नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: मालवाहक वाहन में छिपाकर दिल्ली ले जा रहे थे 1.10 करोड़ का गांजा, दो गिरफ्तार
मालवाहक वाहन में लोहे की चादर से बनाए गए गुप्त केबिन में सात बोरियों में छिपाकर 2.20 क्विंटल गांजा रखा गया था। तस्कर गांजे की खेप लेकर दिल्ली ले जा रहे थे। इसी दौरान दोनों आरोपी पकड़े गए।
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सोनभद्र में रॉबर्ट्सगंज कोतवाली और एसओजी की टीम ने ओडिशा के कालाहांडी से दिल्ली के बौद्ध विहार इलाके के लिए गांजा तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करने के साथ ही रविवार की रात दो तस्करों को गिरफ़्तार कर लिया। आयशर कंपनी के मालवाहक वाहन में लोहे के चादर से बनाए गए गुप्त केबिन से सात बोरियों में रखा 1.10 करोड़ (2.20 क्विंटल) का गांजा भी बरामद किया गया।
पूछताछ में गिरोह के तार दिल्ली से ओडिशा तक फैले पाए गए हैं। रैकेट का संचालन दिल्ली से किए जाने की जानकारी मिली है। सरगना सहित गिरोह के अन्य तस्करों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ ही ओडिशा से दिल्ली के बीच इस गिरोह के किन-किन जनपदों से तार जुड़े हैं इसके बारे में भी मालूमात हासिल किए जा रहे हैं।
कामयाबी पाने वाली टीम को 10 हजार के पुरस्कार से नवाजने की घोषणा भी की गई है। एसपी अभिषेक शर्मा ने सोमवार की दोपहर पुलिस लाइन सभागार में इसका खुलासा किया। बताया कि ऑपरेशन शुद्धि के तहत मादक पदार्थ तस्करी पर लगातार नजर रदखी जा रही है।
पूछताछ में आरोपियों एक ने अपना नाम बदायूं जिले के ओसावां थाना क्षेत्र के अद्दरमई निवासी बिरेस बताया और दूसरे ने अपना नाम आसोवा थाना क्षेत्र के मियारी-अभिबांव गोविंद होने की जानकारी दी। वाहन को देखा गया तो पीछे का हिस्सा खाली थी लेकिन जब उसमें बने गुप्त केबिन को खोलवाया गया तो मालूम हुआ कि सात बोरियों में कुल 2.20 कुंतल गांजा रखा हुआ है।
आरोपियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह दिल्ली में गांजा तस्करी करने वाले लोगों के संपर्क में रहकर उनके लिए गांजा लाने का कार्य करते हैं। इस बार भी उन्हें दिल्ली के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने पैसा उपलब्ध कराया था। रुपये मिलने के बाद वह ओडिशा के सुंदरगढ़-कालाहांडी क्षेत्र पहुंचे थे। वहां उनकी मुलाकात कालाहांडी निवासी व्यक्ति से हुई थी जिसने गांजा लोड करवाया। उसे वाहन में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त केबिन में छिपाकर ले जाया जा रहा था लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। इसकी आपूर्ति दिल्ली के बौद्ध विहार इलाके में की जानी थी।
कोरोना के बाद बना नेटवर्क, एक नहीं कई बार ले जा चुके थे खेप
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली के बुद्ध विहार इलाके में कोराना काल के समय जब काम-धंधे बंद हो गए। तब दूसरे राज्यों से गए लोग गांजा तस्करों के संपर्क में आ गए। इस काले धंधे में अच्छे मुनाफे को देखते हुए बाद में कई लोग जुड़े गए। कहा जा रहा है कि बदायूं निवासी जो तस्कर पकड़े गए हैं, वह भी सोनभद्र के रास्ते गांजे की खेप कई बार दिल्ली पहुंचा चुके हैं। आरोपियों के पास से पकड़े गए तिथि से पूर्व की कई टोल पर्चियां भी मिली हैं। उस समय गांजे की कितनी खेप और कहां के लिए ले जाई गई, इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
बता दें कि पिछले वर्ष अप्रैल में दिल्ली के बुद्ध विहार इलाके में सक्रिय मूलत: बिहार के शिवहर निवासी उमेश साहनी को पकड़ा गया था। उस समय भी यह जानकारी सामने आई थी कि तस्करों का नेटवर्क ओडिशा से भारी मात्रा में गांजा मंगवाकर दिल्ली व दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाके में छोटे तस्करों-खरीदारों को आपूर्ति दे रहा है। पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि कोराना काल में जब उसका मछली बिक्री का धंधा ठप हो गया तो उसने तस्करी की राह पकड़ ली। दिल्ली के मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी और बेगमपुर इलाके से भी तस्करी के तार जुड़े होने की बात सामने आई थी।
पकड़े गए आरोपियों के पास से पूर्व की टोल पर्चियां भी बरामद हुई हैं। कहीं इन पर्चियों का संबंध तस्करी से तो नहीं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पूछताछ में दिल्ली और ओडिशा के लोगों के गिरोह में शामिल होने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर भी कोई व्यक्ति इससे जुड़ा है या नहीं? पता लगाया जा रहा है। कामयाबी पाने वाली टीम को 10 हजार का इनाम भी दिया जा रहा है। -अभिषेक वर्मा, एसपी