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Sonebhadra News: चट्टानों में फ्लोराइड की अधिकता का अध्ययन होगा

Thu, 20 Mar 2025 10:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Mar 2025 10:59 PM IST
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The abundance of fluoride in rocks will be studied
म्योरपुर। ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम के विचित्रा महाकक्ष में बृहस्पतिवार को केंद्रीय भूजल बोर्ड ने शुद्ध पानी के उपयोग और फ्लोराइड वाले पानी के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से जन संवाद का आयोजन किया। बताया गया कि जिले के ब्लॉकों में चट्टानों में फ्लोराइड की अधिकता की जांच एमएनआईटी प्रयागराज करेगा
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केंद्रीय भू जल बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक संदीप स्वरूप ने अपने सहयोगी वैज्ञानिक रेणु मेहरा और डॉॅ. सुप्रिया सिंह के जरिये म्योरपुर, बभनी और दुद्धी ब्लाॅक में आगामी दो वर्षों में अध्ययन और जांच से जुड़ी जानकारी दी। बताया कि तीनों ब्लॉकों में 94 गांव फ्लोराइड के प्रभावित हैं। उनकी टीम तीनों ब्लॉक में फ्लोराइड, आयरन सहित 23 तरह के तत्वों की जांच और अन्वेषण करेगी। संदीप स्वरूप ने कहा कि जिले के ब्लॉकों में चट्टानों में फ्लोराइड की अधिकता की जांच एमएनआईटी प्रयागराज करेगा। इसके अलावा आईएमएस बीएचयू फ्लोराइड संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं की जांच करेगा। उन्होंने कहा कि हम सुरक्षित शुद्ध जल स्रोतों की तलाश भी करेंगे। वैज्ञानिक विद्या भूषण ने बोरवेल में बच्चों के गिरने और उसे बचाने के उपाय पर चर्चा के साथ डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई। एमएनआईटी प्रयागराज के प्रोफेसर एचके पांडेय ने बताया कि फ्लोराइड एक मीठा जहर है और जिले के दक्षिणांचल के रहवासियों का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। शुद्ध पानी की कमी के कारण उनकी कार्य क्षमता घट रही है। अन्य बीमारियां भी पांव फैलाने लगती है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शुभा प्रेम ने क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की और कहा कि वैज्ञानिक हम रहवासियों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के उपाय कर सकेंगे, ऐसी उम्मीद है। इस दौरान ग्रामीणों और छात्रों ने शुद्ध पानी से जुड़े सवाल किए। पानी में पारा की मौजूदगी, उसे फिल्टर करने के उपाय जानने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने बताया कि फिलहाल पारा की जांच नहीं कर रहे हैं, न ही फिल्टर की कोई युक्ति उपलब्ध है। कहा कि हम भूजल के केवल 23 तत्वों की ही जांच कर रहे हैं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर विमल सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन रेणु मेहरा ने किया। आयोजन में दक्षिणांचल के लगभग 35 गांवों के 100 लोगों के अलावा छात्रों और प्रधानों ने इसमें भाग लिया।
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