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पुरानी किताबों से ही पढ़ रहे प्राइमरी के बच्चे
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Thu, 14 Apr 2016 12:07 AM IST
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किताबें
- फोटो : demo pic
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बेसिक शिक्षा विभाग ने बिना किसी तैयारी के नए शिक्षा सत्र की शुरूआत कर दी। स्कूल चलो अभियान रैली निकाली गई, बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया के साथ ही पढ़ाई शुरू कर दी गई, लेकिन अब तक परिषदीय विद्यालयों में मिलने वाली पुस्तकें पहुंची ही नहीं। करीब ढाई लाख से अधिक बच्चों के भविष्य की नींव उधार की किताबों से तैयार की जा रही है। बीएसए मनभरन राम राजभर का कहना है कि किताबें अब तक नहीं आई हैं। यह शासन का मामला है। पुरानी किताबों से ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
अप्रैल माह से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया। इस शिक्षा सत्र का कैलेंडर भी जारी कर दिया गया। ज्यादा से ज्यादा बच्चों के नामांकन के लिए विभाग ने स्कूल चलो अभियान भी चलाया और विद्यालयों मेें पढ़ाई भी शुरू करा दी। लेकिन विद्यालयों में नए शिक्षा सत्र के लिए किताबें नहीं पहुंची। पिछले साल की किताबें बच्चों से मंगाई जा रही हैं और उन्हीं किताबों से इस साल के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
इस सत्र में किताबों के पाठ्यक्रम में बदलाव होगा या फिर नहीं यह तो शासन का विषय है लेकिन शिक्षा महकमा परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई का कोरम करा रहा है। स्थिति यह है कि पढ़ाई के लिए बीएसए के निर्देश पर शिक्षकों ने अगली कक्षा में जाने वाले प्रत्येक बच्चों से पुराने किताबें मंगाई हैं। इसमें भी कक्षा पांच और कक्षा आठ की पुरानी किताबें बमुश्किल ही मिल रही हैं। वजह कि जहां सिर्फ कक्षा पांच तक के विद्यालय हैं वहां पांच के बच्चे विद्यालय छोड़ चुके हैं।
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उन्हें टीसी देने से पहले किताबें जमा करने के लिए कहा जा रहा है। फिलहाल कक्षा चार की किताबें ही पांच के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उधर बेसिक शिक्षा अधिकारी मनभरन राम राजभर का कहना है कि नए शिक्षा सत्र में किताबें विद्यालयों में नहीं पहुंच सकी हैं। शासन से छपाई होकर किताबें नहीं मिली हैं।
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अप्रैल माह से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया। इस शिक्षा सत्र का कैलेंडर भी जारी कर दिया गया। ज्यादा से ज्यादा बच्चों के नामांकन के लिए विभाग ने स्कूल चलो अभियान भी चलाया और विद्यालयों मेें पढ़ाई भी शुरू करा दी। लेकिन विद्यालयों में नए शिक्षा सत्र के लिए किताबें नहीं पहुंची। पिछले साल की किताबें बच्चों से मंगाई जा रही हैं और उन्हीं किताबों से इस साल के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
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इस सत्र में किताबों के पाठ्यक्रम में बदलाव होगा या फिर नहीं यह तो शासन का विषय है लेकिन शिक्षा महकमा परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई का कोरम करा रहा है। स्थिति यह है कि पढ़ाई के लिए बीएसए के निर्देश पर शिक्षकों ने अगली कक्षा में जाने वाले प्रत्येक बच्चों से पुराने किताबें मंगाई हैं। इसमें भी कक्षा पांच और कक्षा आठ की पुरानी किताबें बमुश्किल ही मिल रही हैं। वजह कि जहां सिर्फ कक्षा पांच तक के विद्यालय हैं वहां पांच के बच्चे विद्यालय छोड़ चुके हैं।
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उन्हें टीसी देने से पहले किताबें जमा करने के लिए कहा जा रहा है। फिलहाल कक्षा चार की किताबें ही पांच के बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। उधर बेसिक शिक्षा अधिकारी मनभरन राम राजभर का कहना है कि नए शिक्षा सत्र में किताबें विद्यालयों में नहीं पहुंच सकी हैं। शासन से छपाई होकर किताबें नहीं मिली हैं।