी ने पत्रावली लौटाने के साथ ही भुगतान पर रोक लगा दी है। सूत्रों की मानें तो पंचायतीराज विभाग ने स्वच्छता के प्रचार मद में मिली धनराशि में कई लाख रुपये प्रशिक्षण, वॉल राइटिंग समेत विभिन्न मदों में खर्च दिखाया है। पत्रावली पर भुगतान संबंधी कोई ठोस ब्यौरा उपलब्ध नहीं होने पर सीडीओ ने भुगतान रोक दिया है। साथ ही उन्होंने पंचायतीराज विभाग से स्वच्छता के प्रचार-प्रसार मद में खर्च की गई 90 लाख की धनराशि का पूरा ब्यौरा मांगा है। भुगतान पर रोक से पंचायतीराज विभाग में खलबली मची है। वहीं, मामले में बड़ा घोटाला किए जाने की महकमे में चर्चा शुरू हो गई है।
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विभागीय सूत्रों की मानें तो पंचायतीराज विभाग ने स्वच्छता के प्रचार-प्रसार मद में मिली धनराशि का कई कार्यक्रमों में खर्च दिखाया है। इसमें पोस्टर, बैनर, पंपलेट, प्रशिक्षण, ग्राम प्रधानों एवं कर्मचारियों के सम्मेलन, स्टेशनरी समेत कई प्रचार सामग्रियां शामिल हैं। प्रचार-प्रसार मद से ही गांवों में जाने वाले स्वच्छता से जुड़े कर्मियों के लिए सीटी, टोपी, जैकेट, टॉर्च पर भी खर्च किया गया है। कार्यक्रमों के लिए चूना, पाउडर भी इसी में शामिल है। ब्लॉकों पर स्वच्छता कार्यक्रम के लिए बनाए गए वार रूम का खर्च भी इसी में शामिल बताया जा रहा है।
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मुख्य विकास अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि, पंचायतीराज विभाग की ओर से स्वच्छता के प्रचार-प्रसार मद में खर्च की गई धनराशि संदिग्ध है। इसका पूरा विवरण भुगतान के लिए पत्रावली में नहीं प्रस्तुत किया गया था। भुगतान रोकने के साथ ही पूरा ब्यौरा मांगा गया है।