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पुलिस की नई पहल : हेलमेट खरीदकर लाओ, रसीद दिखाओ, तब आगे जाओ
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सोनभद्र। बाइक से बिना हेलमेट फर्राटा भरने वालों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस ने नई पहल की है। अब उनका चालान नहीं कटेगा। पुलिस उन्हें रोकेगी, समझाएगी और हेलमेट खरीदवाएगी। जब तक वह खुद के लिए हेलमेट खरीद कर नहीं लाएंगे, तब उन्हें जाने नहीं दिया जाएगा। इसके साथ उन्हें यह संकल्प भी लेना होगा कि आइंदा वह बिना हेलमेट बाइक नहीं चलाएंगे। सड़क हादसों में जनहानि रोकने के लिए यह कवायद शुरू की गई है। फिलहाल इसे पन्नूगंज थाना क्षेत्र में लागू किया गया है। एक सप्ताह में 40 से अधिक लोगों को पन्नूगंज पुलिस हेलमेट खरीदवा चुकी है। जल्द ही पूरे जिले में प्रभावी होगा।
सड़क हादसों की संख्या जिले में लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 की अपेक्षा इस वर्ष हादसे लगभग दोगुने हुए हैं। सबसे ज्यादा बाइक सवार ही दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। आए दिन हो रहे हादसों की छानबीन में पाया गया कि जान गंवाने वालों में सबसे ज्यादा 18 से 30 वर्ष की आयु वाले वे युवा हैं, जो बिना हेलमेट लगाए बाइक चलाते हैं। तेज गति में होने के कारण टक्कर होते ही वह गिरते हैं और सिर में गहरी चोट मौत की वजह बनती है। अगर यातायात नियमों का पालन करते हुए वाहन चलाए जाएं और बाइक सवार हेलमेट लगाकर चलें तो हादसों में जनहानि को काफी कम किया जा सकता है।
इसी मकसद से पुलिस ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत अब चालान से ज्यादा नियमों का पालन कराने पर जोर रहेगा। चौराहों-तिराहों या अन्य प्रमुख स्थलों पर चेकिंग के दौरान बिना हेलमेट बाइक सवारों को रोका जाएगा। इनका चालान करने के बजाए हेलमेट खरीदवाने पर जोर रहेगा। हेलमेट पास होने पर वह लगाना भी शुरू करेंगे। अभी तक सिर्फ चालान कटने से वह शुल्क जमा कर मुक्ति पा जाते थे, लेकिन हेलमेट नहीं खरीदते थे। एसपी के निर्देश पर यह विशेष अभियान शुरू किया गया है।
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आईएसआई मार्का और हल्का ही रहे हेलमेट
नया हेलमेट खरीदते समय सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है। इसे सिर्फ चालान से बचने के लिए न खरीदें, बल्कि सुरक्षा के लिए लें। हेलमेट पर आईएसआई मार्क होना चाहिए। ऐसा हेलमेट चुनें, जो सिर पर फिट बैठता हो। आरामदायक और हल्का हो। फुल फेस हेलमेट ज्यादा सही होता है।
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इस साल 213 की मौत, 60 फीसदी बिना हेलमेट वाले
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जनवरी से जून तक 287 हादसों में 213 लोगों की जान गई है। इसमें 60 फीसदी घटनाओं में मौत की वजह तेज गति और हेलमेट न लगाना ही रहा है। इसी साल गणतंत्र दिवस से जिले में नो हेलमेट-नो फ्यूल अभियान शुरू किया गया था, लेकिन यह सफल नहीं हो पाया। ऐसे में पुलिस ने खुद का जिम्मा लेते हुए पहल की है।
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वर्जन...
सड़क हादसों के शिकार ज्यादातर बाइक सवार सिर में चोट लगने के कारण ही जान गंवाते हैं। अगर हेलमेट पहनकर नियंत्रित गति से चलें तो हादसों में जनहानि को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है। पन्नूगंज थाना क्षेत्र में इसे सख्ती से लागू कराया जा रहा है। -रणधीर मिश्र, सीओ सदर।
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सड़क हादसों की संख्या जिले में लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 की अपेक्षा इस वर्ष हादसे लगभग दोगुने हुए हैं। सबसे ज्यादा बाइक सवार ही दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। आए दिन हो रहे हादसों की छानबीन में पाया गया कि जान गंवाने वालों में सबसे ज्यादा 18 से 30 वर्ष की आयु वाले वे युवा हैं, जो बिना हेलमेट लगाए बाइक चलाते हैं। तेज गति में होने के कारण टक्कर होते ही वह गिरते हैं और सिर में गहरी चोट मौत की वजह बनती है। अगर यातायात नियमों का पालन करते हुए वाहन चलाए जाएं और बाइक सवार हेलमेट लगाकर चलें तो हादसों में जनहानि को काफी कम किया जा सकता है।
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इसी मकसद से पुलिस ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत अब चालान से ज्यादा नियमों का पालन कराने पर जोर रहेगा। चौराहों-तिराहों या अन्य प्रमुख स्थलों पर चेकिंग के दौरान बिना हेलमेट बाइक सवारों को रोका जाएगा। इनका चालान करने के बजाए हेलमेट खरीदवाने पर जोर रहेगा। हेलमेट पास होने पर वह लगाना भी शुरू करेंगे। अभी तक सिर्फ चालान कटने से वह शुल्क जमा कर मुक्ति पा जाते थे, लेकिन हेलमेट नहीं खरीदते थे। एसपी के निर्देश पर यह विशेष अभियान शुरू किया गया है।
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आईएसआई मार्का और हल्का ही रहे हेलमेट
नया हेलमेट खरीदते समय सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है। इसे सिर्फ चालान से बचने के लिए न खरीदें, बल्कि सुरक्षा के लिए लें। हेलमेट पर आईएसआई मार्क होना चाहिए। ऐसा हेलमेट चुनें, जो सिर पर फिट बैठता हो। आरामदायक और हल्का हो। फुल फेस हेलमेट ज्यादा सही होता है।
इस साल 213 की मौत, 60 फीसदी बिना हेलमेट वाले
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जनवरी से जून तक 287 हादसों में 213 लोगों की जान गई है। इसमें 60 फीसदी घटनाओं में मौत की वजह तेज गति और हेलमेट न लगाना ही रहा है। इसी साल गणतंत्र दिवस से जिले में नो हेलमेट-नो फ्यूल अभियान शुरू किया गया था, लेकिन यह सफल नहीं हो पाया। ऐसे में पुलिस ने खुद का जिम्मा लेते हुए पहल की है।
वर्जन...
सड़क हादसों के शिकार ज्यादातर बाइक सवार सिर में चोट लगने के कारण ही जान गंवाते हैं। अगर हेलमेट पहनकर नियंत्रित गति से चलें तो हादसों में जनहानि को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है। पन्नूगंज थाना क्षेत्र में इसे सख्ती से लागू कराया जा रहा है। -रणधीर मिश्र, सीओ सदर।