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कृषि विधेयकों का किसानों ने किया विरोध
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सोनभद्र। कृषि विधेयकों के विरोध में जनपद के किसानों के स्वर भी मुखर होने लगा है। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित कृषि विधेयकों में किसानों का कहीं से भी हित निहित नहीं है। किसानों के उत्पाद का समर्थन मूल्य निर्धारित न होने से जहां व्यापारी किसानों का उत्पाद लेने में मनमानी करेंगे वहीं इससे जमाखोरी भी बढ़ेगी। कृषि विधेयकों का विरोध करते हुए किसानों ने इसमें संशोधन करने पर जोर दिया।
राबट्र्सगंज तहसील क्षेत्र के भरुहा खैराही निवासी किसान अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि समर्थन मूल्य का निर्धारण न होना इस बिल की सबसे बड़ी खामी है। किसान इतना संसाधन संपन्न नहीं है जो एक राज्य से दूसरे राज्य अपना उत्पाद बेचने के लिए ले जा सकें। इस पर आने वाली लागत बढ़ेगा और उसके सापेक्ष लाभ नहीं मिलेगा। इससे अनाज का मूल्य जरूर प्रभावित होगा। मूल्य निर्धारण न होने से व्यापारियों की मनमानी पूर्ण मूल्य निर्धारण एवं जमाखोरी की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। इसमें किसानों का नहीं बल्कि व्यापारियों का हित निहित है। किसान दर दर की ठोकरें खाने को विवश हो जाएगा। नवसृजित कोन ब्लॉक के रामगढ़ निवासी किसान रामकुमार जायसवाल का कहना है कि यह बिल किसानों के हित में कहीं से नहीं है। बची खोची व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी। मूल्य निर्धारण न होना और सब कुछ व्यापारियों के हाथ में होना घातक है।
वहीं बेठिगांव के किसान तपेश्वर तिवारी और शिवपूजन का कहना है कि किसान के उपज का मूल्य निर्धारण जरूरी है। वर्तमान में सरकार की तरफ से किसानों के उपज का समर्थन मूल्य निर्धारित किया जा रहा है। ऐसा होने के बाद भी व्यापारी मनमानी तरीके से किसानों के मजबूरी का फायदा उठाकर औने-पौने दाम पर अनाज खरीदते है। यदि मूल्य निर्धारण की व्यवस्था खत्म हुई तो यदि यह व्यवस्था भी खत्म हो गया तो व्यापारियों की मनमानी और ज्यादा बढ़ जाएगी। किसानों ने प्रस्ताविक कृषि विधेयकों में संसोधन करने की वकालत की है।
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राबट्र्सगंज तहसील क्षेत्र के भरुहा खैराही निवासी किसान अरविंद त्रिपाठी ने कहा कि समर्थन मूल्य का निर्धारण न होना इस बिल की सबसे बड़ी खामी है। किसान इतना संसाधन संपन्न नहीं है जो एक राज्य से दूसरे राज्य अपना उत्पाद बेचने के लिए ले जा सकें। इस पर आने वाली लागत बढ़ेगा और उसके सापेक्ष लाभ नहीं मिलेगा। इससे अनाज का मूल्य जरूर प्रभावित होगा। मूल्य निर्धारण न होने से व्यापारियों की मनमानी पूर्ण मूल्य निर्धारण एवं जमाखोरी की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। इसमें किसानों का नहीं बल्कि व्यापारियों का हित निहित है। किसान दर दर की ठोकरें खाने को विवश हो जाएगा। नवसृजित कोन ब्लॉक के रामगढ़ निवासी किसान रामकुमार जायसवाल का कहना है कि यह बिल किसानों के हित में कहीं से नहीं है। बची खोची व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी। मूल्य निर्धारण न होना और सब कुछ व्यापारियों के हाथ में होना घातक है।
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वहीं बेठिगांव के किसान तपेश्वर तिवारी और शिवपूजन का कहना है कि किसान के उपज का मूल्य निर्धारण जरूरी है। वर्तमान में सरकार की तरफ से किसानों के उपज का समर्थन मूल्य निर्धारित किया जा रहा है। ऐसा होने के बाद भी व्यापारी मनमानी तरीके से किसानों के मजबूरी का फायदा उठाकर औने-पौने दाम पर अनाज खरीदते है। यदि मूल्य निर्धारण की व्यवस्था खत्म हुई तो यदि यह व्यवस्था भी खत्म हो गया तो व्यापारियों की मनमानी और ज्यादा बढ़ जाएगी। किसानों ने प्रस्ताविक कृषि विधेयकों में संसोधन करने की वकालत की है।
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