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मात्र 17054 टन धान की खरीद
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Tue, 22 Dec 2015 10:22 PM IST
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प्रशासनिक उदासीनता के चलते धान क्रय करने के लिए बनाए गए 56 केंद्रों में से एक भी केेंद्र पर ठंड से किसानों को बचाने के लिए अलाव की व्यवस्था नहीं हैै। केंद्रों पर पेयजल, रोशनी, अलाव, टेंट आदि की व्यवस्था न होने से नाराज किसान औने-पौने दाम पर बाजारों में धान बेचना शुरू कर दिए हैं।
किसानों के शिकायत करने के बाद भी संबंधित अधिकारी उनकी समस्याएं दूर नहीं कर रहे हैं। इस नाते अब तक मात्र 17054 टन धान की खरीद हुई है।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिले में एक नवंबर से धान खरीद शुरू है, जो 28 फरवरी तक चलेगा। धन क्रय करने के लिए 52 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें पीसीएफ के 41, एफसीआई के दो, मार्केटिंग के सात और नेफेड के दो केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा 40 कमीशन एजेंट भी बनाए गए हैं। वर्ष 2015-16 में जिले में धान खरीद का लक्ष्य 52700 टन है, जिसमें 22 दिसंबर तक 17054 टन ही धान खरीदा गया है। धान खरीद कम होने की मुख्य वजह क्रय केंद्रों पर किसानों को सुविधाएं न मिलना माना जा रहा है। मानपुर गांव निवासी किसान विवेक सिंह और मुठेर गांव निवासी सुशील चौबे का कहना है कि क्रय केंद्रों पर किसानों को ठंड से बचने के लिए अलाव तक की व्यवस्था नहीं है।
हरिहरपुर के रहने वाले रामबहाल मिश्रा और ढुटेर के किसान कमलेश का कहते है कि प्रदेश सरकार की ओर से क्रय केंद्रों पर शुद्ध पेयजल, रोशनी, अलाव, टेंट आदि की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारी सरकारी धन का बंदरबाट कर जा रहे हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जिला विपणन अधिकारी महेश श्रीवास्तव का कहना है कि क्रय केंद्रों पर नियमानुसार किसानों का धान खरीदा जा रहा है। शासन के निर्देशानुसार किसानों को सुवधिाएं भी मुहैया कराई जा रही है।
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किसानों के शिकायत करने के बाद भी संबंधित अधिकारी उनकी समस्याएं दूर नहीं कर रहे हैं। इस नाते अब तक मात्र 17054 टन धान की खरीद हुई है।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिले में एक नवंबर से धान खरीद शुरू है, जो 28 फरवरी तक चलेगा। धन क्रय करने के लिए 52 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें पीसीएफ के 41, एफसीआई के दो, मार्केटिंग के सात और नेफेड के दो केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा 40 कमीशन एजेंट भी बनाए गए हैं। वर्ष 2015-16 में जिले में धान खरीद का लक्ष्य 52700 टन है, जिसमें 22 दिसंबर तक 17054 टन ही धान खरीदा गया है। धान खरीद कम होने की मुख्य वजह क्रय केंद्रों पर किसानों को सुविधाएं न मिलना माना जा रहा है। मानपुर गांव निवासी किसान विवेक सिंह और मुठेर गांव निवासी सुशील चौबे का कहना है कि क्रय केंद्रों पर किसानों को ठंड से बचने के लिए अलाव तक की व्यवस्था नहीं है।
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हरिहरपुर के रहने वाले रामबहाल मिश्रा और ढुटेर के किसान कमलेश का कहते है कि प्रदेश सरकार की ओर से क्रय केंद्रों पर शुद्ध पेयजल, रोशनी, अलाव, टेंट आदि की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारी सरकारी धन का बंदरबाट कर जा रहे हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जिला विपणन अधिकारी महेश श्रीवास्तव का कहना है कि क्रय केंद्रों पर नियमानुसार किसानों का धान खरीदा जा रहा है। शासन के निर्देशानुसार किसानों को सुवधिाएं भी मुहैया कराई जा रही है।
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