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लोक नृत्य और लोक संगीत में दिखी आदिवासी परंपरा
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सोनभद्र। जिला क्रीड़ा स्टेडियम में शुक्रवार को जिला स्तरीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता में आदिवासी कला और संस्कृति की अनूठी झलक ने सबका मन मोह लिया। युवा कल्याण एवं खेल विभाग की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में आदिवासी अंचल के कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। करमा और गोंडी नृत्य पर लोग आनंदित हुए तो तबले की थाप पर झूम उठे।
दुद्धी के बघाड़ू गांव से आई सुशीला और उनकी टीम ने ‘काबर भूले रे आदिवासी आपन धर्म का इतिहास...’ के बोल पर पारंपरिक करमा नृत्य की प्रस्तुति दी तो म्योरपुर ब्लाक के बभनडीहा के तारा सिंह श्याम की टीम ने ‘चल चल संगी साजा माड़ा दा खाले चल दाले रो...’ पर मोहक गोंडी नृत्य प्रस्तुत किया। चतरा के त्रिपुरारी की टीम ने पारंपरिक कजरी ‘हमके बनारस नगरिया घूमा दा पिया न...’ पर माहौल जमाया तो घोरावल के नरेंद्र प्रताप के तबले की थाप पर लोग झूम उठे। हारमोनियम, गिटार आदि पर भी प्रस्तुतियां हुई।
प्रतियोगिता में 15 से 29 आयु वर्ष की कुल 86 पुरुष व महिला टीमों ने प्रतिभाग किया। जिला विकास अधिकारी रामबाबू त्रिपाठी ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। जला युवा कल्याण अधिकारी शशिभूषण शर्मा ने बताया कि जिला स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता चार सितंबर को मिर्जापुर में आयोजित मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेंगे। इस मौके पर एआर कोऑपरेटिव टीएन सिंह, जिला खेल अधिकारी डीपी सिंह, राजेंद्र सिंह, सहायक सांख्यिकी अधिकारी विजय कुमार गौतम, युवा कल्याण विभाग के प्रदीप कुमार सिंह, अमित सिंह, अनुज त्रिपाठी, रवि शंकर कुशवाहा, जितेंद्र कुमार, विजय कुमार विश्वकर्मा, बाबूलाल आदि मौजूद रहे। निर्णायक की भूमिका में धर्मेंद्र कुमार सिंह, दिनेश चंद्र शर्मा, रामअशीष यादव ने भूमिका निभाई। संचालन महफूज अली खान ने किया।
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प्रतियोगिता में यह रहे विजेता
लोकनृत्य विधा में दुद्धी की करमा नृत्य की टीम प्रथम और विकासखंड म्योरपुर की टीम द्वितीय रही। लोकगीत में चतरा के त्रिपुरारी की टीम प्रथम और करमा के सुदर्शन की द्वितीय रही। हारमोनियम (लाइट) में नगवां के श्रीराम चौबे प्रथम, चतरा के विभूति नारायण द्वितीय, तबला वादन में घोरावल के नरेंद्र प्रताप प्रथम, चतरा के चंद्रशेखर द्वितीय, गिटार वादन में घोरावल के शिवम तिवारी प्रथम स्थान पर रहे। एकल शास्त्रीय गायन में चतरा की मोहिनी यादव प्रथम रहीं।
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दुद्धी के बघाड़ू गांव से आई सुशीला और उनकी टीम ने ‘काबर भूले रे आदिवासी आपन धर्म का इतिहास...’ के बोल पर पारंपरिक करमा नृत्य की प्रस्तुति दी तो म्योरपुर ब्लाक के बभनडीहा के तारा सिंह श्याम की टीम ने ‘चल चल संगी साजा माड़ा दा खाले चल दाले रो...’ पर मोहक गोंडी नृत्य प्रस्तुत किया। चतरा के त्रिपुरारी की टीम ने पारंपरिक कजरी ‘हमके बनारस नगरिया घूमा दा पिया न...’ पर माहौल जमाया तो घोरावल के नरेंद्र प्रताप के तबले की थाप पर लोग झूम उठे। हारमोनियम, गिटार आदि पर भी प्रस्तुतियां हुई।
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प्रतियोगिता में 15 से 29 आयु वर्ष की कुल 86 पुरुष व महिला टीमों ने प्रतिभाग किया। जिला विकास अधिकारी रामबाबू त्रिपाठी ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। जला युवा कल्याण अधिकारी शशिभूषण शर्मा ने बताया कि जिला स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता चार सितंबर को मिर्जापुर में आयोजित मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेंगे। इस मौके पर एआर कोऑपरेटिव टीएन सिंह, जिला खेल अधिकारी डीपी सिंह, राजेंद्र सिंह, सहायक सांख्यिकी अधिकारी विजय कुमार गौतम, युवा कल्याण विभाग के प्रदीप कुमार सिंह, अमित सिंह, अनुज त्रिपाठी, रवि शंकर कुशवाहा, जितेंद्र कुमार, विजय कुमार विश्वकर्मा, बाबूलाल आदि मौजूद रहे। निर्णायक की भूमिका में धर्मेंद्र कुमार सिंह, दिनेश चंद्र शर्मा, रामअशीष यादव ने भूमिका निभाई। संचालन महफूज अली खान ने किया।
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प्रतियोगिता में यह रहे विजेता
लोकनृत्य विधा में दुद्धी की करमा नृत्य की टीम प्रथम और विकासखंड म्योरपुर की टीम द्वितीय रही। लोकगीत में चतरा के त्रिपुरारी की टीम प्रथम और करमा के सुदर्शन की द्वितीय रही। हारमोनियम (लाइट) में नगवां के श्रीराम चौबे प्रथम, चतरा के विभूति नारायण द्वितीय, तबला वादन में घोरावल के नरेंद्र प्रताप प्रथम, चतरा के चंद्रशेखर द्वितीय, गिटार वादन में घोरावल के शिवम तिवारी प्रथम स्थान पर रहे। एकल शास्त्रीय गायन में चतरा की मोहिनी यादव प्रथम रहीं।