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सोनभद्र-सिंगरौली की आबोहवा हुई जहरीली, दस सिगरेट पीने के बराबर हुआ प्रदूषण

Tue, 29 Oct 2019 08:10 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 29 Oct 2019 08:10 PM IST
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sonbhadra air quality index in critical condition
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : pixabay
देश के तीसरे सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र का दर्जा रखने वाले सिंगरौली रीजन (सोनभद्र और सिंगरौली) में दीपावली के बाद वायु प्रदूषण में तेजी से इजाफा हुआ है। एक दिन पहले 142 पर रहने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक  (एक्यूआई) मंगलवार को 219 पर जा पहुंचा। विशेषज्ञों का दावा है कि यह प्रदूषण प्रत्येक व्यक्ति के लिए 10 सिगरेट पीने के बराबर है।  
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सोनभद्र की सिर्फ हवा ही नहीं, मृदा और जल भी जहरीला हो चुका है। फ्लोराइड, नाइट्रोजन जैसे रासायनिक तत्वों के अलावा बड़े क्षेत्र में मरकरी की अत्यधिक मात्रा लगातार स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। इसको देखते हुए केंद्र सरकार के राष्ट्रीय हवा स्वच्छता कार्यक्रम की कार्ययोजना में जिले के अनपरा को शामिल किया जा चुका है, लेकिन अभी भी वायु प्रदूषण समस्या बनी है। 
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी आंकड़े के अनुसार, दीपावली के एक दिन पूर्व 27 अक्तूबर को जो एक्यूआई 142 था, वह 28 अक्तूबर को 217 और 29 अक्तूबर को 219 पर पहुंच गया।  सामान्यता इसे दीपावली के पटाखों का परिणाम भले ही माना जाए लेकिन विशेषज्ञों की राय में इसका बड़ा कारण लगातार बिजली आपूर्ति की जरूरत को पूरा करने के लिए पूरी क्षमता से जलाए गए कोयले और उससे उत्सर्जित राख एवं अन्य औद्योगिक अवशिष्टों का प्रभाव है।
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विशेषज्ञ हवा में प्रति घन मीटर पाए जाने वाले 21.6 माइक्रो ग्राम प्रदूषक तत्वों की मात्रा को एक सिगरेट के बराबर मानते हैं। इस हिसाब से अगर 219 के आंकड़े को देखें तो यह दस सिगरेट के बराबर बैठता है। भारतीय मानक के अनुसार 60 से ऊपर एक्यूआई पहुंचने पर मानव स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है।

सौ तक स्थिति नियंत्रित रहती है। इससे ऊपर का आंकड़ा तेजी से लोगों को बीमार करना शुरू करता है। दो सौ से ऊपर के आंकड़े को गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जाता है। आंकड़ा जब तीन सौ के ऊपर पहुंचने पर हालात को मानव स्वास्थ्य के लिए आपातकाल के रूप में देखा जाने लगता है।
 
रिसर्च एंड ट्रेिक्नकल हेड लोक विज्ञान संस्थान, देहरादून के डा. अनिल कुमार गौतम का कहना है कि सोनभद्र-सिंगरौली की मौजूदा स्थिति बेहद खराब हैं। हवा में प्रति घन मीटर 21.6 माइक्रोग्राम प्रदूषक तत्व की मौजूदगी एक सिगरेट पीने के बराबर है। इस लिहाज से वहां के लोग रोजाना कई सिगरेट के बराबर प्रदूषण का सेवन कर रहे हैं।   

 
पर्यावरणविद डॉ. सीमा जावेद का कहना है कि सोनभद्र और सिंगरौली दोनों जगह प्रदूषण चरम पर है। इसकी रोकथाम के प्रयास का कोई खास असर नहीं पड़ा है। यही कारण है कि एनजीटी की सख्ती और सरकारी प्रयास के बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। प्रभावी नियंत्रण के लिए जरूरी है कि सतत निगरानी रखी जाए।

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