Sonbhadra: जिम्मेदारों ने नहीं सुनी फरियाद तो ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाई सड़क, बोले- कितना इंतजार करें
सोनभद्र जिले के बीडर गांव के डोंगाबहरा बस्ती में जाने वाला खड़ंजा युक्त मार्ग बदहाल है। ग्रामीणों ने अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी। थक-हार कर ग्रामीणों ने खुद से मार्ग को संवारने का संकल्प लिया और रविवार को वह फावड़ा, कुदाल लेकर कार्य के लिए घर से निकल आए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जब अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने गुहार नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद से ही श्रमदान कर सड़क निर्माण में जुट गए। फावड़ा, कुदाल लेकर श्रमदान करते हुए ग्रामीणों ने गांव के करीब 500 मीटर पुराने खड़ंजायुक्त मार्ग को चलने लायक बना दिया है। ग्रामीणों के इस पहल की जहां सराहना हो रही है, वहीं लोग जिम्मेदारों को कोस रहे हैं।
सोनभद्र जिले के बीडर गांव के डोंगाबहरा बस्ती में जाने वाला खड़ंजा युक्त मार्ग बदहाल है। मरम्मत न होने से यह चलने लायक नहीं रह गया है। बारिश के बाद स्थिति और बदहाल हो गई है। परेशान ग्रामीणों ने ग्राम समाधान दिवस, संपूर्ण समाधान दिवस में अफसरों से गुहार लगाई। ग्राम प्रधान व सेक्रेट्री सहित ब्लॉक और तहसील के अफसरों को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
थक-हार कर ग्रामीणों ने खुद से मार्ग को संवारने का संकल्प लिया और रविवार को वह फावड़ा, कुदाल लेकर कार्य के लिए घर से निकल आए। कुछ घंटे की मेहनत से ही ग्रामीणों ने खड़ंजा युक्त मार्ग को दुरुस्त कर दिया। ग्रामीण नंद बिहारी, बृजेश किशोर, अनिल मौर्य, इंद्र बिहारी ने कहा कि महीनों से हम लोग गुहार लगाते आ रहे हैं।
उम्मीद थी कि जिम्मेदारों के ध्यान देने से बारिश के पहले रास्ता ठीक हो जाएगा, लेकिन उनकी उपेक्षा से मायूस ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रयास कर मोरंग वाली मिट्टी से खड़ंजा को बराबर कर मरम्मत कार्य कर दिया। अब आवागमन में थोड़ी सहूलियत मिलेगी।
इस बाबत एडीओ पंचायत रविदत्त मिश्रा ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं आया है। संबंधित सचिव से संपर्क कर जनहित में होने वाले कार्य को प्राथमिकता दिया जाएगा। पुराने खड़ंजा मार्ग की जांच कराते हुए सड़क मरम्मत कार्य जरूर किया जाएगा।