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चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचा रिहंद बांध का जलस्तर
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मानसून आगमन के पूर्व ही यूपी व एमपी के सीमावर्ती इलाकों में स्थित तापीय विद्युत संयंत्रों के संचालन के आधार स्तंभ कहे जाने वाले रिहंद डैम का जलस्तर चेतावनी बिंदु तक पहुंच गया है। इसके बाद भी बिहार को पानी देने के लिए यूपी व बिहार प्रांतों के मध्य हुए समझौते के अनुपालन में रिहंद हाइड्रो के टरबाइनों को चलाया जा रहा है। इससे डैम का पानी तेजी से खिसक रहा है।
उप्र-मप्र के सीमावर्ती क्षेत्र में फैले रिहंद डैम के पानी से दोनों प्रांतों में स्थित एनटीपीसी, उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम सहित निजी क्षेत्र की परियोजनाओं से 20 हजार मेगावाट से अधिक विद्युत का उत्पादन किया जाता है। डैम निर्माण का उद्देश्य ही देश के लिए अधिकाधिक विद्युत का उत्पादन करना है। यही कारण है कि डैम का 832 फीट तक का पानी तापीय परियोजनाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि पिछले पांच दशक से अधिक समय से डैम में बह रहे राख व रिहायशी इलाकों के अपशिष्टों के कारण डैम में आठ फीट तक तलहटी में राख व अपशिष्ट जमा हो गए हैं। ऐसी स्थिति में अब डैम का पानी निर्धारित बिंदु से आठ फीट अधिक 840 फीट से भी नीचे आ गया है। सोमवार को डैम का जल स्तर 839.7 फीट रहा जबकि इसी दिन यह पिछले वर्ष 840.5 फीट था।
निर्धारित बिंदु के बाद पानी का नहीं हो सकता अन्य उपयोग
डैम के तटवर्ती इलाकों में स्थित विद्युत गृहों की आवश्यकता को देखते हुए निर्माण के समय ही तय किया गया था कि डैम के 832 फीट तक के पानी का किसी तरह से उपयोग नहीं किया जा सकता। मतलब साफ है कि किसी भी स्थिति में डैम के पानी का बहाव नहीं किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि निर्माण के समय डैम का उच्चतम जल स्तर 880 फीट निर्धारित किया गया था। किंतु समय के साथ इसे 10 फीट कम करते हुए 870 फीट कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में विद्युत गृहों के लिए आरक्षित पानी का स्तर भी स्वाभाविक रूप से 10 फीट बढ़ाकर 842 फीट करने की आवश्यकता है।
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उप्र-मप्र के सीमावर्ती क्षेत्र में फैले रिहंद डैम के पानी से दोनों प्रांतों में स्थित एनटीपीसी, उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम सहित निजी क्षेत्र की परियोजनाओं से 20 हजार मेगावाट से अधिक विद्युत का उत्पादन किया जाता है। डैम निर्माण का उद्देश्य ही देश के लिए अधिकाधिक विद्युत का उत्पादन करना है। यही कारण है कि डैम का 832 फीट तक का पानी तापीय परियोजनाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि पिछले पांच दशक से अधिक समय से डैम में बह रहे राख व रिहायशी इलाकों के अपशिष्टों के कारण डैम में आठ फीट तक तलहटी में राख व अपशिष्ट जमा हो गए हैं। ऐसी स्थिति में अब डैम का पानी निर्धारित बिंदु से आठ फीट अधिक 840 फीट से भी नीचे आ गया है। सोमवार को डैम का जल स्तर 839.7 फीट रहा जबकि इसी दिन यह पिछले वर्ष 840.5 फीट था।
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निर्धारित बिंदु के बाद पानी का नहीं हो सकता अन्य उपयोग
डैम के तटवर्ती इलाकों में स्थित विद्युत गृहों की आवश्यकता को देखते हुए निर्माण के समय ही तय किया गया था कि डैम के 832 फीट तक के पानी का किसी तरह से उपयोग नहीं किया जा सकता। मतलब साफ है कि किसी भी स्थिति में डैम के पानी का बहाव नहीं किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि निर्माण के समय डैम का उच्चतम जल स्तर 880 फीट निर्धारित किया गया था। किंतु समय के साथ इसे 10 फीट कम करते हुए 870 फीट कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में विद्युत गृहों के लिए आरक्षित पानी का स्तर भी स्वाभाविक रूप से 10 फीट बढ़ाकर 842 फीट करने की आवश्यकता है।
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