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प्रभावित परिवारों को देना होगा पुनर्वास लाभ
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Sun, 29 Jan 2017 09:12 PM IST
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अनपरा परियोजना के ऐसे प्रभावित परिवार, जिसकी जमीन पचास फीसदी से कम अधिग्रहीत हुई है, उन्हें भी पूर्ण पुनर्वास लाभ देना होगा। दिनेश्वर प्रसाद सहित 51 की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया है। प्रकरण में आदेश की प्रति मिलने के चार माह के भीतर एसडीएम को राज्य उत्पादन निगम के सक्षम अधिकारी के साथ वार्ता कर निर्णय ले लेना है।
अधिवक्ता अभिषेक कुमार चौबे के मुताबिक इससे पूर्व एसडीएम और राज्य उत्पादन निगम की तरफ से 50 प्रतिशत से कम भूमि अधिग्रहण वाले परिवारों को पूर्ण पुनर्वास लाभ देने से इंकार कर दिया था।
प्रकरण में विस्थापन मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले पंकज मिश्र के विरुद्ध इसको लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर भी कराई गई थी। बाद में 26 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अपने यहां चल रहे मामले को निस्तारित कर दिया था कि जिन-जिन लोगों को पुनर्वास नीति के अनुरूप लाभ नहीं मिला है, वह हाईकोर्ट में अलग से याचिका दाखिल कर अपने लिए आदेश प्राप्त कर सकते हैं।
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इसी आधार पर माह भर पूर्व 51 लोगों की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी। अधिवक्ता अभिषेक ने बताया कि सप्ताह भर पूर्व दिए निर्णय में हाईकोर्ट ने मामले का पूर्णतया संज्ञान लेने और चार माह के भीतर राष्ट्रीय पुनर्वास नीति के अनुरूप प्रकरण का निस्तारण करते हुए, प्रभावितों को समुचित लाभ दिलाने का आदेश जारी किया है।
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अधिवक्ता अभिषेक कुमार चौबे के मुताबिक इससे पूर्व एसडीएम और राज्य उत्पादन निगम की तरफ से 50 प्रतिशत से कम भूमि अधिग्रहण वाले परिवारों को पूर्ण पुनर्वास लाभ देने से इंकार कर दिया था।
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प्रकरण में विस्थापन मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले पंकज मिश्र के विरुद्ध इसको लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर भी कराई गई थी। बाद में 26 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अपने यहां चल रहे मामले को निस्तारित कर दिया था कि जिन-जिन लोगों को पुनर्वास नीति के अनुरूप लाभ नहीं मिला है, वह हाईकोर्ट में अलग से याचिका दाखिल कर अपने लिए आदेश प्राप्त कर सकते हैं।
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इसी आधार पर माह भर पूर्व 51 लोगों की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी। अधिवक्ता अभिषेक ने बताया कि सप्ताह भर पूर्व दिए निर्णय में हाईकोर्ट ने मामले का पूर्णतया संज्ञान लेने और चार माह के भीतर राष्ट्रीय पुनर्वास नीति के अनुरूप प्रकरण का निस्तारण करते हुए, प्रभावितों को समुचित लाभ दिलाने का आदेश जारी किया है।