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थर्मल पावर को पानी की न हो दिक्कत, रिहंद हाइड्रो से बिजली उत्पादन कराया बंद
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पिपरी स्थित रिहंद जल विद्युत गृह।
- फोटो : SONBHADRA
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प्रचंड गर्मी में थर्मल पावर संयंत्रों को पानी की दिक्कत न हो, इसके मद्देनजर एहतियातन सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर रिहंद जल विद्युत गृह के सभी टरबाइनों को बंद करा दिया गया है। पिछले चार दिनों से रिहंद हाइड्रो का उत्पादन शून्य रहा है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से यूपी व एमपी के सीमावर्ती क्षेत्र में फैले रिहंद जलाशय को प्रदेश ही नहीं देश के विद्युत उत्पादन का आधार स्तंभ कहा जाता है। जलाशय के पानी से एनटीपीसी के रिहंदनगर, शक्तिनगर व विंध्यनगर, उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अनपरा व ओबरा, निजी क्षेत्र के लैंको, अडानी ग्रुप, रिलायंस व आदित्य बिड़ला ग्रुप की इकाइयों से 25 हजार मेगावाट के करीब विद्युत उत्पादन किया जाता है। इसके साथ ही रिहंद व ओबरा जल विद्युत गृहों का भी संचालन होता है। गर्मी के रौ में आते ही रिहंद डैम के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। बृहस्पतिवार सुबह को डैम का जलस्तर 845.5 फीट दर्ज किया गया। जलस्तर में गिरावट को देखते हुए सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर जलाशय के मुहाने पर स्थित रिहंद हाइड्रो के टरबाइनों को बंद करा दिया गया है। रिहंद जल विद्युत के एक्सईएन ओएंडएम एसके राय ने बताया कि वर्तमान में हाइड्रो के छह टरबाईनों में से पांच टरबाइन दुरुस्त हैं। मार्च महीने में संयंत्र ने निर्धारित लक्ष्य 50 मिलियन यूनिट के सापेक्ष 46 मियू विद्युत उत्पादन किया है। सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर टरबाइनों को शट डाउन पर रखा गया है। अब केवल आकस्मिक स्थिति में ही ऊपर से निर्देश मिलने पर टरबाइनों को चलाया जाएगा।
प्रदेश में सर्वाधिक सस्ती है रिहंद हाइड्रो की बिजली
उप्र पावर कारपोरेशन को जहां निगम, केंद्रीय व विभिन्न निजी क्षेत्रों के विद्युत संयंत्रों से दो रुपये से लेकर 8 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली मुहैया कराई जाती है। वहीं अब भी रिहंद जल विद्युत से पावर कारपोरेशन को एक रुपये से भी कम प्रति यूनिट की दर पर बिजली प्रदान की जाती है। ऐसे में गर्मी के मौसम में जहां प्रदेश में बिजली की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। वहीं रिहंद हाइड्रो के बंद हो जाने के कारण पावर कारपोरेशन को सस्ती बिजली से महरूम होना पड़ रहा है।
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क्षेत्रफल की दृष्टि से यूपी व एमपी के सीमावर्ती क्षेत्र में फैले रिहंद जलाशय को प्रदेश ही नहीं देश के विद्युत उत्पादन का आधार स्तंभ कहा जाता है। जलाशय के पानी से एनटीपीसी के रिहंदनगर, शक्तिनगर व विंध्यनगर, उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अनपरा व ओबरा, निजी क्षेत्र के लैंको, अडानी ग्रुप, रिलायंस व आदित्य बिड़ला ग्रुप की इकाइयों से 25 हजार मेगावाट के करीब विद्युत उत्पादन किया जाता है। इसके साथ ही रिहंद व ओबरा जल विद्युत गृहों का भी संचालन होता है। गर्मी के रौ में आते ही रिहंद डैम के जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। बृहस्पतिवार सुबह को डैम का जलस्तर 845.5 फीट दर्ज किया गया। जलस्तर में गिरावट को देखते हुए सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर जलाशय के मुहाने पर स्थित रिहंद हाइड्रो के टरबाइनों को बंद करा दिया गया है। रिहंद जल विद्युत के एक्सईएन ओएंडएम एसके राय ने बताया कि वर्तमान में हाइड्रो के छह टरबाईनों में से पांच टरबाइन दुरुस्त हैं। मार्च महीने में संयंत्र ने निर्धारित लक्ष्य 50 मिलियन यूनिट के सापेक्ष 46 मियू विद्युत उत्पादन किया है। सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर टरबाइनों को शट डाउन पर रखा गया है। अब केवल आकस्मिक स्थिति में ही ऊपर से निर्देश मिलने पर टरबाइनों को चलाया जाएगा।
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प्रदेश में सर्वाधिक सस्ती है रिहंद हाइड्रो की बिजली
उप्र पावर कारपोरेशन को जहां निगम, केंद्रीय व विभिन्न निजी क्षेत्रों के विद्युत संयंत्रों से दो रुपये से लेकर 8 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली मुहैया कराई जाती है। वहीं अब भी रिहंद जल विद्युत से पावर कारपोरेशन को एक रुपये से भी कम प्रति यूनिट की दर पर बिजली प्रदान की जाती है। ऐसे में गर्मी के मौसम में जहां प्रदेश में बिजली की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। वहीं रिहंद हाइड्रो के बंद हो जाने के कारण पावर कारपोरेशन को सस्ती बिजली से महरूम होना पड़ रहा है।
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