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सोनभद्रः पढ़ाई के साथ स्कूलों में हो योग, सामाजिक दूरी का कराएं पालन, अभिभावकों और शिक्षकों ने किया मंथन
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राबर्ट्सगंज में अमर उजाला अपराजिता वेबिनार गोष्ठी में शामिल महिलाएं।
- फोटो : SONBHADRA
कोरोना काल में बच्चों की शिक्षा को आगे बढ़ाना बड़ी चुनौती है। छठवीं से ऊपर तक की कक्षाएं शुरू हो गई हैं। एक सितंबर से छोटे बच्चों के भी स्कूल खुल जाएंगे। ऐसे में बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाते हुए पढ़ाई से जोड़ने की चिंताओं पर बृहस्पतिवार को अभिभावकों-शिक्षकों ने मंथन किया। स्कूलों में सावधानी बरतने की अपेक्षा की गई तो बच्चों के घर आने और स्कूल जाते वक्त भी मुकम्मल इंतजाम को जरूरी बताया गया।
सोनभद्र में अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत हुए वेबिनार में समाज के विभिन्न वर्ग की महिला अभिभावक, स्कूल संचालक और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई पर विमर्श किया और एक दूसरे से अपने विचार साझा किए। राबर्ट्सगंज निवासी होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में सर्वाधिक बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के मद्देनजर अभी ऑनलाइन कक्षाएं चलाना ही उचित होगा। योग शिक्षिका अनीता गुप्ता और पल्लवी कुमारी ने कहा कि स्कूलों में बच्चों का कोविड टेस्ट कराने की व्यवस्था हो। रोज स्कूलों में 40 से 45 मिनट योग भी कराया जाए।
उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष शीतल दहलान ने कहा कि कोरोना के चलते डेढ़ साल तक स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई नहीं हुई। स्कूलों में कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए पठन-पाठन कराने की जरूरत है लेकिन बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाए रखना सबसे पहली प्राथमिकता है। प्रधानाचार्या चित्रा जालान और निजी स्कूल के प्रबंधक शीतला प्रसाद का कहना था कि घरों से ज्यादा बच्चे स्कूलों में सुरक्षित रहेंगे। हर स्कूल में बचाव के हर संभव इंतजाम किए गए हैं। इसलिए अभिभावक निडर होकर बच्चों को स्कूल भेजें। शिक्षिका कमलेश जायसवाल और गायत्री त्रिपाठी ने कहा कि कोराना को गंभीरता से लेते हुए दो गज दूरी मास्क है जरूरी... नियमों का पालन करते हुए पढ़ाई कराने की योजना बनाई गई है।
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कौसर जहां सिद्दीकी, माला सिंह, प्रियंका दुबे और शिव कुमारी ने कहा कि बच्चों में शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए एक टेबल पर दो बच्चों को ही बैठाया जाए। इसी तरह अलग अलग सेक्शन के बच्चों को स्कूल बुलाए जाने का विकल्प सुझाया। ममता गुप्ता, रीना कुमारी, सोनी विश्वकर्मा और गरिमा त्रिपाठी ने कहा कि सरकार की गाइड लाइन के तहत बच्चों को शिक्षा मिले। वर्षा वर्मा, निकिता सिंह ने कहा कि ऑनलाइन क्लास से गरीब बच्चे वंचित रह जा रहे हैं। ऐसे में कोराना से बचाव करते हुए स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का फैसला सही है। पूनम खेतान, बीना गुप्ता, निक्की कानोडिया का मानना है कि स्कूलों के बंद होने से बच्चों की शिक्षा के स्तर पर गहरा असर पड़ रहा है। वेबिनार में विनीता गौतम, सुमन जायसवाल, अंशु अग्रहरि, सुषमा शुक्ला, पूजा अग्रहरि, खुशबू, प्रतिभा सोनी, पूजा द्विवेदी, पूजा सिंह, पिंकी जैन, कविता तिवारी, सुमन त्रिपाठी समेत 32 लोगों ने भागीदारी की।
स्कूल वाहनों में भी हो गाइड लाइन पर अमल
अभिभावकों ने स्कूल के साथ वाहनों में भी सामाजिक दूरी के पालन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का पालन तो किया ही जाए, वाहनों को भी नियमित सैनिटाइज कराया जाना चाहिए। जिन स्कूलों के बस समेत अन्य वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा हो, उन विद्यालयों के प्रबंधकों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई होनी चाहिए। ग्राम प्रधानों की ओर से सप्ताह में एक बार स्कूल और आसपास सैनिटाइजेशन कराया जाए।
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सोनभद्र में अमर उजाला के अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत हुए वेबिनार में समाज के विभिन्न वर्ग की महिला अभिभावक, स्कूल संचालक और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कोरोना काल में बच्चों की पढ़ाई पर विमर्श किया और एक दूसरे से अपने विचार साझा किए। राबर्ट्सगंज निवासी होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में सर्वाधिक बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के मद्देनजर अभी ऑनलाइन कक्षाएं चलाना ही उचित होगा। योग शिक्षिका अनीता गुप्ता और पल्लवी कुमारी ने कहा कि स्कूलों में बच्चों का कोविड टेस्ट कराने की व्यवस्था हो। रोज स्कूलों में 40 से 45 मिनट योग भी कराया जाए।
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उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष शीतल दहलान ने कहा कि कोरोना के चलते डेढ़ साल तक स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई नहीं हुई। स्कूलों में कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए पठन-पाठन कराने की जरूरत है लेकिन बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाए रखना सबसे पहली प्राथमिकता है। प्रधानाचार्या चित्रा जालान और निजी स्कूल के प्रबंधक शीतला प्रसाद का कहना था कि घरों से ज्यादा बच्चे स्कूलों में सुरक्षित रहेंगे। हर स्कूल में बचाव के हर संभव इंतजाम किए गए हैं। इसलिए अभिभावक निडर होकर बच्चों को स्कूल भेजें। शिक्षिका कमलेश जायसवाल और गायत्री त्रिपाठी ने कहा कि कोराना को गंभीरता से लेते हुए दो गज दूरी मास्क है जरूरी... नियमों का पालन करते हुए पढ़ाई कराने की योजना बनाई गई है।
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कौसर जहां सिद्दीकी, माला सिंह, प्रियंका दुबे और शिव कुमारी ने कहा कि बच्चों में शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए एक टेबल पर दो बच्चों को ही बैठाया जाए। इसी तरह अलग अलग सेक्शन के बच्चों को स्कूल बुलाए जाने का विकल्प सुझाया। ममता गुप्ता, रीना कुमारी, सोनी विश्वकर्मा और गरिमा त्रिपाठी ने कहा कि सरकार की गाइड लाइन के तहत बच्चों को शिक्षा मिले। वर्षा वर्मा, निकिता सिंह ने कहा कि ऑनलाइन क्लास से गरीब बच्चे वंचित रह जा रहे हैं। ऐसे में कोराना से बचाव करते हुए स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का फैसला सही है। पूनम खेतान, बीना गुप्ता, निक्की कानोडिया का मानना है कि स्कूलों के बंद होने से बच्चों की शिक्षा के स्तर पर गहरा असर पड़ रहा है। वेबिनार में विनीता गौतम, सुमन जायसवाल, अंशु अग्रहरि, सुषमा शुक्ला, पूजा अग्रहरि, खुशबू, प्रतिभा सोनी, पूजा द्विवेदी, पूजा सिंह, पिंकी जैन, कविता तिवारी, सुमन त्रिपाठी समेत 32 लोगों ने भागीदारी की।
स्कूल वाहनों में भी हो गाइड लाइन पर अमल
अभिभावकों ने स्कूल के साथ वाहनों में भी सामाजिक दूरी के पालन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्कूलों में कोरोना गाइडलाइन का पालन तो किया ही जाए, वाहनों को भी नियमित सैनिटाइज कराया जाना चाहिए। जिन स्कूलों के बस समेत अन्य वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा हो, उन विद्यालयों के प्रबंधकों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई होनी चाहिए। ग्राम प्रधानों की ओर से सप्ताह में एक बार स्कूल और आसपास सैनिटाइजेशन कराया जाए।