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अनपरा सहित 15 अति प्रदूषित क्षेत्रों की जानी गई स्थिति

Wed, 16 Sep 2020 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2020 10:45 PM IST
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Reduction in air pollution in the district than before
सोनभद्र। जिले में पहले की अपेक्षा वायु प्रदूषण में कमी आई है। यह बात बुधवार को प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यावरण सुधीर गर्ग की वर्चुअल मिटिंग के दौरान सामने आई। उन्होंने अन्य प्रदूषित क्षेत्रों के साथ सोनभद्र के स्थिति की समीक्षा की। 2019-2020 के ऑनलाइन डाटा के आधार पर बताया गया कि एयर क्लीन प्रोग्राम के बाद से हालात सुधरे हैं। 2019 में जिले में औसतन 187 रहने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक़ 173 आ गया।
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वर्चुअल मीटिंग में अनपरा परिक्षेत्र (ऊर्जांचल) के हालात की चर्चा हुई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एकत्रित आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि 2019 में जहां सोनभद्र के प्रदूषित क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक का वार्षिक औसत 187 था। वह 2020 में घटकर 173 पर आ गया। लॉकडाउन में इसे और कम होने की उम्मीद जताई गई। औद्योगिक और कोयला खनन परिक्षेत्र होने के नाते जिले के हालात पर लगातार निगरानी बनाए रखने और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन के लिए सख्ती बरतने का निर्देश दिया गया। इसी तरह लखनऊ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, नोएडा, खुर्जा, फिरोजाबाद, गजरौला, झांसी, मुरादाबाद, रायबरेली, बरेली, मेरठ की चर्चा की गई। यहां पाए गए वायु प्रदूषण की स्थिति पर झांसी, रायबरेली के अलावा अन्य जगहों से जिले की स्थिति बेहतर मिली।
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इस मीटिंग में जिले के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी इं. राधेश्याम ने भाग लिया। बताया कि प्रमुख सचिव ने जिले के स्थिति, खासकर अनपरा परिक्षेत्र के हालात की जानकारी लेने के साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी बनाए रखने और मानकों के पालन को लेकर सख्ती बनाए रखने का निर्देश दिया है। लॉकडाउन की तरह ही आगे चलकर भी जिले की स्थिति बेहतर बनी रहे, इसका प्रयास जारी है।
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इनसेट
प्रदूषण के मामले में इन वजहों से सोनभद्र संवेदनशील
सोनभद्र। जिला और सीमा से सटे मध्यप्रदेश के सिंगरौली में 21 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाले बिजलीघर स्थापित होने, इसके लिए इन परियोजनाओं में रोजाना सवा तीन लाख टन कोयला जलाने के कारण प्रदूषण के लिहाज से सोनभद्र का आधे से अधिक भूभाग बेहद संवेदनशील है। यहां दस कोल परियोजनाओं से रोजाना लाखों टन कोयले के उत्पादन-परिवहन को भी प्रदूषण की मुख्य वजह माना जाता है। सड़क मार्ग से असुरक्षित तरीके से कोयला परिवहन हालात को और गंभीर बना देेता है। बिजली घरों से निकलने वाली राख के पूरी तरह सुरक्षित निस्तारण न होने से यहां की हवा के साथ मिट्टी-पानी में भी प्रदूषण, यहां के निवासियों की जिंदगी में जहर घोलने में लगा हुआ है।
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