सड़क किनारे 'मौत' खड़ी: स्टेट हाईवे पर 12 किमी में 45 सूखे पेड़, तेज हवा चलने पर घर में भाग जाते हैं लोग
सोनभद्र जिले में रॉबर्ट्सगंज से शाहगंज के बीच 12 किमी में 45 से अधिक सूखे पेड़ खड़े हैं। इन पेड़ों के गिरने के डर से तेज हवा चलने पर लोग घर में भाग जाते हैं।
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सोनभद्र जिले के घोरावल-रॉबर्ट्सगंज मार्ग को स्टेट हाईवे घोषित हुए सात साल बीत गए। इस बीच कई बार सड़क की मरम्मत हुई। सड़क पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। बावजूद सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ नहीं हटाए जा सके हैं। सिर्फ रॉबर्ट्सगंज से शाहगंज के बीच 12 किमी में 45 से अधिक सूखे पेड़ खड़े हैं। तेज हवा और बारिश में खतरे की आशंका रहती है। लोग भयभीत रहते हैं। डर के कारण वह तेज हवा चलने पर घर में भाग जाते हैं।
ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की बावजूद पीडब्ल्यूडी और वन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। पिछले साल इसी मार्ग पर सूखा पेड़ गिरने से बाइक सवार महिला की मौत भी हो चुकी है। नगर पालिका परिषद (रॉबर्ट्सगंज) सोनभद्र के विस्तारित क्षेत्र कम्हारी से ही सूखे पेड़ों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
घोरावल बस स्टैंड से आगे और पेट्रोल पंप से पहले कई पेड़ सूखे पड़े हैं। रिहायशी इलाके में सूखा पेड़ खड़ा होने की वजह से खतरा बना रहता है। यहां सड़क किनारे एक ही स्थान पर पांच पेड़ पूरी तरह सूख चुके हैं। इससे आगे बढ़ने पर जैत गांव के पास और कैथी के पास पेड़ सूखे पड़े हैं। कैथी के रहने वाले पीयूष चौबे और गोविंद के घर के सामने एक ही स्थान पर यूके लिप्टस के 9 सूखे पेड़ खड़े हैं।
इसके अलावा सलैया, गौरीशंकर मंदिर के पास और ढूटेर गांव के आसपास 9-10 की संख्या में पेड़ सूखे पड़े हैं। इसके आगे भी सूखे पेड़ हैं। शाहगंज से घोरावल के बीच भी बड़ी संख्या में पेड़ सूखे पड़े हैं। स्टेट हाईवे का चौड़ीकरण कार्य भी चल रहा है। सात मीटर चौड़े मार्ग को स्टेट हाईवे के मानक के अनुसार 10 मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है। बावजूद सूखे पेड़ों पर किसी जिम्मेदार का ध्यान नहीं है। हाईवे पर दिन-रात बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन होता रहता है।
रामगढ़-खलियारी मार्ग पर भी खतरा
रॉबर्ट्सगंज से दूसरी तरफ रामगढ़ होते हुए खलियारी तक जाने वाले मार्ग पर भी बड़ी संख्या में सूखे पेड़ हैं। बेलखुरी मोड़ के पास, चतरा, पुरना, तियरा के पास सड़क किनारे कई पेड़ सूखे पड़े हैं। कई हरे पेड़ों की डालियां भी सड़क की ओर झुकी हुई हैं। बीते गर्मी में तेज आंधी के दौरान सजौर-बिजौली, लसड़ा, मरकरी पास में कई पेड़ गिर गए थे। इससे मार्ग पर एक से डेढ़ घंटे आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया था और बिजली के कई खंभे जमींदोज हो गए थे। कर्मचारियों की तरफ से रात में पेड़ों को हटाया गया, तब जाकर आवागमन शुरू हुआ था। ऐसे में स्टेट हाईवे का सर्वे कराकर सूखे और खतरनाक पेड़ों को चिह्नित करने और कटाई-छंटाई की जरूरत है।
घर के सामने पेड़ सूखा है। सूखे पेड़ को हटाने के लिए एक साल में पांच बार सूचना अधिकारियों को दी जा चुकी है। मगर अभी तक सूखे पेड़ को नहीं हटाया जा सका है। इससे आंधी में पेड़ गिरने से हादसे का डर बना रहता है। -विनोद सिंह, बनौरा
गांव के ही पीयूष चौबे के मकान में दुकान चलाते हैं। दुकान और पड़ोसी गोविंद के घर के सामने 9 पेड़ पूरी तरह से सूखे पड़े हैं। कटाई नहीं होने से हादसे का डर रहता है। -लालधारी, कैथी
पंवर मोड़ के पास में स्टेट हाईवे के किनारे मकान है। कुछ कमरे किराए पर भी दिए हैं। मकान के सामने दो पेड़ सूखे हैं। जबकि एक पेड़ दूसरी पटरी पर सूखा है। लोगों के गिरने का डर बना रहता है। -जितेंद्र पटेल, पंवर
सड़क किनारे पेड़ सूखे हैं, मगर कितने सूखे हैं, इसका आइडिया नहीं है। यह बात संज्ञान में आया है। जल्द ही सर्वे कराते हुए कटाई के लिए वन विभाग को पत्र लिखा जाएगा। -प्रीती पटेल, सहायक अभियंता-पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड
सूखे पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति लेनी होती है, मगर अभी तक पीडब्ल्यूडी की तरफ से इस तरह की अनुमति नहीं ली गई है। एक सूखे पेड़ काटने के एवज में 10 पेड़ लगाने होते हैं, यह नियम है। -आशुतोष जायसवाल, डीएफओ-सोनभद्र वन प्रभाग