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ललितपुर की भी एक इकाई हुई बंद
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अनपरा। कोयला संकट के कारण बंद होने वाली इकाइयों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। कोयले के अभाव में बजाज एनर्जी ललितपुर की 660 मेगावाट की दूसरी इकाई को शुक्रवार शाम को बंद करना पड़ा। दूसरी तरफ बिजली की बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने बिजली आयात का सहारा लिया है। केंद्रीय पूल व अन्य स्रोतों से दो हजार मेगावाट बिजली खरीदने के बाद भी प्रदेश के कई इलाकों में धुंआधार विद्युत कटौती की गई। शनिवार सुबह प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 19128 मेगावाट दर्ज की गई।
रिहंद जल विद्युत के पांच टरबाइन से ही हो रहा उत्पादन
अनपरा। तकनीकी कारणों से तापीय परियोजनाओं में कोयला संकट के दौर में भी रिहंद जल विद्युत की पांच टरबाइन से विद्युत उत्पादन संभव नहीं हो पा रहा है। जल विद्युत प्रबंधन के अनुसार ओबरा व रिहंद जल विद्युत की संरचना ऐसी है कि ओबरा के तीनों जल विद्युत संयंत्र के संचालित होने की स्थिति में ही रिहंद के सभी छह टरबाइनों को चलाया जा सकता है। इस समय ओबरा की एक इकाई तकनीकी कारणों से बंद है। इसलिए पीक ऑवर में भी रिहंद के पांच टरबाइन से ही उत्पादन हो पा रहा है।
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रिहंद जल विद्युत के पांच टरबाइन से ही हो रहा उत्पादन
अनपरा। तकनीकी कारणों से तापीय परियोजनाओं में कोयला संकट के दौर में भी रिहंद जल विद्युत की पांच टरबाइन से विद्युत उत्पादन संभव नहीं हो पा रहा है। जल विद्युत प्रबंधन के अनुसार ओबरा व रिहंद जल विद्युत की संरचना ऐसी है कि ओबरा के तीनों जल विद्युत संयंत्र के संचालित होने की स्थिति में ही रिहंद के सभी छह टरबाइनों को चलाया जा सकता है। इस समय ओबरा की एक इकाई तकनीकी कारणों से बंद है। इसलिए पीक ऑवर में भी रिहंद के पांच टरबाइन से ही उत्पादन हो पा रहा है।
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