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Sonebhadra News: लापता 33 चिकित्सकों के खिलाफ आरोप पत्र के बाद भी खाली घोषित नहीं हुए पद
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जिले के विभिन्न अस्पतालों से वर्षों से लापता 33 चिकित्सकों के स्थान पर नई तैनाती नहीं हो सकी है। उनके विरुद्ध आरोप पत्र तय होने के बाद भी पद खाली नहीं हुए हैं। इसके नई तैनाती नहीं हो रहा। खामियाजा आमजन भुगत रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के अधीन 10 सीएचसी और 40 से अधिक पीएचसी में कुल स्वीकृत 155 चिकित्सकों के सापेक्ष 123 की तैनाती है। शेष 32 पद रिक्त हैं। इनमें चार चिकित्सक पीजी करने गए हैं। इससे इतर 33 चिकित्सक वर्षों से लापता हैं।
कोई पीजी करने के लिए गया, मगर नहीं लौटा तो कोई अपना अस्पताल चला रहा है। विभाग की ओर से अधिकांश चिकित्सकों के विरुद्ध आरोप पत्र तय किया जा चुका है। फिर भी उनके पद रिक्त घोषित नहीं हुए हैं।
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नतीजा नई तैनाती भी नहीं हो पा रही। इससे विभागीय रिकॉर्ड में यह पद अब भी भरे हुए हैं, जबकि वह ड्यूटी नहीं कर रहे। पूरे जिले के अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती का मानक बेपटरी हो गया है। कई सीएचसी और पीएचसी रेफरल सेंटर की तरह काम कर रहे हैं।
इस तरह मौजूदा समय में सिर्फ 155 के सापेक्ष 85 डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं। नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल 13 पद के सापेक्ष तीन की ही तैनाती है। बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, सात से अधिक सर्जन सहित अन्य पद भी रिक्त हैं।
इससे सामान्य प्रसव तो अनेक अव्यवस्थाओं के बाद हो जाता है लेकिन सीजर के लिए जिला मुख्यालय जाना ही मजबूरी होती है। कई बार छोटे ऑपरेशन के लिए भी मरीज को रेफर कर दिया जाता है। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। दूरी की वजह से कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
18 में 11 आए उनमें से भी कइयों ने छोड़ा काम
जिले के दुरूह इलाकों में आरबीएसके के तहत विभिन्न कार्यक्रमों में तैनाती के उद्देश्य से कुछ माह पूर्व 18 चिकित्सकों का चयन किया था। महज 11 ने ही कार्यभार ग्रहण किया। इसमें भी कई छोड़ चुके हैं। इस समय आरबीएसके के कार्यक्रमों में 15 चिकित्सक तैनात हैं, जबकि विभाग की ओर से एनएचएम के तहत 16 चिकित्सकों के पदों को भरने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं।
यह चिकित्सक हैं लापता
पीएचसी सतबहनी से अभिषेक कुमार, परसौना से धनंजय कुमार, लोझरा दिनेश कुमार, विढ़मगंज धर्मेंद्र मिश्रा, सीएचसी शाहगंज से अनुपम सिंह, बभनी से ज्योति सिंह, जितेंद्र सिंह, ज्ञान प्रकाश वर्मा, घोरावल से गौरव सिंह, चोपन से मिशा पांडेय, तौसिफ आलम सहित अन्य चिकित्सक शामिल हैं।
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मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के अधीन 10 सीएचसी और 40 से अधिक पीएचसी में कुल स्वीकृत 155 चिकित्सकों के सापेक्ष 123 की तैनाती है। शेष 32 पद रिक्त हैं। इनमें चार चिकित्सक पीजी करने गए हैं। इससे इतर 33 चिकित्सक वर्षों से लापता हैं।
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कोई पीजी करने के लिए गया, मगर नहीं लौटा तो कोई अपना अस्पताल चला रहा है। विभाग की ओर से अधिकांश चिकित्सकों के विरुद्ध आरोप पत्र तय किया जा चुका है। फिर भी उनके पद रिक्त घोषित नहीं हुए हैं।
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नतीजा नई तैनाती भी नहीं हो पा रही। इससे विभागीय रिकॉर्ड में यह पद अब भी भरे हुए हैं, जबकि वह ड्यूटी नहीं कर रहे। पूरे जिले के अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती का मानक बेपटरी हो गया है। कई सीएचसी और पीएचसी रेफरल सेंटर की तरह काम कर रहे हैं।
इस तरह मौजूदा समय में सिर्फ 155 के सापेक्ष 85 डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं। नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल 13 पद के सापेक्ष तीन की ही तैनाती है। बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, सात से अधिक सर्जन सहित अन्य पद भी रिक्त हैं।
इससे सामान्य प्रसव तो अनेक अव्यवस्थाओं के बाद हो जाता है लेकिन सीजर के लिए जिला मुख्यालय जाना ही मजबूरी होती है। कई बार छोटे ऑपरेशन के लिए भी मरीज को रेफर कर दिया जाता है। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। दूरी की वजह से कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
18 में 11 आए उनमें से भी कइयों ने छोड़ा काम
जिले के दुरूह इलाकों में आरबीएसके के तहत विभिन्न कार्यक्रमों में तैनाती के उद्देश्य से कुछ माह पूर्व 18 चिकित्सकों का चयन किया था। महज 11 ने ही कार्यभार ग्रहण किया। इसमें भी कई छोड़ चुके हैं। इस समय आरबीएसके के कार्यक्रमों में 15 चिकित्सक तैनात हैं, जबकि विभाग की ओर से एनएचएम के तहत 16 चिकित्सकों के पदों को भरने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं।
यह चिकित्सक हैं लापता
पीएचसी सतबहनी से अभिषेक कुमार, परसौना से धनंजय कुमार, लोझरा दिनेश कुमार, विढ़मगंज धर्मेंद्र मिश्रा, सीएचसी शाहगंज से अनुपम सिंह, बभनी से ज्योति सिंह, जितेंद्र सिंह, ज्ञान प्रकाश वर्मा, घोरावल से गौरव सिंह, चोपन से मिशा पांडेय, तौसिफ आलम सहित अन्य चिकित्सक शामिल हैं।