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प्रदूषण से जूझ रहे सिंगरौली-सोनभद्र क्षेत्र के लोग

Tue, 10 Nov 2020 11:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Nov 2020 11:45 PM IST
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People of Singrauli-Sonbhadra region struggling with pollution
औड़ी शक्तिनगर मार्ग फोरलेन निर्माणाधीन सड़क पर उड़ती धूल - फोटो : SONBHADRA
अनपरा। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए जिन सोलह जिलों को हॉटस्पाट घोषित किया है उसमें सोनभद्र (अनपरा) भी शामिल है। बोर्ड ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए 11 से 16 नवंबर तक वाहन प्रतिबंधित करने के अलावा अन्य उपाय करने की बात कही गई है लेकिन कोयला लदे ट्रक दौड़ते नजर आए । हालांकि बोर्ड ने सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव करने का निर्देश संबंधित परियोजनाओं दिया है लेकिन यहां सड़कों लगातार पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। स्थिति यह है कि हवा धूल के सूक्ष्म कणों से लोगों का सांस लेने में परेशानी हो रही है।
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सर्दी के मौसम में प्रदूषण का ग्राफ बढ़ गया है। वायु प्रदूषण आम लोगों के साथ ही कोरोना संक्रमित लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार बना रहा। वाहन प्रतिबंधित करने के निर्देश के बाद एनसीएल की कोल परियोजनाओं से कोयला भरे ट्रक दौड़ते रहे। लोगों का कहना है कि सिंगरौली-सोनभद्र के लोग लगातार प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस पहल नहीं की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोल परियोजनाओं के लिए गाइड लाइन जारी कर दी गई, लेकिन उसका अनुपालन ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम के तहत रेणुसागर मोड़ से शक्तिनगर तक प्रतिदिन वायु प्रदूषण की जांच कर रही है। इसमें पाया गया था कि कोयला परिवहन के दौरान दिन रात धूल की धुंध बनी रहती है। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोल परिवहन करने वाले वाहनों को कोयला लदे वाहनों को ढंक कर व उनके पहियों को धोकर परिवहन की अनुमति के निर्देश दिया था।
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प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाया जाए ठोस कदम
अनपरा। क्षेत्र के व्यापारियों ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि अनपरा-शक्तिनगर मार्ग पर सड़क के आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों को प्रदूषण से सबसे अधिक जूझना पड़ रहा है।
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दुकानदार लाल बहादुर सिंह कहते हैं कि एनजीटी के आदेशों को पालन ठीक से नहीं हो रहा है। इससे प्रदूषण का ग्राफ बढ़ रहा है। चंद्रशेखर विश्वकर्मा का कहना है कि धूल से लोग तरह - तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। इसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। वसीम अहमद ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाया जाना जरूरी है। खानापूर्ति से प्रदूषण नियंत्रित नहीं होगा। अर्जुन विश्वकर्मा ने कहा कि प्रदूषण का आलम यह है कि बहुत से लोगों को अब सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी है। सुबह से लेकर शाम तक व्यवसाय हो अथवा न हो, लेकिन धूल के कारण लोग तरह-तरह की बिमारी की चपेट में जरूर आने लगे हैं।
तीन सौ के पार पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
सोनभद्र। जिले में वायु प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी इंडेक्स में मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 के पार बना रहा। शासन ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने एसडीएम के नेतृत्व में निगरानी के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोयले के ट्रकों को ढंक कर भेजने का निर्देश दिया है। इसके बाद भी मंगलवार को दिन में वायु गुणवत्ता सूचकांक 340 पर रहा। हालांकि शाम पांच बजे के करीब यह ग्राफ गिरकर 305 पर पहुंच गया। बीते रविवार को सिगरौली-सोनभद्र क्षेत्र में एक्यूआई 335 और शनिवार को 327 था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी इसका कारण मौसम में हो रहे परिवर्तन को मान रहे हैं।

सड़क निर्माण कराने वाली संस्थाओं और एनसीएल की खनन परियोजनाओं को प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माणाधीन सड़कों पर पानी का छिड़काव कराने तथा कोयला लदे वाहनों को ढंक कर भेजने के लिए पत्र लिखा गया है। जल्द ही जिला पर्यावरण समिति की बैठक बुलाई जाएगी। इसमें प्रदूषण पर नियंत्रण पर विचार किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी को को अनपरा-शक्तिनगर मार्ग पर चल रहे सड़क निर्माण के दौरान पानी का छिड़काव कराने के लिए अधिशासी अभियंता को पत्र भी लिखा गया है। - राधेश्याम, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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