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साढ़े तेरह हजार प्रवासी श्रमिकों में से आठ हजार को मिला रोजगार
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सोनभद्र। कोरोना संकट के दौरान जिले में 13402 प्रवासी श्रमिक आ चुके हैं। इनमें से 9134 के जाब कार्ड बनाए गए हैं। जिसमें से 8270 प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में रोजगार दिया गया है। कई अन्य खेती बारी में जुटे हैं। आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले कुछ श्रमिक ठेकेदारों के बुलावे पर जिले से सटे राज्यों मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के जिलों में काम पर लौट भी गए हैं।
कोरोना संकट के दौरान मार्च में शुरू हुए लाकडाउन के बाद से अब तक जिले के 637 ग्राम पंचायतों में से 544 में 13402 प्रवासी श्रमिक तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक और झारखंड के विभिन्न जिलों में काम बंद होने पर अपने घर लौटे। इसमें भी सर्वाधिक 3562 प्रवासी श्रमिक घोरावल ब्लाक के विभिन्न गांवों में लौटे। इनके अलावा बभनी में 2228, चतरा में 1541, चोपन में 1492, दुद्धी में 1364, म्योरपुर में 1572, नगवां में 730 और राबर्ट्सगंज में 913 प्रवासी श्रमिक अपने घर लौटे हैं। इनमें से बभनी में 886, चतरा में 1312, चोपन में 1069, दुद्धी में476, घोरावल में 2254, म्योरपुर में 1883, नगवां में 578 और राबर्ट्सगंज में 676 प्रवासी श्रमिकों को जाब कार्ड बनाए गए हैं। जिन लोगों के जाब कार्ड बने हैं, उनमें से बभनी में 1211, चतरा में 1124, चोपन में 1026, दुद्धी में 759, घोरावल में 1690, म्योरपुर में 941, नगवां में 624 और राबर्ट्सगंज में 895 प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा के तहत फिलहाल रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अन्य प्रवासी श्रमिकों में से कई खेतीबारी में जुट गए हैं और कोरोना संकट समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। ताकि अपने रोजगार वाले स्थलों को लौट सकें। उपायुक्त मनरेगा टीबी सिंह का कहना है कि जिन प्रवासी श्रमिकों के जाब कार्ड बनाए जा चुके हैं, उन्हें मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जो बचे रह गए हैं, उन्हें भी मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिदिन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी जा रही है।
आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले श्रमिक ठेकेदारों के बुलाए पर गए
संवाद न्यूज एजेंसी
बभनी। स्थानीय विकास खंड के बभनी ग्राम पंचायत में बाहर से कमाकर 85 प्रवासी मजदूर कोरोना संकट के दौरान अपने घर लौटे। इसमें कुछ प्रवासी मजदूरों को गांव में ही मनरेगा के तहत रोजगार मुहैया कराया गया है।ग्राम पंचायत विकास अधिकारी गिरीश चंद्र दुबे ने बताया कि ग्राम पंचायत बभनी में तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, दिल्ली, और झारखंड से 85 मजदूर घर लौटे। उसमें से कुछ मजदूरों को गांव में ही मनरेगा में काम दिया गया है। कुछ मजदूर गांव से फिर अपने काम पर लौट गये हैं। आउट सोर्सिंग पर काम करने वाले जो लोग काम पर लौटे हैं, उनमें ज्यादातर जिले से सटे राज्य मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर ठेकेदारों के बुलावे पर गए हैं। ग्राम प्रधान राजनरायन ने बताया कि 20 मजदूर गांव में ही मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं।
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कोरोना संकट के दौरान मार्च में शुरू हुए लाकडाउन के बाद से अब तक जिले के 637 ग्राम पंचायतों में से 544 में 13402 प्रवासी श्रमिक तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक और झारखंड के विभिन्न जिलों में काम बंद होने पर अपने घर लौटे। इसमें भी सर्वाधिक 3562 प्रवासी श्रमिक घोरावल ब्लाक के विभिन्न गांवों में लौटे। इनके अलावा बभनी में 2228, चतरा में 1541, चोपन में 1492, दुद्धी में 1364, म्योरपुर में 1572, नगवां में 730 और राबर्ट्सगंज में 913 प्रवासी श्रमिक अपने घर लौटे हैं। इनमें से बभनी में 886, चतरा में 1312, चोपन में 1069, दुद्धी में476, घोरावल में 2254, म्योरपुर में 1883, नगवां में 578 और राबर्ट्सगंज में 676 प्रवासी श्रमिकों को जाब कार्ड बनाए गए हैं। जिन लोगों के जाब कार्ड बने हैं, उनमें से बभनी में 1211, चतरा में 1124, चोपन में 1026, दुद्धी में 759, घोरावल में 1690, म्योरपुर में 941, नगवां में 624 और राबर्ट्सगंज में 895 प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा के तहत फिलहाल रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अन्य प्रवासी श्रमिकों में से कई खेतीबारी में जुट गए हैं और कोरोना संकट समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। ताकि अपने रोजगार वाले स्थलों को लौट सकें। उपायुक्त मनरेगा टीबी सिंह का कहना है कि जिन प्रवासी श्रमिकों के जाब कार्ड बनाए जा चुके हैं, उन्हें मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जो बचे रह गए हैं, उन्हें भी मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिदिन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी जा रही है।
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आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले श्रमिक ठेकेदारों के बुलाए पर गए
संवाद न्यूज एजेंसी
बभनी। स्थानीय विकास खंड के बभनी ग्राम पंचायत में बाहर से कमाकर 85 प्रवासी मजदूर कोरोना संकट के दौरान अपने घर लौटे। इसमें कुछ प्रवासी मजदूरों को गांव में ही मनरेगा के तहत रोजगार मुहैया कराया गया है।ग्राम पंचायत विकास अधिकारी गिरीश चंद्र दुबे ने बताया कि ग्राम पंचायत बभनी में तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, दिल्ली, और झारखंड से 85 मजदूर घर लौटे। उसमें से कुछ मजदूरों को गांव में ही मनरेगा में काम दिया गया है। कुछ मजदूर गांव से फिर अपने काम पर लौट गये हैं। आउट सोर्सिंग पर काम करने वाले जो लोग काम पर लौटे हैं, उनमें ज्यादातर जिले से सटे राज्य मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर ठेकेदारों के बुलावे पर गए हैं। ग्राम प्रधान राजनरायन ने बताया कि 20 मजदूर गांव में ही मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं।
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