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Sonebhadra News: 20 दिनों में 25 फीट बढ़ा रिहंद बांध का जलस्तर
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अगस्त माह के 20 दिनों में हुई झमाझम बरसात ने रिहंद जलाशय में पिछले कई वर्षों में पानी की कमी को दूर कर दिया है। लंबे समय बाद बांध अपने अधिकतम जलस्तर को छूने की ओर है। वर्तमान में रिहंद बांध का जलस्तर 864 फीट तक पहुंच गया है।
जलाशय में पानी के आने का क्रम लगातार जारी है। जलस्तर 870 तक पहुंचने के बाद बांध के गेट खोल दिए जाएंगे। ऐसा हुआ तो पिछले पांच वर्षों में यह पहली बार होगा।
सोनभद्र के पिपरी में स्थित पं. गोविंद बल्लभ पंत रिहंद जलाशय का दायरा मप्र और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है। इन राज्यों में होने वाली बरसात का पानी इसी बांध में संग्रहित होता है।
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यह पानी यूपी-एमपी सीमा पर स्थित करीब 20 हजार मेगावाट के पावर प्लांटों में थर्मल कूलिंग के लिए उपयोग किया जाता है। पर्याप्त पानी होने पर रिहंद डाइड्रो इकाइयां चलाकर बिजली उत्पादन भी होता है।
पिछले कई वर्षों से अच्छी बरसात न होने के कारण बांध का जलस्तर 850 से ऊपर नहीं पहुंचा था। इस बार भी जून-जुलाई में नाममात्र की बरसात के चलते बांध में पानी की कमी बनी हुई थी। गत 31 जुलाई तक बांध का जलस्तर 839 फीट ही दर्ज किया गया।
बारिश से पहले जलस्तर 832 फीट तक था। 31 जुलाई के बाद लगातार हो रही तेज बरसात के चलते रिहंद बांध लबालब भरने की ओर से है। अधिकतम जलस्तर से बांध में पानी महज छह फीट नीचे है।
बांध के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को बांध का जलस्तर 864 फीट पर पहुंच गया है, जो अधिकतम से मात्र 6 फीट की दूरी पर है। आज के ही दिन वर्ष 2023 में जलस्तर 844 फीट से अधिक था।
इस तरह देखा जाए तो मात्र 20 दिन में ही बांध का जलस्तर 25 फीट बढ़ गया है जिससे इस वर्ष फाटक खुलने की पूरी उम्मीद है। बांध की अधिकतम जलस्तर क्षमता 870 फीट है 870 फीट पार करने के बाद ही बांध के फाटक खोले जाते हैं।
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जलाशय में पानी के आने का क्रम लगातार जारी है। जलस्तर 870 तक पहुंचने के बाद बांध के गेट खोल दिए जाएंगे। ऐसा हुआ तो पिछले पांच वर्षों में यह पहली बार होगा।
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सोनभद्र के पिपरी में स्थित पं. गोविंद बल्लभ पंत रिहंद जलाशय का दायरा मप्र और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है। इन राज्यों में होने वाली बरसात का पानी इसी बांध में संग्रहित होता है।
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यह पानी यूपी-एमपी सीमा पर स्थित करीब 20 हजार मेगावाट के पावर प्लांटों में थर्मल कूलिंग के लिए उपयोग किया जाता है। पर्याप्त पानी होने पर रिहंद डाइड्रो इकाइयां चलाकर बिजली उत्पादन भी होता है।
पिछले कई वर्षों से अच्छी बरसात न होने के कारण बांध का जलस्तर 850 से ऊपर नहीं पहुंचा था। इस बार भी जून-जुलाई में नाममात्र की बरसात के चलते बांध में पानी की कमी बनी हुई थी। गत 31 जुलाई तक बांध का जलस्तर 839 फीट ही दर्ज किया गया।
बारिश से पहले जलस्तर 832 फीट तक था। 31 जुलाई के बाद लगातार हो रही तेज बरसात के चलते रिहंद बांध लबालब भरने की ओर से है। अधिकतम जलस्तर से बांध में पानी महज छह फीट नीचे है।
बांध के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को बांध का जलस्तर 864 फीट पर पहुंच गया है, जो अधिकतम से मात्र 6 फीट की दूरी पर है। आज के ही दिन वर्ष 2023 में जलस्तर 844 फीट से अधिक था।
इस तरह देखा जाए तो मात्र 20 दिन में ही बांध का जलस्तर 25 फीट बढ़ गया है जिससे इस वर्ष फाटक खुलने की पूरी उम्मीद है। बांध की अधिकतम जलस्तर क्षमता 870 फीट है 870 फीट पार करने के बाद ही बांध के फाटक खोले जाते हैं।