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रावण का वध, गूंजा जयश्रीराम
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Tue, 30 Dec 2014 10:46 PM IST
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राबर्ट्सगंज आरटीएस क्लब में चल रहे श्रीराम चरित मानस नवाह्न पाठ महायज्ञ के आठवें दिन मंगलवार को यज्ञाचार्य सूर्यलाल शास्त्री का 111 भूदेवों के साथ किए जा रहे मानस पाठ से लाउडस्पीकर के जरिए समूचा शहर मानस की चौपाइयों से गुंजायमान रहा।
दोपहर बाद दशानन रावण के वध का मंचन हुआ। सुबह से ही भक्त यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते रहे। इसके अलावा पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
श्रीराम चरित मानस नवाह्न पाठ महायज्ञ के आठवें दिन मंगलवार को श्रीराम ने दशानन रावण का वध किया तो श्रीराम के जयकारे से समूचा पांडाल गूंज उठा।
इसके पूर्व रोज की तरह आचार्य संतोष कुमार दूबे, शिवकुमार शास्त्री, यशवंत पांडेय और अनिल कुमार पांडेय ने वैदिक मंत्रो के उच्चारण के साथ यजमान सुशील पाठक से विधिवत पूजन ओर आरती कराई।
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वहीं यज्ञाचार्च सूर्यलाल मिश्र के साथ 111 भूदेवों ने मानस पाठ करते रहे। सायंकालीन प्रवचन में सोमवार को जौनपुर से पधारे जगदीश पांडेय और अंबिका प्रसाद दूबे ने भजन प्रस्तुत किया।
आजमगढ़ से पधारे गोविंद दत्त शास्त्री ने सीता हरण का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा रावण ब्राह्मण था, उसे पावन होना चाहिए, प्रशासक का शासन दुरुस्त होना चाहिए, बनिया को नरम होना चाहिए और नारी में शरम होना चाहिए।
संचालन डा. कृष्णानंद त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर सुशील पाठक, डा. कुसुमाकर श्रीवास्तव, मिठाईलाल सोनी, कपिल मुनि मिश्रा, शिशु त्रिपाठी, विमलेश सिंह, मृत्युंजय जायसवाल, रविंद्र पाठक, सुशील लोढ़ी, महेश दूब आदि मौजूद रहे।
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दोपहर बाद दशानन रावण के वध का मंचन हुआ। सुबह से ही भक्त यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते रहे। इसके अलावा पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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श्रीराम चरित मानस नवाह्न पाठ महायज्ञ के आठवें दिन मंगलवार को श्रीराम ने दशानन रावण का वध किया तो श्रीराम के जयकारे से समूचा पांडाल गूंज उठा।
इसके पूर्व रोज की तरह आचार्य संतोष कुमार दूबे, शिवकुमार शास्त्री, यशवंत पांडेय और अनिल कुमार पांडेय ने वैदिक मंत्रो के उच्चारण के साथ यजमान सुशील पाठक से विधिवत पूजन ओर आरती कराई।
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वहीं यज्ञाचार्च सूर्यलाल मिश्र के साथ 111 भूदेवों ने मानस पाठ करते रहे। सायंकालीन प्रवचन में सोमवार को जौनपुर से पधारे जगदीश पांडेय और अंबिका प्रसाद दूबे ने भजन प्रस्तुत किया।
आजमगढ़ से पधारे गोविंद दत्त शास्त्री ने सीता हरण का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा रावण ब्राह्मण था, उसे पावन होना चाहिए, प्रशासक का शासन दुरुस्त होना चाहिए, बनिया को नरम होना चाहिए और नारी में शरम होना चाहिए।
संचालन डा. कृष्णानंद त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर सुशील पाठक, डा. कुसुमाकर श्रीवास्तव, मिठाईलाल सोनी, कपिल मुनि मिश्रा, शिशु त्रिपाठी, विमलेश सिंह, मृत्युंजय जायसवाल, रविंद्र पाठक, सुशील लोढ़ी, महेश दूब आदि मौजूद रहे।