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शिवद्वार और गोठानी बनेंगे पर्यटन स्थल, तैयार हो रहा प्रस्ताव
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घोरावल तहसील क्षेत्र के शिवद्वार स्थित उमा माहेश्वर महादेव की भव्य प्रतिमा।
- फोटो : SONBHADRA
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घोरावल। गुप्तकाशी के नाम से प्रसिद्ध घोरावल तहसील के शिवद्वार क्षेत्र और चोपन ब्लॉक के गोठानी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन विभाग प्रस्ताव बनाने में जुट गया है। करीब तीन करोड़ रुपये से यहां जनसुविधाओं का विकास होगा। सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही कार्ययोजना शासन को भेजी जाएगी।
जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर घोरावल क्षेत्र अंतर्गत गांव सतद्वारी, शिवद्वार, बैजनाथ, आमडीह, बर कन्हरा, हिरनखुड़ी, मुक्खा प्रागैतिहासिक काल, प्राचीन काल, मध्य काल के महत्वपूर्ण धरोहरों से समृद्ध है। सतद्वारी गांव के शिवद्वार मंदिर में स्थापित काले पत्थरों से बनी श्री उमामहेश्वर की अद्भुत प्राचीन मूर्ति शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है। लास्य शैली की इस प्रतिमा का कालखंड कुछ विद्वान 11वीं शताब्दी और कुछ विद्वान इससे भी अधिक प्राचीन मानते हैं। इतिहासकारों का कहना है कि शिवद्वार के समीप प्रवाहित बेलन नदी भारत के गिने चुने स्थलों में से है, जहां पाषाणकालीन मानव सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं। शिवद्वार के पास मुक्खा गांव में बेलन नदी किनारे चट्टानों पर बने चित्र कई हजार साल प्राचीन है।
मुक्खा गांव में ही बेलन नदी से जुड़ा मुक्खा जलप्रपात प्रकृति का अनमोल उपहार है। बर कन्हरा में माता काली व चतुर्भुजी विष्णु की मूर्ति, खजुरी में भगवान विष्णु की दिव्य प्राचीन मूर्ति, सोढ़रीगढ़ का किला इत्यादि इतिहास व शोध के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। पूरे शिवद्वार क्षेत्र में मकान निर्माण के लिए खुदाई के दौरान प्राय: मूर्तियां, कलाकृतियां, सोने चांदी के सामान व विभिन्न वस्तुएं मिलती हैं। प्रशासनिक एवं भौगोलिक दृष्टि से भी सतद्वारी बेहद महत्वपूर्ण है। ब्रिटिश साम्राज्य के दौर में राजस्व अभिलेखों में सतद्वारी को तहसील का दर्जा प्राप्त था। सतद्वारी ग्राम पंचायत के हिरनखुड़ी गांव में अब भी तहसील कार्यालय एवं पुलिस चौकी के कुछ यहां का इतिहास बताते हैं। शिवद्वार मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेश गिरि बताते हैं कि सतद्वारी और आसपास के इलाकों में पर्यटन के दृष्टिकोण से रोजगार की अच्छी संभावना है। यहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों के साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, दिल्ली इत्यादि स्थानों से दर्शन पूजन करने आते हैं।
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शासन के निर्देश पर शिवद्वार, गोठानी में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। सर्वे का पूरा हो गया है। जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा। - नवीन कुमार, सहायक पर्यटन अधिकारी, मिर्जापुर-सोनभद्र।
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जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर घोरावल क्षेत्र अंतर्गत गांव सतद्वारी, शिवद्वार, बैजनाथ, आमडीह, बर कन्हरा, हिरनखुड़ी, मुक्खा प्रागैतिहासिक काल, प्राचीन काल, मध्य काल के महत्वपूर्ण धरोहरों से समृद्ध है। सतद्वारी गांव के शिवद्वार मंदिर में स्थापित काले पत्थरों से बनी श्री उमामहेश्वर की अद्भुत प्राचीन मूर्ति शिल्पकला का बेजोड़ नमूना है। लास्य शैली की इस प्रतिमा का कालखंड कुछ विद्वान 11वीं शताब्दी और कुछ विद्वान इससे भी अधिक प्राचीन मानते हैं। इतिहासकारों का कहना है कि शिवद्वार के समीप प्रवाहित बेलन नदी भारत के गिने चुने स्थलों में से है, जहां पाषाणकालीन मानव सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं। शिवद्वार के पास मुक्खा गांव में बेलन नदी किनारे चट्टानों पर बने चित्र कई हजार साल प्राचीन है।
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मुक्खा गांव में ही बेलन नदी से जुड़ा मुक्खा जलप्रपात प्रकृति का अनमोल उपहार है। बर कन्हरा में माता काली व चतुर्भुजी विष्णु की मूर्ति, खजुरी में भगवान विष्णु की दिव्य प्राचीन मूर्ति, सोढ़रीगढ़ का किला इत्यादि इतिहास व शोध के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। पूरे शिवद्वार क्षेत्र में मकान निर्माण के लिए खुदाई के दौरान प्राय: मूर्तियां, कलाकृतियां, सोने चांदी के सामान व विभिन्न वस्तुएं मिलती हैं। प्रशासनिक एवं भौगोलिक दृष्टि से भी सतद्वारी बेहद महत्वपूर्ण है। ब्रिटिश साम्राज्य के दौर में राजस्व अभिलेखों में सतद्वारी को तहसील का दर्जा प्राप्त था। सतद्वारी ग्राम पंचायत के हिरनखुड़ी गांव में अब भी तहसील कार्यालय एवं पुलिस चौकी के कुछ यहां का इतिहास बताते हैं। शिवद्वार मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेश गिरि बताते हैं कि सतद्वारी और आसपास के इलाकों में पर्यटन के दृष्टिकोण से रोजगार की अच्छी संभावना है। यहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों के साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, दिल्ली इत्यादि स्थानों से दर्शन पूजन करने आते हैं।
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शासन के निर्देश पर शिवद्वार, गोठानी में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। सर्वे का पूरा हो गया है। जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर भेजा जाएगा। - नवीन कुमार, सहायक पर्यटन अधिकारी, मिर्जापुर-सोनभद्र।