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फुलवारी से होगी कुपोषण मिटाने की कोशिश

Thu, 24 Dec 2020 11:35 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Dec 2020 11:35 PM IST
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Phulwari will try to eradicate malnutrition
शक्तिनगर। भारत सरकार की मिनीरत्न कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटिड सीएसआर के तहत आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में चितरंगी जनपद पंचायत के अन्तर्गत बगैया गांव में बृहस्पतिवार को प्रोजेक्ट फुलवारी का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव डॉ. पल्लवी जैन, उपनिदेशक बाल स्वास्थ्य और पोषण, डॉ. राजीव श्रीवास्तव, कलेक्टर सिंगरौली राजीव रंजन मीणा, चितरंगी के विधायक अमर सिंह, एनसीएल सीएसआर विभाग के मुख्य प्रबंधक मो. परवेज, जन स्वास्थ्य सहयोग के सचिव डॉ. रमन कटारिया वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे। साथ ही एनसीएल ब्लॉक बी की सीएसआर नोडल अधिकारी पारुल यादव, जनपद सीईओ सुलभ सिंह पुषाम, जनस्वास्थ्य सहयोग के डॉ. पंकज, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व अन्य ग्रामीण कार्यक्रम में उपस्थित रहे। प्रोजेक्ट फुलवारी के माध्यम से एनसीएल चितरंगी के 75 गांव में छह महीने से तीन वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की समस्याओं को दूर करने के लिए कार्य करेगी। फुलवारी एक ग्रामीण क्रेच है जो गाँव की ही एक महिला द्वारा संचालित किया जाता है। क्रेच एक सप्ताह में छह दिनों तक सात घंटे के लिए संचालित होता है। यहाँ बच्चों को पौष्टिक भोजन देने के साथ ही शैक्षिक गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं। फुलवारी कार्यक्रम की मदद से माताएं अपने बच्चों को केंद्र में छोड़कर अपनी आजीविका कमाने के लिए काम पर जा सकती हैं। प्रोजेक्ट फुलवारी के तहत कुल 75 गाँव कवर किये जाएंगे 7 प्रथम चरण में यह कार्य 25 गांव में प्रारंभ किया गया है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत एनसीएल ब्लॉक बी ने सीएसआर के तहत कुल 128 लाख के फंड का प्रावधान किया है। प्रोजेक्ट फुलवारी एक गैर सरकारी संगठन जन स्वास्थ्य सहयोग (जेएसएस) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा जिसकी शुरुआत एम्स, दिल्ली में प्रशिक्षित डॉक्टरों के समूह द्वारा की गई थी। यह संगठन पिछले 20 वर्षों से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदायों के साथ काम कर रहा है। प्रोजेक्ट फुलवारी को सामाजिक निगमित दायित्व के अंतर्गत नॉदर्न कोलफील्ड लिमिटेड और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ,भोपाल की मदद से संचालित किया जाएगा। गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से ग्रामीण बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया जाएगा और साथ ही उन बच्चों को भी वापस शिक्षा से जोड़ा जा सकेगा जो माँ की अनुपस्थिति में भाई-बहनों की देख रेख करते हैं।
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