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उभ्भा कांड के बाद एक वर्ष में ग्रामीणों को मिलीं कई सुविधाएं
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घोरावल। उभ्भा गांव में जमीन संबंधी विवाद में 17 जुलाई 2019 को हुई गोलीबारी की घटना में 11 आदिवासियों की मौत की बाद से गांव के लोगों को सरकार की तरफ से दी जाने वाली सुविधाएं उपलब्ध कराने के कार्य में तेजी आ गई थी। पीड़ितों व ग्रामीणों को आवास, शौचालय, गोल्डन कार्ड व जाब कार्ड आदि प्रदान कर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य तेज कर दी गई थी।
उभ्भा गांव के विकास एवं पीड़ितों व ग्रामीणों के लिए सुविधाओं की घोषणा की गई थी। उसी क्रम में पंचायती राज विभाग, स्वास्थ्य, आपूर्ति एवं राजस्व समेत अन्य सरकारी विभागों की तरफ से ग्रामीणों को विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद शुरू कर दी गईं थीं। बीते एक साल में गांव की जमीनी हकीकत में काफी परिवर्तन आया है। घटना में मृत अशोक की पत्नी पुष्पा, घायल कमलावती के पति रामपति आदि का कहना है कि गांव में अधिकांश लोगों को आवास मिल चुके हैं। उन लोगों को भी आवास मिला है, जिसका निर्माण कार्य पूरा हो गया है। जिन लोगों को पूर्व में इंदिरा आवास या अन्य सरकारी आवास मिले थे, उन्हें आवास नहीं मिले हैं। गांव में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का लाभ मिला है। सरकार एवं कांग्रेस व समाजवादी पार्टी की तरफ से दी गई सहायता राशि और सरकारी सुविधाएं मिलने से उनका जीवन आसान हो गया है। उभ्भा कांड में मृत रामधारी की पत्नी अतवारी देवी, घायल छोटेलाल के पुत्र टीकम सिंह, मृतक राजेश की पत्नी पुष्पा आदि का कहना है कि घटना के बाद गांव का पूरी तरह विद्युतीकरण करा दिया गया है। उन्हें सोलर एनर्जी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। सभी को राशन कार्ड दिए गए हैं और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उन लोगों को गोल्डन कार्ड भी दिए गए हैं। मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पीड़ितों व ग्रामीणों को जॉब कार्ड भी दिए गए हैं। सरकार की तरफ से पीड़ितों के आश्रितों व घायलों को जमीन का पट्टा कर उसका मालिकाना हक दिया गया है। सरकार ने 10 बीघा जमीन देने की घोषणा की थी लेकिन साढ़े सात बीघा जमीन का ही पट्टा मिल पाया है। यह साढ़े सात बीघा भी उन्हें पूरा नहीं मिल पाया है, बल्कि पट्टा लेने वाले के पास मौजूद भूमि को घटाकर उन्हें कम जमीन का पट्टा दिया गया है। आरओ प्लांट लगने से उन्हें स्वच्छ पेयजल मिल रहा है। इसके साथ ही पात्र लोगों को निराश्रित पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन भी मिलना शुरू हो गया है।
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उभ्भा गांव के विकास एवं पीड़ितों व ग्रामीणों के लिए सुविधाओं की घोषणा की गई थी। उसी क्रम में पंचायती राज विभाग, स्वास्थ्य, आपूर्ति एवं राजस्व समेत अन्य सरकारी विभागों की तरफ से ग्रामीणों को विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद शुरू कर दी गईं थीं। बीते एक साल में गांव की जमीनी हकीकत में काफी परिवर्तन आया है। घटना में मृत अशोक की पत्नी पुष्पा, घायल कमलावती के पति रामपति आदि का कहना है कि गांव में अधिकांश लोगों को आवास मिल चुके हैं। उन लोगों को भी आवास मिला है, जिसका निर्माण कार्य पूरा हो गया है। जिन लोगों को पूर्व में इंदिरा आवास या अन्य सरकारी आवास मिले थे, उन्हें आवास नहीं मिले हैं। गांव में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का लाभ मिला है। सरकार एवं कांग्रेस व समाजवादी पार्टी की तरफ से दी गई सहायता राशि और सरकारी सुविधाएं मिलने से उनका जीवन आसान हो गया है। उभ्भा कांड में मृत रामधारी की पत्नी अतवारी देवी, घायल छोटेलाल के पुत्र टीकम सिंह, मृतक राजेश की पत्नी पुष्पा आदि का कहना है कि घटना के बाद गांव का पूरी तरह विद्युतीकरण करा दिया गया है। उन्हें सोलर एनर्जी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। सभी को राशन कार्ड दिए गए हैं और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उन लोगों को गोल्डन कार्ड भी दिए गए हैं। मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पीड़ितों व ग्रामीणों को जॉब कार्ड भी दिए गए हैं। सरकार की तरफ से पीड़ितों के आश्रितों व घायलों को जमीन का पट्टा कर उसका मालिकाना हक दिया गया है। सरकार ने 10 बीघा जमीन देने की घोषणा की थी लेकिन साढ़े सात बीघा जमीन का ही पट्टा मिल पाया है। यह साढ़े सात बीघा भी उन्हें पूरा नहीं मिल पाया है, बल्कि पट्टा लेने वाले के पास मौजूद भूमि को घटाकर उन्हें कम जमीन का पट्टा दिया गया है। आरओ प्लांट लगने से उन्हें स्वच्छ पेयजल मिल रहा है। इसके साथ ही पात्र लोगों को निराश्रित पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन भी मिलना शुरू हो गया है।
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