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परियोजनाओं पर लगाई गई करोड़ों की क्षतिपूर्ति पर रोक

Tue, 01 Feb 2022 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 11:36 PM IST
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Prohibition on compensation of crores imposed on projects
ऊर्जांचल स्थित विद्युत व कोल परियोजनाओं पर लगाई गई करोड़ों की क्षतिपूर्ति पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। नए आदेश के तहत स्थलीय निरीक्षण कर ज्वाइंट कमेटी नए सिरे से क्षतिपूर्ति का निर्धारण करेगी। औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट निस्तारण में अनदेखी मामले की सुनवाई कर रही नेशनल ग्रीन टिब्यूनल ने अभिकरण में सौंपे गए विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर यह आदेश जारी किया है।
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औद्योगिक इकाइयों के पर्यावरण संबंधी मानकों के अनुपालन और उनकी गतिविधियों के आंकलन के लिए एनजीटी ने ओवरसाइट कमेटी का गठन किया है। इसके साथ ही वस्तुस्थिति के स्थलीय निरीक्षण के लिए ओवरसाइट कमेटी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व जिला प्रशासन की ज्वाइंट कमेटी का भी गठन किया गया है। सोनभद्र के क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. टीएन सिंह ने बताया कि अब तक संयुक्त समिति ने पांच बार स्थलीय निरीक्षण कर कमियों के सापेक्ष इकाइयों पर जुर्माना लगाने से संबंधित रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी है। इस संबंध में सभी पहलुओं को दृष्टिगत रखते हुए एनजीटी न बीते 18 जनवरी को अंतिम आदेश जारी कर दिया है। इसके तहत ज्वाइंट कमेटी को एक बार फिर से संयुक्त निरीक्षण कर परियोजनाओं की ओर से कमियों को दूर करने की दिशा में उठाए गए कदम और उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर नए सिरे से क्षतिपूर्ति का निर्धारण करना है। निरीक्षण के लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
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ऐश यूटीलाइजेशन पर मिशन का गठन
18 जनवरी को दिये आदेश में एनजीटी ने बिजली घरों से उत्सर्जित राख का समुचित निस्तारण सुनिश्चित कराने के लिए ‘फ्लाई ऐश मैनेजमेंट एंड यूटीलाइजेशन मिशन’ का गठन किया है। केंद्रीय कोयला, बिजली व पर्यावरण मंत्रालय के सचिव सहित यूपी व एमपी राज्य के मुख्य सचिव मिशन के सदस्य होंगे। मिशन राख निस्तारण पर नजर रखते हुए इसमें वृद्धि की संभावनाएं भी तलाशेगा।
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35 प्रतिशत तक उत्सर्जित होता है राख
विद्युत अभियंताओं के अनुसार बिजली घरों में इस्तेमाल किए जाने वाले कोयले के सापेक्ष 35 प्रतिशत राख का उत्सर्जन होता है। इस प्रकार यदि अनपरा परियोजना में प्रतिदिन होने वाले 42 हजार एमटी व लैंको में 18 हजार एमटी कोयले की खपत से ही प्रतिदिन लगभग 20 हजार एमटी राख इन दोनों परियोजनाओं से उत्सर्जित हो रही है। वर्तमान में फ्लाई ऐश का समुचित निस्तारण विद्युत गृहों के लिए गंभीर चुनौती है। तमाम कवायदों के बाद भी राख निस्तारण में परियोजनाएं निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे हैं।
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