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बीस क्रशर प्लांटों की जांच में मिलीं खामियां
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Thu, 05 Feb 2015 10:59 PM IST
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने गुरुवार को डाला-बारी क्रशर क्षेत्र के 20 प्लांटों की जांच की। इनमें मानकों की अनदेखी मिली है। टीम इसकी रिपोर्ट लखनऊ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपेगी।
जांच करने आए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता सीबी वर्मा ने कहा कि टीम का यह दो दिवसीय दौरा है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत निर्धारित मानकाें की जांच की जा रही है।
वायु प्रदूषण नियंत्रण के अंतर्गत सोनभद्र क्रशर क्षेत्र अति प्रदूषित क्षेत्र में शामिल है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर यह जांच की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाओं में क्रशर प्लांट के चारों ओर बाउंड्रीवाल हो, परिसर के अंदर पक्की सड़क हो, चाराें तरफ ग्रीन बेल्ट के तहत हरे पेड़-पौधे हों और पानी का फव्वारा हो।
लेकिन अब तक 20 क्रशर प्लांटों की जांच की गई, इन सभी में मानकों की अनदेखी पाई गई है। इसकी रिपोर्ट लखनऊ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी सौंपी जाएगी।
जांच टीम में लखनऊ बोर्ड के अवर अभियंता कौशल कुमार और सहायक वैज्ञानिक प्रदीप कुमार शामिल रहे। बता दें कि सांसद छोटेलाल खरवार ने खनन क्षेत्र में प्रदूषण का मुद्दा लोकसभा में उठाया था। इसके बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर यह जांच शुरू हुई है।
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जांच करने आए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता सीबी वर्मा ने कहा कि टीम का यह दो दिवसीय दौरा है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत निर्धारित मानकाें की जांच की जा रही है।
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वायु प्रदूषण नियंत्रण के अंतर्गत सोनभद्र क्रशर क्षेत्र अति प्रदूषित क्षेत्र में शामिल है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर यह जांच की जा रही है।
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उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाओं में क्रशर प्लांट के चारों ओर बाउंड्रीवाल हो, परिसर के अंदर पक्की सड़क हो, चाराें तरफ ग्रीन बेल्ट के तहत हरे पेड़-पौधे हों और पानी का फव्वारा हो।
लेकिन अब तक 20 क्रशर प्लांटों की जांच की गई, इन सभी में मानकों की अनदेखी पाई गई है। इसकी रिपोर्ट लखनऊ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी सौंपी जाएगी।
जांच टीम में लखनऊ बोर्ड के अवर अभियंता कौशल कुमार और सहायक वैज्ञानिक प्रदीप कुमार शामिल रहे। बता दें कि सांसद छोटेलाल खरवार ने खनन क्षेत्र में प्रदूषण का मुद्दा लोकसभा में उठाया था। इसके बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर यह जांच शुरू हुई है।