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गांव की सरकार में आधी आबादी, बढ़ेंगी बेटिया पढ़ेंगी बेटियां
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महिलाएं मजबूत, समृद्ध होंगी तो समाज तरक्की करेगा। ऐसे में महिलाओं को उनके कर्तव्य और दायित्व के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाएंगे। इसके लिए गांव में सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर आदि का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। पुरुषों के साथ महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनेंगी तो गांव का विकास होगा। पढ़े बेटियां बढ़े बेटियां अभियान के तहत बालिकाओं को शिक्षित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही गांव का समग्र विकास करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। ये बातें शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित ‘ग्राम पंचायतों में नारी सशक्तीकरण में महिला प्रधानों की भूमिका’ विषयक वेबिनार में गांव में चुनी गईं महिला ग्राम प्रधानों ने कहीं। वेबिनार में विभिन्न ब्लाकों की कुल 78 महिला प्रधानों ने हिस्सा लिया।
वेबिनार में मुख्य वक्ता जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेंद्र पौत्स्यायन रहे। उन्होंने महिला ग्राम प्रधानों को सरकार की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि महिला प्रधान अगर ठान लें तो बेटियों की संख्या जरूर बढ़ेगी और बाल विवाह रुक जाएगा। संचालन स्वच्छ भारत मिशन की डीपीसी (जिला कार्यक्रम समन्वयक) किरन सिंह ने किया।
महिला सशक्तीकरण पर बोलीं महिला ग्राम प्रधान
- आज महिलाएं किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं। हवाई जहाज उड़ाने से लेकर देश की सीमा पर सुरक्षा की कमान संभालने में भी महिलाएं प्रथम पंक्ति में हैं लेकिन गांवों में जागरूकता का अभाव है। महिलाओं जागरूक करने के लिए संयुक्त अभियान चलाने की जरूरत है।- महिमा सिंह, तिलौली कला
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- एक शिक्षित महिला एक नहीं बल्कि दो-दो घरों को शिक्षित बनाती है। इसलिए महिलाओं की मजबूती जरूरी है। ग्राम पंचायत की हर महिला जागरूक हो, अपने अधिकार और कर्तव्य दोनों समझें, इसके लिए मैं जागरूकता अभियान चलाऊंगी।- आराधना त्रिपाठी, बहुआर
- पढ़ें बेटियां, बढ़ें बेटियां अभियान को अपने ग्राम पंचायत में तेज करूंगी। कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहने पाए यह प्राथमिकता है। सरकार की योजनाएं हर बेटी को मिले, हर महिला रोजगार परक प्रशिक्षण पाकर आत्मनिर्भर बने इसके लिए प्रयास रहेगा।- अर्चना त्रिपाठी, ऊंचडीह
- गांव की महिलाओं को जागरूक करके उन्हें स्वरोजगार अपनाने पर जोर दिया जाएगा। जब महिलाएं रोजगार करेंगी तो घर की तरक्की होगी। इसके लिए गांव में सिलाई प्रशिक्षण, ब्यूटी पार्लर के प्रशिक्षण का इंतजाम करने का प्रयास किया जाएगा।- संगम पासवान, बुड़हर कला
- महिलाओं के लिए अलग से सीट इसलिए आरक्षित होती है कि वे राजनीति में भी तरक्की करें। हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने ग्राम पंचायत में महिला सशक्तीकरण पर जोर दें। प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि गांव में जो समस्याएं हैं उसे हल कराए।- सुरैया बानो, बेलाटाड़
- गांव की सरकार चलाने की जो जिम्मेदारी जनता ने दी है उसपर खरा उतरने का प्रयास हर महिला प्रधान को करना चाहिए। महिलाओं को अपने समाज के लिए बेहतर काम करना चाहिए। महिलाएं मजबूत, समृद्ध होंगी तो समाज तरक्की करेगा।- सभ्या पांडेय, कोरियांव
- कई बार ऐसा मामला प्रकाश में आता है कि गांव के प्रधान के रुचि न लेने के कारण योजनाएं प्रभावित हो गईं। अब हम महिलाओं को मुखिया बनाया गया है तो हमें प्रयास करना चाहिए कि हर योजना का लाभ पात्रों को मिले।- नीलम तिवारी, बेठिगांव निस्फब
- गांव में रोजगार के संसाधन कम होते हैं, लेकिन इन्हीं सीमित संसाधनों में बेटियों के लिए काम करना है। मैं स्वयं आगे आऊंगी। गांव की हर बेटी की शिक्षा के लिए सदैव प्रयास करूंगी। योजनाओं का लाभ भी बेटियों को दिलाऊंगी।- मंजू मौर्या, गौरहीं
- महिला सशक्तिनगर के लिए कई कार्य किए जाते हैं। कई योजनाएं ऐसी होती हैं जिनकी बदौलत महिलाएं समृद्ध होंगी लेकिन उनके बारे में लोगों को पता ही नहीं होता। अब हर महिला लाभार्थी परक योजनाओं के बारे में जानेगी। - चांदनी बानो, तकिया
- महिलाओं की तरक्की और उनके उत्थान के लिए समिति में महिला सदस्यों को भी शामिल किया गया है। बाल कल्याण समिति को सक्रिय करके बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या आदि पर रोक के लिए जागरूक किया जाएगा।- शशि सिंह, बहेरा
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- महिलाओं की तरक्की के लिए जरूरी है कि महिला ग्राम प्रधान आगे आएं। वे अपने अधिकार और कर्तव्य को जाने और गांव के विकास में अहम भूमिका निभाएं। शिक्षा, स्वास्थ्य और बेटियों की समृद्धि के लिए हर महिला प्रधान को काम करना चाहिए। शौचालय का उपयोग सबके घर में हो, इसे हर महिला अगर ठान ले तो स्वच्छता भी बढ़ेगी।- किरन सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी),स्वच्छ भारत मिशन।
- जागरूकता की कमी बड़ी समस्या है। ग्राम पंचायतों में जागरूकता का अभाव होता है जिससे महिलाएं अपने अधिकार और कर्तव्य तक नहीं जानतीं। इसके बताने की जरूरत है। नव निर्वाचित प्रधानों के कंधे पर यह अहम जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि महिला प्रधान जागरूकता लाने में अहम भूमिका निभाएंगी। कन्या सुमंगला योजना का लाभ हर पात्र को दिलाने, कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह पर रोक लगाने में महिला प्रधानों की भूमिका अहम है।- डॉ. अमरेंद्र पौत्स्यायन, जिला प्रोबेशन अधिकारी, सोनभद्र।
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वेबिनार में मुख्य वक्ता जिला प्रोबेशन अधिकारी डॉ. अमरेंद्र पौत्स्यायन रहे। उन्होंने महिला ग्राम प्रधानों को सरकार की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि महिला प्रधान अगर ठान लें तो बेटियों की संख्या जरूर बढ़ेगी और बाल विवाह रुक जाएगा। संचालन स्वच्छ भारत मिशन की डीपीसी (जिला कार्यक्रम समन्वयक) किरन सिंह ने किया।
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महिला सशक्तीकरण पर बोलीं महिला ग्राम प्रधान
- आज महिलाएं किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं। हवाई जहाज उड़ाने से लेकर देश की सीमा पर सुरक्षा की कमान संभालने में भी महिलाएं प्रथम पंक्ति में हैं लेकिन गांवों में जागरूकता का अभाव है। महिलाओं जागरूक करने के लिए संयुक्त अभियान चलाने की जरूरत है।- महिमा सिंह, तिलौली कला
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- एक शिक्षित महिला एक नहीं बल्कि दो-दो घरों को शिक्षित बनाती है। इसलिए महिलाओं की मजबूती जरूरी है। ग्राम पंचायत की हर महिला जागरूक हो, अपने अधिकार और कर्तव्य दोनों समझें, इसके लिए मैं जागरूकता अभियान चलाऊंगी।- आराधना त्रिपाठी, बहुआर
- पढ़ें बेटियां, बढ़ें बेटियां अभियान को अपने ग्राम पंचायत में तेज करूंगी। कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहने पाए यह प्राथमिकता है। सरकार की योजनाएं हर बेटी को मिले, हर महिला रोजगार परक प्रशिक्षण पाकर आत्मनिर्भर बने इसके लिए प्रयास रहेगा।- अर्चना त्रिपाठी, ऊंचडीह
- गांव की महिलाओं को जागरूक करके उन्हें स्वरोजगार अपनाने पर जोर दिया जाएगा। जब महिलाएं रोजगार करेंगी तो घर की तरक्की होगी। इसके लिए गांव में सिलाई प्रशिक्षण, ब्यूटी पार्लर के प्रशिक्षण का इंतजाम करने का प्रयास किया जाएगा।- संगम पासवान, बुड़हर कला
- महिलाओं के लिए अलग से सीट इसलिए आरक्षित होती है कि वे राजनीति में भी तरक्की करें। हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने ग्राम पंचायत में महिला सशक्तीकरण पर जोर दें। प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि गांव में जो समस्याएं हैं उसे हल कराए।- सुरैया बानो, बेलाटाड़
- गांव की सरकार चलाने की जो जिम्मेदारी जनता ने दी है उसपर खरा उतरने का प्रयास हर महिला प्रधान को करना चाहिए। महिलाओं को अपने समाज के लिए बेहतर काम करना चाहिए। महिलाएं मजबूत, समृद्ध होंगी तो समाज तरक्की करेगा।- सभ्या पांडेय, कोरियांव
- कई बार ऐसा मामला प्रकाश में आता है कि गांव के प्रधान के रुचि न लेने के कारण योजनाएं प्रभावित हो गईं। अब हम महिलाओं को मुखिया बनाया गया है तो हमें प्रयास करना चाहिए कि हर योजना का लाभ पात्रों को मिले।- नीलम तिवारी, बेठिगांव निस्फब
- गांव में रोजगार के संसाधन कम होते हैं, लेकिन इन्हीं सीमित संसाधनों में बेटियों के लिए काम करना है। मैं स्वयं आगे आऊंगी। गांव की हर बेटी की शिक्षा के लिए सदैव प्रयास करूंगी। योजनाओं का लाभ भी बेटियों को दिलाऊंगी।- मंजू मौर्या, गौरहीं
- महिला सशक्तिनगर के लिए कई कार्य किए जाते हैं। कई योजनाएं ऐसी होती हैं जिनकी बदौलत महिलाएं समृद्ध होंगी लेकिन उनके बारे में लोगों को पता ही नहीं होता। अब हर महिला लाभार्थी परक योजनाओं के बारे में जानेगी। - चांदनी बानो, तकिया
- महिलाओं की तरक्की और उनके उत्थान के लिए समिति में महिला सदस्यों को भी शामिल किया गया है। बाल कल्याण समिति को सक्रिय करके बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या आदि पर रोक के लिए जागरूक किया जाएगा।- शशि सिंह, बहेरा
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- महिलाओं की तरक्की के लिए जरूरी है कि महिला ग्राम प्रधान आगे आएं। वे अपने अधिकार और कर्तव्य को जाने और गांव के विकास में अहम भूमिका निभाएं। शिक्षा, स्वास्थ्य और बेटियों की समृद्धि के लिए हर महिला प्रधान को काम करना चाहिए। शौचालय का उपयोग सबके घर में हो, इसे हर महिला अगर ठान ले तो स्वच्छता भी बढ़ेगी।- किरन सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी),स्वच्छ भारत मिशन।
- जागरूकता की कमी बड़ी समस्या है। ग्राम पंचायतों में जागरूकता का अभाव होता है जिससे महिलाएं अपने अधिकार और कर्तव्य तक नहीं जानतीं। इसके बताने की जरूरत है। नव निर्वाचित प्रधानों के कंधे पर यह अहम जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि महिला प्रधान जागरूकता लाने में अहम भूमिका निभाएंगी। कन्या सुमंगला योजना का लाभ हर पात्र को दिलाने, कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह पर रोक लगाने में महिला प्रधानों की भूमिका अहम है।- डॉ. अमरेंद्र पौत्स्यायन, जिला प्रोबेशन अधिकारी, सोनभद्र।