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Sonebhadra News: समय पर टीका लगवाने से कई बीमारियां हो सकती हैं दूर
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सोनभद्र। जिले में बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए पहले चरण के तहत नौ जनवरी से 20 जनवरी के लिए विशेष टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। सभी विकास खंडों में कुल 1476 अतिरिक्त सत्रों का आयोजन किया जाएगा।
जिले में हर साल जागरूकता की कमी और टीकाकरण में लोगों के रुचि न लेने के कारण कई बीमारियां बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं। चिकित्सकों का मानना है कि अगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर लगने वाले टीके बच्चों को नियमित लगवाएं तो कई बीमारियों पर अंकुश पाया जा सकता है। ऐसे में शासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कमर कस लिया है। पूर्व में बुधवार और शनिवार को जिले के सभी एएनएम सेंटरों पर टीका लगाया जाता रहा है। अब अन्य दिनों में भी आशाओं से सहयोग लेकर टीका लगवाया जा रहा है। इससे जिले में टीके का ग्राफ बढ़ा है। मिजिल्स रूबेला का टीका 90 प्रतिशत लग चुका है। शासन की पहल पर तीन माह तक विशेष टीकाकरण पखवारा चलाया जाएगा।
पहले चरण का अभियान शुरू हो गया है, जो 9 से 20 जनवरी के बीच चलेगा। वहीं दूसरा चरण 13 से 24 फरवरी और तीसरा चरण 13 से 24 मार्च के बीच चलेगा। इस दौरान सदर ब्लॉक में 195, चतरा में 100, चोपन में 200 सहित अन्य विकास खंडों में 1476 अतिरिक्त सत्रों का आयोजन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन पखवाड़ों में शत-प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण पूर्ण कराने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि विशेष टीकाकरण अभियान के तहत बच्चों का तीन पखवाड़ों में टीकाकरण किया जाएगा। टीकाकरण के लिए वैक्सीन सभी केंद्रों पर उपलब्ध करा दी गई है। सभी सीएचसी, पीएचसी और स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण होना है। टीकाकरण का ब्योरा पोर्टल पर अपडेट होगा। सामुदायिक केंद्रों पर सप्ताह में सोमवार से शनिवार तक बच्चों का टीकाकरण होगा।
कुपोषण के अलावा विभिन्न प्रकार की गंभीर और संक्रामक बीमारियों के चलते कई बच्चों की मत्यु हो जाती है। व्यापक टीकाकरण अभियान के चलते इसमें काफी सुधार देखा गया है। वैक्सीन, बचपन की गंभीर-घातक बीमारियों से बचाने के साथ शरीर में प्राकृतिक सुरक्षा को उत्तेजित करके भविष्य में भी बच्चों को सुरक्षित रखने में मददगार होते हैं। टीकाकरण करा चुके बच्चे बीमारी से तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकते हैं। - डॉ. रमेश सिंह ठाकुर, सीएमओ।
खसरा से बचाव के लिए एमएमआर वैक्सीन की दो डोज बच्चों को दी जाती है। यह वैक्सीन खसरा, मम्स और रूबेला जैसे घातक और जानलेवा बीमारियों के जोखिम से बचाने में मददगार है। इसका पहला टीका 12-15 माह और दूसरा 4-6 साल के बीच दी जाती है।
सभी बच्चों को यह टीका जरूर लगवाना चाहिए। हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण होने वाला जानलेवा संक्रमण है। इस संक्रमण की स्थिति में लिवर की गंभीर बीमारियों का जोखिम होता है। शिशुओं को जन्म के बाद ही इसका टीका लगाना चाहिए। यह जीवनभर के लिए इस गंभीर संक्रमण से मृत्यु के जोखिम को कम करने में सहायक है। शिशुओं और छोटे बच्चों में गंभीर डायरिया का सबसे आम कारण है। रोटावायरस वैक्सीन रोटावायरस संक्रमण से बचाती है। - डॉ. प्रशांत शुक्ला, बाल रोग विशेषज्ञ।
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जिले में हर साल जागरूकता की कमी और टीकाकरण में लोगों के रुचि न लेने के कारण कई बीमारियां बच्चों को अपनी चपेट में ले रही हैं। चिकित्सकों का मानना है कि अगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर लगने वाले टीके बच्चों को नियमित लगवाएं तो कई बीमारियों पर अंकुश पाया जा सकता है। ऐसे में शासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कमर कस लिया है। पूर्व में बुधवार और शनिवार को जिले के सभी एएनएम सेंटरों पर टीका लगाया जाता रहा है। अब अन्य दिनों में भी आशाओं से सहयोग लेकर टीका लगवाया जा रहा है। इससे जिले में टीके का ग्राफ बढ़ा है। मिजिल्स रूबेला का टीका 90 प्रतिशत लग चुका है। शासन की पहल पर तीन माह तक विशेष टीकाकरण पखवारा चलाया जाएगा।
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पहले चरण का अभियान शुरू हो गया है, जो 9 से 20 जनवरी के बीच चलेगा। वहीं दूसरा चरण 13 से 24 फरवरी और तीसरा चरण 13 से 24 मार्च के बीच चलेगा। इस दौरान सदर ब्लॉक में 195, चतरा में 100, चोपन में 200 सहित अन्य विकास खंडों में 1476 अतिरिक्त सत्रों का आयोजन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन पखवाड़ों में शत-प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण पूर्ण कराने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि विशेष टीकाकरण अभियान के तहत बच्चों का तीन पखवाड़ों में टीकाकरण किया जाएगा। टीकाकरण के लिए वैक्सीन सभी केंद्रों पर उपलब्ध करा दी गई है। सभी सीएचसी, पीएचसी और स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण होना है। टीकाकरण का ब्योरा पोर्टल पर अपडेट होगा। सामुदायिक केंद्रों पर सप्ताह में सोमवार से शनिवार तक बच्चों का टीकाकरण होगा।
कुपोषण के अलावा विभिन्न प्रकार की गंभीर और संक्रामक बीमारियों के चलते कई बच्चों की मत्यु हो जाती है। व्यापक टीकाकरण अभियान के चलते इसमें काफी सुधार देखा गया है। वैक्सीन, बचपन की गंभीर-घातक बीमारियों से बचाने के साथ शरीर में प्राकृतिक सुरक्षा को उत्तेजित करके भविष्य में भी बच्चों को सुरक्षित रखने में मददगार होते हैं। टीकाकरण करा चुके बच्चे बीमारी से तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकते हैं। - डॉ. रमेश सिंह ठाकुर, सीएमओ।
खसरा से बचाव के लिए एमएमआर वैक्सीन की दो डोज बच्चों को दी जाती है। यह वैक्सीन खसरा, मम्स और रूबेला जैसे घातक और जानलेवा बीमारियों के जोखिम से बचाने में मददगार है। इसका पहला टीका 12-15 माह और दूसरा 4-6 साल के बीच दी जाती है।
सभी बच्चों को यह टीका जरूर लगवाना चाहिए। हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण होने वाला जानलेवा संक्रमण है। इस संक्रमण की स्थिति में लिवर की गंभीर बीमारियों का जोखिम होता है। शिशुओं को जन्म के बाद ही इसका टीका लगाना चाहिए। यह जीवनभर के लिए इस गंभीर संक्रमण से मृत्यु के जोखिम को कम करने में सहायक है। शिशुओं और छोटे बच्चों में गंभीर डायरिया का सबसे आम कारण है। रोटावायरस वैक्सीन रोटावायरस संक्रमण से बचाती है। - डॉ. प्रशांत शुक्ला, बाल रोग विशेषज्ञ।