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Sonebhadra News: एसएनसीयू वार्ड में बेड कम, भटक रहे परिजन
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जिले के सरकारी अस्पतालों के सिक एंड न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में नौनिहालों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ जा रहे हैं। वार्ड में बेड न होने से कई बार नवजातों का जीवन खतरे में पड़ रहा है। निजी अस्पतालाें या करीब सौ किमी दूर वाराणसी रेफर करना पड़ रहा है।
जिले में रोजाना औसतन 50-60 बच्चे जन्म लेते हैं। इसमें काफी संख्या में बच्चे सांस लेने में परेशानी, पीलिया, कम वजन सहित अन्य बीमारी की चपेट में होते हैं। प्री मेच्योर, अति कुपोषित और अस्वस्थ नवजात बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 12 बेड और पीपीपी मॉडल पर संचालित एमसीएच विंग में दस बेड का एसएनसीयू (सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट) बना है।
इसमें बच्चों के लिए वार्मर लगे हैं। सिस्टम की बेरुखी के कारण नवजात बच्चों को आए दिन इलाज में समस्या झेलनी पड़ती है। दोनों अस्पताल में मौजूद सभी बेड अधिकांश फुल रहते हैं। कई बार चिकित्सक परिजनों की स्थिति देख एक बेड पर दो-दो नवजातों को भर्ती कर इलाज करते हैं।
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इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। दूसरी ओर रोजाना पांच से दस नवजात बेड न होने से रेफर होते हैं। ऐसे में उन्हें निजी अस्पताल में जाना होता है। गरीब तबके के लोगों के लिए यह खर्च वहन करना संभव नहीं होता है। परेशानी के बावजूद यहां एसएनसीयू के विस्तार पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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जिले में रोजाना औसतन 50-60 बच्चे जन्म लेते हैं। इसमें काफी संख्या में बच्चे सांस लेने में परेशानी, पीलिया, कम वजन सहित अन्य बीमारी की चपेट में होते हैं। प्री मेच्योर, अति कुपोषित और अस्वस्थ नवजात बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में 12 बेड और पीपीपी मॉडल पर संचालित एमसीएच विंग में दस बेड का एसएनसीयू (सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट) बना है।
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इसमें बच्चों के लिए वार्मर लगे हैं। सिस्टम की बेरुखी के कारण नवजात बच्चों को आए दिन इलाज में समस्या झेलनी पड़ती है। दोनों अस्पताल में मौजूद सभी बेड अधिकांश फुल रहते हैं। कई बार चिकित्सक परिजनों की स्थिति देख एक बेड पर दो-दो नवजातों को भर्ती कर इलाज करते हैं।
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इससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। दूसरी ओर रोजाना पांच से दस नवजात बेड न होने से रेफर होते हैं। ऐसे में उन्हें निजी अस्पताल में जाना होता है। गरीब तबके के लोगों के लिए यह खर्च वहन करना संभव नहीं होता है। परेशानी के बावजूद यहां एसएनसीयू के विस्तार पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।