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जीएम आफिस पर संविदा कर्मियों का प्रदर्शन, ईएल, सीएल व ग्रेच्युटी को लेकर किया हंगामा
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एनसीएल खड़िया की आउटसोर्सिंग कंपनी में कार्यरत कर्मियों ने महाप्रबंधक कार्यालय पर मंगलवार को प्रदर्शन के साथ जमकर हंगामा किया। इस दौरान व्यवस्था बनाने में सुरक्षा कर्मियों को खूब पसीना बहाना पड़ा। श्रमिकों के मुद्दे पर जीएम व पूर्व विधायक के बीच हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। तय हुआ कि इसी सप्ताह दूसरे दौर की वार्ता की जाएगी।
कोयला निकासी के निमित्त खदान क्षेत्र से अधिभार (ओबी) हटाने में लगी बीजीआर इंफ्रा कंपनी में लगभग आठ सौ कर्मचारी संविदा आधार पर नियोजित हैं। कंपनी करीब पांच साल से कार्य कर रही है। कुछ माह का कार्य शेष है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनको नियम मुताबिक ईएल व सीएल, डबल संडे, ग्रेच्युटी का पैसा नहीं दिया जा रहा है। इसमें 26 दिन कार्य के बदले तीस दिन का पैसा भी शामिल है। कांट्रैक्ट की शर्तों मुताबिक लाभ नहीं मिलने पर पत्र के जरिए मुख्य नियोजक (एनसीएल) को अवगत कराया गया लेकिन अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। इसी के बाद आंदोलन का रास्ता इख्तियार करना पड़ा। मजदूरों के समर्थन में पहुंची पूर्व विधायक रूबी प्रसाद ने सभी की बात सुनी। इसके बाद कंपनी व एनसीएल अधिकारियों से बात की। इस वार्ता में निजी कंपनी का कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं हुआ। इसके चलते मजदूरों में रोष बढ़ गया। रूबी प्रसाद ने कुछ मजदूरों के साथ जीएम से मिलने की इच्छा जताई। इस पर भी काफी देर तक विवाद कायम रहा। बाद में जीएम से मिलकर रूबी प्रसाद व पांच मजदूर प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। जीएम राजीव कुमार ने भरोसा दिलाया कि कांट्रैक्ट शर्तों के मुताबिक सभी को लाभ दिलाया जाएगा। उनका कहना था कि नियमों का अध्ययन करने के बाद संबंधितों को निर्देश दिया जाएगा। इस बीच इसी सप्ताह निजी कंपनी प्रबंधन व मजदूरों के बीच वार्ता कराकर समस्या का हल निकालने की कोशिश होगी। इसके बाद सुबह से जमे मजदूर जीएम कार्यालय से हटे। इस दौरान प्रमुख रूप से मुकेश सिंह, आनंद पटेल, रजनीश सिंह, मोहन कुमार, जहीर खान, नंद किशोर आदि मौजूद रहे।
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कोयला निकासी के निमित्त खदान क्षेत्र से अधिभार (ओबी) हटाने में लगी बीजीआर इंफ्रा कंपनी में लगभग आठ सौ कर्मचारी संविदा आधार पर नियोजित हैं। कंपनी करीब पांच साल से कार्य कर रही है। कुछ माह का कार्य शेष है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनको नियम मुताबिक ईएल व सीएल, डबल संडे, ग्रेच्युटी का पैसा नहीं दिया जा रहा है। इसमें 26 दिन कार्य के बदले तीस दिन का पैसा भी शामिल है। कांट्रैक्ट की शर्तों मुताबिक लाभ नहीं मिलने पर पत्र के जरिए मुख्य नियोजक (एनसीएल) को अवगत कराया गया लेकिन अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। इसी के बाद आंदोलन का रास्ता इख्तियार करना पड़ा। मजदूरों के समर्थन में पहुंची पूर्व विधायक रूबी प्रसाद ने सभी की बात सुनी। इसके बाद कंपनी व एनसीएल अधिकारियों से बात की। इस वार्ता में निजी कंपनी का कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं हुआ। इसके चलते मजदूरों में रोष बढ़ गया। रूबी प्रसाद ने कुछ मजदूरों के साथ जीएम से मिलने की इच्छा जताई। इस पर भी काफी देर तक विवाद कायम रहा। बाद में जीएम से मिलकर रूबी प्रसाद व पांच मजदूर प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। जीएम राजीव कुमार ने भरोसा दिलाया कि कांट्रैक्ट शर्तों के मुताबिक सभी को लाभ दिलाया जाएगा। उनका कहना था कि नियमों का अध्ययन करने के बाद संबंधितों को निर्देश दिया जाएगा। इस बीच इसी सप्ताह निजी कंपनी प्रबंधन व मजदूरों के बीच वार्ता कराकर समस्या का हल निकालने की कोशिश होगी। इसके बाद सुबह से जमे मजदूर जीएम कार्यालय से हटे। इस दौरान प्रमुख रूप से मुकेश सिंह, आनंद पटेल, रजनीश सिंह, मोहन कुमार, जहीर खान, नंद किशोर आदि मौजूद रहे।
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