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लाइलाज नहीं क्षय रोग, समझाएंगे टीबी चैंपियन

Sat, 04 Dec 2021 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 11:57 PM IST
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Tuberculosis is not incurable, TB champion will explain
सोनभद्र। टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है, बशर्ते समय से सही उपचार शुरू कर दिया जाए तो मरीज स्वस्थ हो सकते हैं। यदि इसमें लापरवाही की गई तो यह गंभीर रूप धारण कर सकती है। टीबी को मात दे चुके टीबी चैंपियन दूसरों को टीबी से उबारने में मदद कर रहे हैं। क्षय रोग विभाग की तरफ से कम समय में टीबी को मात दे चुके 20 लोगों को टीबी चैंपियन नाम दिया गया है। ये लोगों को बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें जागरूक करने का काम करेंगे। सही इलाज के लिए प्रेरित करेंगे और सरकार की तरफ से दी जाने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे। पेश है कुछ ऐसे टीबी चैंपियन की कहानी...
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मरीजों को बता रहे रोग से मुक्ति का उपाय
घोरावल क्षेत्र के रहने वाले विशाल को क्षय रोग विभाग ने टीबी चैंपियन बनाया है। विशाल के मुताबिक एक साल पहले उन्हें कमजोरी महसूस होने लगी। खांसी भी आती थी। जब पता चला कि टीबी हो गई है तो वह घबरा रहे थे। छह माह के नियमित इलाज के बाद उन्होंने टीबी को हरा दिया। टीबी से जंग जीतने के बाद अब वह टीबी से जूझ रहे लोगों का इलाज कराकर उन्हें नया जीवन देने का काम कर रहे हैं।
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खान-पान सही रखने के लिए करते हैं प्रेरित
अनपरा क्षेत्र के रहने वाले राहुल एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। नौ माह पहले खांसी आना शुरू हुई तो वह दवा लिए। लेकिन दस दिन बाद भी खांसी से आराम नहीं हुआ। तब वे रिश्तेदार के कहने पर टीबी चेक कराया। बताते हैं कि टीबी से संक्रमित होने के कारण उन्होंने घरवालों से शारीरिक दूरी बना ली थी। धीरे-धीरे उन्हें इलाज से आराम मिला। इस समय टीबी चैंपियन बनकर टीबी जागरूकता की मुहिम चला रहे हैं। लोगों को खान-पान सही रखने को प्रेरित कर रहे हैं।
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मायके व ससुराल में लोगों को कर रही जागरूक
म्योरपुर ब्लॉक क्षेत्र की रहने वाली सोनाली देवी को पिछले वर्ष टीबी हो गई थी। उनके पिता ने क्षय रोग विभाग में संपर्क कर इलाज शुरू कराया। विभाग की तरफ से छह माह का निशुल्क दवा उपलब्ध कराया गया। साथ ही विभाग की तरफ से पांच सौ रुपये महीने खान-पान सही करने के लिए दिया गया। इन्होंने अपना नियमित इलाज कराया और क्षय रोग से मुक्ति पा ली। इस समय खुशहाल शादीशुदा जिंदगी व्यतीत कर रही है। उन्हें किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। वह बताती हैं कि वह टीबी चैंपियन बनकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं।
छह माह तक नियमित दवा लेकर टीबी को दी मात
राबर्ट्सगंज के रहने वाले संदीप बताते हैं कि जब वे टीबी पाजिटिव हुए तो घरवाले घबरा गए। लेकिन उन्होंने उन्हें धैर्य बंधाया और खुद क्षय रोग विभाग में संपर्क करके अपना इलाज शुरू कराया। डाक्टर के सलाह के अनुसार छह माह तक नियमित दवा ली। खान-पान पर विशेष ध्यान दिया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं। कहा कि टीबी पॉजिटिव मरीज नियमित दवा लेकर स्वस्थ हो सकते हैं, ख्याल रखें कि एक दिन भी दवा में गैप नहीं होनी चाहिए।

टीबी को हराने वाले को टीबी चैंपियन का दर्जा दिया जाता है। ऐसे लोग अन्य मरीजों को प्रेरित करने का काम करते हैं। इस समय कुल 20 टीबी चैंपियन है। इसमें 13 पुरुष एवं सात महिलाएं शामिल हैं। इनकी समय-समय पर बैठक ली जाती है। जिले के अंदर आने-जाने के लिए इन्हें 300 और गैर जनपद भेजने पर 600 रुपये किराया के रूप में दिया जाता है। जिले में कुल 2415 टीबी मरीज चिह्नित किए गए हैं।
- डॉ. आरजी यादव, प्रभारी जिला क्षय रोग अधिकारी, सोनभद्र।
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