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मंगरमाड गांव में हाथियों के दस्तक से ग्रामीण भयभीत
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बभनी। स्थानीय थाना क्षेत्र के छत्तीसगढ़ बार्डर से सटे मंगरमाड गांव में शुक्रवार रात हाथियों के दस्तक से ग्रामीण भयभीत हो गए। हाथियों की दहाड़ सुनकर लोग अपने घरों से निकल कर दूसरे टोले में जाकर दूसरों के घरों में रात गुजारी।
शुक्रवार रात अचानक मंगरमाड गांव के अगरिया बस्ती से कुछ दूरी पर हाथियों की दहाड़ सुनाई देने लगी। हाथियों की दहाड़ सुनते ही बस्ती के लोग भयभीत हो गए और अपने घरों से निकल कर दूसरे के घर जाकर रात गुजारी। गांव के इंद्रदेव सिंह, प्रताप सिंह, रामनारायन ने बताया कि हाथियों की गर्जना काफी तेज हो थी। शुक्रवार को दिन में यूपी छत्तीसगढ़ बार्डर के घटाकुड बभनी गांव में 11 हाथियों का झुंड देखा गया था। लोगों का कहना है कि रात में वहीं हाथियों का झुंड मंगरमाड गांव के अगरिया बस्ती की ओर आ गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों की आवाज सुनकर पटाखे फोड़े गए और ढोलक भी बजाया गया ताकि हाथियों का झुंड गांव की ओर न बढ़ सके।
पिछले वर्ष हाथियों ने पहुंचाया था काफी नुकसान
बता दें कि पिछले वर्ष धान की फसल को हाथियों ने काफी नुकसान पहुंचाया था। इससे शीशटोला, करमघट्टी, मंगरमाड, रम्पाकुरर, बिछियारी गांव के सैकड़ों किसान प्रभावित हुए थे। फसल नुकसान करने के साथ मानसिंह अगरिया, रामदेव गोंड, सहदेव गोंड, रामदेव, जगनरायन का कच्चा मकान भी गिरा दिया था। इतना ही नहीं डूमरहर निवासी राजेंद्र प्रसाद को हाथियों ने कुचलकर मौत के घाट भी उतार दिया था। इस वर्ष पुन: हाथियों के दस्तक देने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
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वन दरोगा ठेगुराम यादव का कहना है कि सीमा के जंगल में हाथियों के होने की सूचना मिली है। निगरानी के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है। ग्रामीणों ने हाथियों की दहाड़ सुनी है।
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शुक्रवार रात अचानक मंगरमाड गांव के अगरिया बस्ती से कुछ दूरी पर हाथियों की दहाड़ सुनाई देने लगी। हाथियों की दहाड़ सुनते ही बस्ती के लोग भयभीत हो गए और अपने घरों से निकल कर दूसरे के घर जाकर रात गुजारी। गांव के इंद्रदेव सिंह, प्रताप सिंह, रामनारायन ने बताया कि हाथियों की गर्जना काफी तेज हो थी। शुक्रवार को दिन में यूपी छत्तीसगढ़ बार्डर के घटाकुड बभनी गांव में 11 हाथियों का झुंड देखा गया था। लोगों का कहना है कि रात में वहीं हाथियों का झुंड मंगरमाड गांव के अगरिया बस्ती की ओर आ गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों की आवाज सुनकर पटाखे फोड़े गए और ढोलक भी बजाया गया ताकि हाथियों का झुंड गांव की ओर न बढ़ सके।
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पिछले वर्ष हाथियों ने पहुंचाया था काफी नुकसान
बता दें कि पिछले वर्ष धान की फसल को हाथियों ने काफी नुकसान पहुंचाया था। इससे शीशटोला, करमघट्टी, मंगरमाड, रम्पाकुरर, बिछियारी गांव के सैकड़ों किसान प्रभावित हुए थे। फसल नुकसान करने के साथ मानसिंह अगरिया, रामदेव गोंड, सहदेव गोंड, रामदेव, जगनरायन का कच्चा मकान भी गिरा दिया था। इतना ही नहीं डूमरहर निवासी राजेंद्र प्रसाद को हाथियों ने कुचलकर मौत के घाट भी उतार दिया था। इस वर्ष पुन: हाथियों के दस्तक देने से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।
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वन दरोगा ठेगुराम यादव का कहना है कि सीमा के जंगल में हाथियों के होने की सूचना मिली है। निगरानी के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है। ग्रामीणों ने हाथियों की दहाड़ सुनी है।