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महंगी बिजली खरीदने के बोझ से बचने को करनी पड़ रही कटौती
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गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही प्रदेश में बिजली की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इससे सुचारु विद्युत आपूर्ति करने में पावर कारपोरेशन के छक्के छूट रहे हैं। समस्त संसाधन झोंक देने के बाद भी महंगे दर पर बिजली खरीदने में असमर्थ होने के बाद प्रदेश के सभी इलाकों में भारी अघोषित कटौती कर स्थिति पर काबू पाया जा रहा है।
प्रचंड तपिश व उमस के कारण सूबे में पिछले एक सप्ताह से बिजली की मांग लगातार 26 हजार मेगावाट पार बनी हुई है। इसके सापेक्ष निगम की तापीय परियोजनाओं से 4801 मेगावाट बिजली ही तैयार हो रही है। जल विद्युत से 981 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा। इसके अलावा बिजली की आपूर्ति के लिए निजी परियोजनाओं व केंद्रीय पूल से मदद लेनी पड़ रही है। महंगी बिजली के बोझ से बचने के लिए गांवों से लेकर शहरों तक बेतहाशा विद्युत कटौती की जा रही है। प्रदेश में तीन हजार मेगावाट के करीब विद्युत कटौती की जा रही है। मांग में बेतहाशा वृद्धि के कारण सरकार का जिला मुख्यालयों को 24 घंटे बिजली देने का फरमान भी बेअसर साबित हो रहा है। जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज में भी दो से तीन घंटे तक कटौती की जा रही है। भाठ क्षेत्र स्थित सुदूर ग्रामीण अंचलों में तो स्थिति और भी दयनीय बनी हुई है। दिन-दिन भर बिजली न रहने से ग्रामीण पेड़ों की छाया तले पंखा झलते हुए दिन बिताने को विवश हैं। मौसम के मिजाज को देखते हुए मानसून के दस्तक देने के पूर्व बिजली की मांग में कमी के आसार नहीं हैं।
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प्रचंड तपिश व उमस के कारण सूबे में पिछले एक सप्ताह से बिजली की मांग लगातार 26 हजार मेगावाट पार बनी हुई है। इसके सापेक्ष निगम की तापीय परियोजनाओं से 4801 मेगावाट बिजली ही तैयार हो रही है। जल विद्युत से 981 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा। इसके अलावा बिजली की आपूर्ति के लिए निजी परियोजनाओं व केंद्रीय पूल से मदद लेनी पड़ रही है। महंगी बिजली के बोझ से बचने के लिए गांवों से लेकर शहरों तक बेतहाशा विद्युत कटौती की जा रही है। प्रदेश में तीन हजार मेगावाट के करीब विद्युत कटौती की जा रही है। मांग में बेतहाशा वृद्धि के कारण सरकार का जिला मुख्यालयों को 24 घंटे बिजली देने का फरमान भी बेअसर साबित हो रहा है। जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज में भी दो से तीन घंटे तक कटौती की जा रही है। भाठ क्षेत्र स्थित सुदूर ग्रामीण अंचलों में तो स्थिति और भी दयनीय बनी हुई है। दिन-दिन भर बिजली न रहने से ग्रामीण पेड़ों की छाया तले पंखा झलते हुए दिन बिताने को विवश हैं। मौसम के मिजाज को देखते हुए मानसून के दस्तक देने के पूर्व बिजली की मांग में कमी के आसार नहीं हैं।
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