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उत्पादन पर ली गई तीसरी इकाई
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Sun, 29 Jan 2017 09:12 PM IST
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अनपरा में थर्मल बैकिंग रविवार की दोपहर बाद रोक दी गई। इसके बाद डेढ़ बजे के करीब अनपरा परियोजना की 210 मेगावाट वाली तीसरी इकाई उत्पादन पर ले ली गई। वहीं पांच सौ मेगावाट वाली सातवीं इकाई को तीन दिन के लिए अनुरक्षण पर ले लिया गया है। महज तीन दिन में राज्य सेक्टर में 54 सौ मेगावाट से अधिक हुई थर्मल बैकिंग के चलते राज्य उत्पादन निगम को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है।
तीन दिन पूर्व बिजली की खपत में अचानक से तेजी से आई कमी के बाद शुक्रवार को 2400 मेगावाट, शनिवार और रविवार को 1500-1500 मेगावाट से अधिक थर्मल बैकिंग (उत्पादन घटवाया) करवाई गई। बताते चलें कि शक्ति भवन स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर से बिजली की मांग-उपलब्धता के आधार पर बिजली परियोजनाओं में थर्मल बैकिंग करवाई जाती है। क्षमता से कम उत्पादन पर इकाइयों को संचालित करने से जहां बिजली की लागत और ट्रिपिंग का खतरा बढ़ जाता है। वहीं घटाए गए उत्पादन का कोई भुगतान भी नहीं मिल पाता है। जिससे उतनी बिजली का निगम को नुकसान सहना पड़ता है। राज्य सेक्टर के सभी परियोजनाओं के टैरिफ के औसत पर ध्यान दें तो उत्पादित की जाने वाली प्रति यूनिट (एक मेगावाट में सौ यूनिट) बिजली की कीमत चार से पांच रुपये आती है।
इस हिसाब से महज तीन दिन में राज्य उत्पादन निगम को लाखों का नुकसान सहना पड़ा है। राज्य उत्पादन निगम के तकनीकी निदेशक वीएस तिवारी का कहना है कि खपत कम होने पर उत्पादन घटाना मजबूरी है। चूंकि इस बार काफी अधिक बैकिंग हुई, इसलिए नुकसान भी अच्छा-खासा हुआ। सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि तीसरी इकाई को उत्पादन पर ले लिया गया है। सातवीं को भी तीन दिन बाद उत्पादन पर ले लिया जाएगा।
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तीन दिन पूर्व बिजली की खपत में अचानक से तेजी से आई कमी के बाद शुक्रवार को 2400 मेगावाट, शनिवार और रविवार को 1500-1500 मेगावाट से अधिक थर्मल बैकिंग (उत्पादन घटवाया) करवाई गई। बताते चलें कि शक्ति भवन स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर से बिजली की मांग-उपलब्धता के आधार पर बिजली परियोजनाओं में थर्मल बैकिंग करवाई जाती है। क्षमता से कम उत्पादन पर इकाइयों को संचालित करने से जहां बिजली की लागत और ट्रिपिंग का खतरा बढ़ जाता है। वहीं घटाए गए उत्पादन का कोई भुगतान भी नहीं मिल पाता है। जिससे उतनी बिजली का निगम को नुकसान सहना पड़ता है। राज्य सेक्टर के सभी परियोजनाओं के टैरिफ के औसत पर ध्यान दें तो उत्पादित की जाने वाली प्रति यूनिट (एक मेगावाट में सौ यूनिट) बिजली की कीमत चार से पांच रुपये आती है।
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इस हिसाब से महज तीन दिन में राज्य उत्पादन निगम को लाखों का नुकसान सहना पड़ा है। राज्य उत्पादन निगम के तकनीकी निदेशक वीएस तिवारी का कहना है कि खपत कम होने पर उत्पादन घटाना मजबूरी है। चूंकि इस बार काफी अधिक बैकिंग हुई, इसलिए नुकसान भी अच्छा-खासा हुआ। सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि तीसरी इकाई को उत्पादन पर ले लिया गया है। सातवीं को भी तीन दिन बाद उत्पादन पर ले लिया जाएगा।
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